निर्वाचन अधिकारियों का घोटाला महालेखाकार ने किया उजागर

Accountant General exposed scam of election officials

भोपाल/गीत दीक्षित/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों की तारीख की घोषणा केन्द्रीय चुनाव आयोग द्वारा की जा चुकी है, लेकिन यह क्या ! चुनावों से पहले ही प्रदेश में एक और घोटाला उजागर हो गया है। आश्चर्य की बात है कि यह घोटाला कोई नेता या पार्टी द्वारा नहीं किया गया, बल्कि खुद निर्वाचन अधिकारियों ने किया है।
दरअसल वर्ष 2017 में लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव कराने के लिए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा चुनाव की गोपनीयता को बनाए रखने के लिए वोटिंग कंपार्टमेंट खरीदे गए थे। इस उपकरण खरीदी में करोड़ों का घोटाला सामने आया है। बता दें कि महालेखाकार की ताजातरीन रिपोर्ट ने इस घोटाले को उजागर किया है। महालेखाकार की रिपोर्ट के अनुसार चुनाव कराने के लिए मध्यप्रदेश में मुख्य निर्वाचन अधिकारी यानी सीईओ द्वारा बैलेट यूनिट को ढकने वाले वोटिंग कंपार्टमेंट की खरीदी में 5 करोड़ 77 लाख रुपयों का बड़ा घोटाला किया गया। यह तथ्य महालेखा परीक्षक की ताजा रिपोर्ट में सामने आए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है भारत चुनाव आयोग के निर्देशानुसार अनुसार केवल स्टील ग्रे रंग की प्लास्टिक शीट वाले वोटिंग कंपार्टमेंट खरीदने थे, क्योंकि यह पारदर्शी एवं पुन: उपयोग किए जाने योग्य होते हैं। लेकिन अधिकारियों ने अपनी मर्जी से खरीदी कर घोटाले को अंजाम दिया। उल्लेखनीय है कि यह घोटाला प्रदेश के एक जिले तक सीमित नहीं था बल्कि कई जिलों में हुआ। इनमें भोपाल, रीवा, सतना, शहडोल, अनूपपुर, बालाघाट, शिवपुरी, टीकमगढ़, दमोह, इंदौर, झाबुआ, कटनी, नीमच, पन्ना, देवास और धार आदि जिलों में हुआ है। महालेखाकार के आॅडिट में इस गड़बड़ी के साथ ही यह भी पाया है कि सीईओ ने वोटिंग कंपार्टमेंट 1844 एवं 1753 रुपए प्रति नग में क्रय किए, जबकि यूपी में इसकी दर 135 से 180 एवं राजस्थान में 222 रुपए थी। इस तरह से इस पूरी खरीदी में 5 करोड़ 77 लाख रुपयों का अनियमित व्यय हुआ।

आयोग के जबाव को सही नहीं माना
हालांकि निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के मुताबिक पीवीसी फोम शीट से बने वोटिंग कंपार्टमेंट भी प्लास्टिक शीट वाले वोटिंग कंपार्टमेंट जैसे ही है। इनकी खरीदी में कोई अनियमितता नहीं हुई है, लेकिन महालेखाकार ने उनके इस जवाब को सही नहीं माना। साथ में ये भी कहा कि भारत चुनाव आयोग के निदेर्शानुसार कोरुगेटेड प्लास्टिक शीट वाले कंपार्टमेंट ही खरीदे जाने चाहिए थे। क्योंकि इसकी एक वजह यह भी है कि पीवीसी वाले कंपार्टमेंट महंगे थे।

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