बीएमसी: अरबों रुपए बेकाम खर्च करने की तैयारी में

नगर निगम भोपाल

भोपाल/राजीव चतुर्वेदी/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश की राजधानी होने के बाद भी नगर निगम भोपाल में अफसरों की मनमानी जारी है। हालत यह है कि लोगों से करों के रूप में वसूली जाने वाली अरबों रुपए की राशि बेकाम ही अपने चहेतों को उपकृत करने के लिए खर्च कर दी जाती है। यह स्थिति तब है जबकि, नगर निगम प्रशासन बेहद गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। निगम प्रशासन ने इस बार भी बजट में कुछ इसी तरह के अरबों रुपए का प्रावधान किया है।  यही वजह है कि हर साल अरबों रुपए खर्च होने के बाद भी शहर में नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं के लिए बेहद परेशान होना पड़ता है। क्या आप जानते हैं कि बीते साल ही ननि द्वारा शहर की बदहाल सड़कों को ठीक करने और चौराहों पर लगे बंद सिग्नल सिस्टम के रखरखाव पर 100 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है। इसमें क्षेत्रों व इलाकों की जानकारी देने वाले संकेतकों का काम भी शामिल है। यह काम निगम प्रशासन द्वारा बीते 3 सालों में एक निजी एजेंसी से कराया जा रहा है। खास बात यह है कि इसके बाद भी यह संकेतक की जगह जेंट्री प्रचार का माघ्यम बने हुए हैं। दरअसल बीते साल के खर्च की समीक्षा बगैर ही उन्हीं कामों के लिए एक अरब का फिर बजट रख दिया गया है।
इस साल यातायात सिग्नल के लिए 2 करोड़: इस साल नगर निगम ने अपने बजट में यातायात सिग्नल के लिए 2 करोड़ रुपए और सड़कों के निर्माण व संधारण के लिए 73.84 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसमें खास बात यह है कि जिस स्ट्रीट लाइट का काम भोपाल स्मार्ट सिटी के पास है , उसके लिए भी 13 करोड़ का प्रावधान कर दिया गया है। इसी तरह से बीते साल शहर में ओपन जिम के लिए 74 लाख रुपए का बजट रखा गया था , लेकिन कोई जिम नहीं खुला और अब फिर 80 लाख रुपए का प्रावधान कर दिया गया। यही हाल खेल मैदान व पार्कों के रखरखाव का भी है। बीते साल इसके लिए 14.83 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था, लेकिन इसके बाद भी निगम द्वारा शहर के केवल 4 पार्कों का ही रखरखाव किया जा रहा है।
तालाबों के संरक्षण के हाल बेहाल
खास बात यह है कि जो तालाब शहर की देशभर में पहचान हैं, उनके रखरखाव के नाम पर हर साल नगर निगम द्वारा करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं इसके बाद भी तालाबों की स्थिति सुधरने की जगह और दयनीय होती जा रही है। इस मामले में तो अंधेर नगरी चौपट राजा वाली कहावत पूरी तरह से नगर निगम पर चरितार्थ होती है। हालत यह है कि तालाब संरक्षण के नाम पर उनके अंदर न केवल सड़कें बनवा दीं , बल्कि तालाब के अंदर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक बना डाले। बीते साल इस मद में निगम प्रशासन ने 8.93 करोड़ रुपए का बजट रखा था , जिसमें वृद्धि करते हुए इस साल के लिए 9.90 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।  लगभग यही हाल मुख्यमंत्री शहरी विकास योजना और हॉकर्स कार्नर योजनाओं के भी हैं।

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