विधानसभा की समितियों का जल्द हो सकता है गठन, मांगे नाम

Assembly committees may be formed soon, name sought

भोपाल/हृदेश धारवार/बिच्छू डॉट कॉम। नई सरकार के गठन के बाद से ही मप्र विधानसभा की समितियों के गठन का काम अटका हुआ है। माना जा रहा है कि अब इन समितियों का गठन जल्द ही हो सकता है। हाल ही में विधानसभा सचिवालय द्वारा दलों से समितियों में शामिल किए जाने वाले विधायकों के नाम भेजने का आग्रह किया गया है। बताया जा रहा है कि इसकी शुरूआत आधा दर्जन समितियों के गठन से करने की तैयारी है। इसके साथ ही दावा किया जा रहा है कि समितियों का गठन होने के बाद विधायकों के सवालों के जवाब भी मिल जाएंगे। हालांकि इस मामले में संविधान विशेषज्ञों की माने तो समितियों के काम पहले से तय हैं। समितियों को सीधे सवाल लेने का अधिकार नहीं है। गौरतलब है कि विधानसभा के शीतकानीन सत्र के लिए विधायकों ने 950 लिखित सवाल दिए थे, लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से सत्र निरस्त कर दिया गया था। इसकी वजह से अब इन सवालों के निरस्त होने की स्थिति बनती दिख रही है। हालांकि विधानसभा सचिवालय का दावा है कि विधायकों के सवालों के जवाब दिए जाएंगे। दरअसल हाल ही में प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा द्वारा बुलाई गई बैठक में समितियों के गठन पर सहमति बनी थी। इसी के बाद समितियों के गठन के लिए दलों से नाम मांगे गए हैं।

किस समिति का क्या दायित्व

  • प्रश्न एवं संदर्भ समिति- सदन में सरकार द्वारा दिए गए उत्तर से असंतुष्ट होने पर संबंधित विधायक अपील कर सकता है।
  • याचिका समिति- इस समिति के समक्ष जन समस्या या फिर जनहित से जुड़ी बात विधायकों के माध्यम से उठाई जा सकती है।
  • शासकीय आश्वासनों संबंधी समिति- सदन में सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन तय समय में पूरे नहीं होते तो विधायक समिति के समक्ष इस मामले को उठा सकता है।
  • गैर सरकारी सदस्यों के विधेयकों तथा संकल्पों संबंधी समिति-यदि कोई विधायक अशासकीय संकल्प या अशासकीय विधेयक सदन में पेश करना चाहता है तो समिति की मंजूरी जरूरी है।
  • महिला एवं बालकों के कल्याण संबंधी समिति- महिला एवं बच्चों के मामलों पर विचार करती है। समिति किसी भी मामले में स्वयं संज्ञान भी ले सकती है, विधायक भी सूचना दे सकते हैं।
  • कृषि विकास समिति- खेती किसानी से जुड़े मामलों पर सुनवाई होती है। सरकारी योजनाओं की समीक्षा भी समिति कर सकती है।

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