संघ और खुफिया विभाग की रिपोर्ट से भाजपा में मची खलबली

Union and Intelligence Department report created panic in BJP

भोपाल (प्रणव बजाज)। आगामी दिनों में मध्यप्रदेश की 24 सीटों पर होने वाले उपचुनावों में भाजपा, कांग्रेस के साथ ही बसपा ताल ठोक रही है…इनमें भाजपा के सामने ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतकर सत्ता बचाने की चुनौती है…लेकिन इस बीच इन 24 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी की जमीनी स्थिति को लेकर संघ और सरकार के खुफिया विभाग ने जो रिपोर्ट दी है, उसने भाजपा में खलबली मचा दी है…इस रिपोर्ट में कहा गया है, जनता के रूख के अनुसार यहां हार-जीत के जो स्थितियां बन रही हैं, उसमें भाजपा 24 में से मात्र 7 सीटें ही मुकम्मल रूप से जीतने की स्थिति में है और कई सीटों पर भाजपा के असंतुष्टों और बसपा के मैदान में कूदने से चतुष्कोणीय मुकाबले के हालात हैं।

संघ और खुफिया विभाग की रिपोर्ट में जिन सीटों पर भाजपा की जीत की संभावना बताई गई है, उनमें पूर्व विधायक एदल सिंह कंसाना की सुमावली, ओपीएस भदौरिया की मेहगांव, प्रद्युम्न सिंह तोमर की ग्वालियर, इमरती देवी की डबरा, बिसाहूलाल सिंह अनूपपुर, आगर और राजवर्धन सिंह दत्तीगांव की बदनावर सीटें शामिल हैं। वहीं 17 सीटों पर कांटे के मुकाबले की संभावना बताई गई है।

संघ ने सक्रियता बढ़ाई
सूत्र बताते हैं कि यह रिपोर्ट आने के बाद संघ और भाजपा की सक्रियता पिछले कुछ दिनों से बढ़ गई है। इसीलिए भाजपा और संघ में पिछले कुछ दिनों से लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। बताया जाता है कि संघ ने भाजपा को आश्वस्त किया है कि अगले एक माह के दौरान स्थिति बदलने के लिए भावी प्रत्याशियों के साथ ही पार्टी को भी विधानसभा क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ानी होगी।

सिंधिया समर्थकों के क्षेत्र में स्थिति खराब
अभी कुछ दिन पहले ही संघ ने उपचुनाव वाले विधानसभा क्षेत्रों में पूर्णकालिकों को तैनात किया था। उन्हें हर सप्ताह विधानसभा क्षेत्र की रिपोर्ट देने को कहा गया था। पहले सप्ताह की रिपोर्ट आने के बाद संघ ने उन्हें क्षेत्र में भाजपा की वर्तमान स्थिति का सर्वे करने को कहा था। करीब दो सप्ताह के सर्वे के बाद पूर्णकालिकों ने यह रिपोर्ट संघ को भेजी है। इसके अलावा सरकार ने अपने खुफिया विभाग को अलग से इन सीटों पर पार्टी और कांग्रेस के बागी नेताओं को उम्मीदवार बनाने पर जमीनी स्थिति क्या बन रही है, उसकी रिपोर्ट देने का कहा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि कांग्रेस बागी नेताओं को भाजपा उम्मीदवार बनाती है, तो ज्यादातर सीटों पर पार्टी की फजीहत हो सकती है।

इन सीटों पर स्थिति ज्यादा खराब
संघ को सौंपी गई रिपोर्ट में कांग्रेस के कब्जे में रही जौरा के साथ ही रघुराज सिंह कंषाना की मुरैना, गिर्राज डंडौतिया की दिमनी, कमलेश जाटव की अम्बाह, रणबीर जाटव की गोहद, मुन्नालाल गोयल की ग्वालियर पूर्व, रक्षा संतराम सरौनिया की भांडेर, जसमंत जाटव की करैरा, सुरेश धाकड़ की पोहरी, महेंद्र सिंह सिसौदिया की बमौरी, जजपाल सिंह जज्जी की अशोकनगर, बृजेंद्र सिंह यादव की मुंगावली, गोविंद सिंह राजपूत की सुरखी, प्रभुराम चौधरी की सांची, मनोज चौधरी की हाटपिपल्या, तुलसीराम सिलावट की सांवेर और हरदीप सिंह डंग की सुवासरा सीट पर भाजपा की स्थिति चिंतनीय है। रिपोर्ट में इसके पीछे कारण यह बताया गया है कि इन क्षेत्रों में उम्मीदवार के खिलाफ माहौल है।

सिंधिया के साथ बनेगी रणनीति
पिछले 3 दिनों से संघ और भाजपा के नेताओं की कई दौर की बैठकों के बाद यह फैसला लिया गया है कि 1 जून को भोपाल में सिंधिया के साथ बैठकर चुनावी रणनीति तैयार की जाए। सिंधिया के प्रभाव वाले क्षेत्रों में उनकी सलाह अनुसार रणनीति बनाकर काम किया जाएगा।

करो या मरो की स्थिति
सत्ताधारी दल भाजपा और कांग्रेस के लिए यह उपचुनाव करो या मरो वाले बन चुके हैं। इसलिए दोनों पार्टियों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। उधर, बसपा के चुनाव मैदान में कूदने तथा कांग्रेस एवं भाजपा के बागियों के कारण कई सीटों पर चतुष्कोणीय मुकाबले की स्थिति बन रही है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस की चुनावी रणनीति से असमंजस की स्थिति बन गई है।

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