दिग्विजय के एक ट्वीट पर चौधरी ने छोड़ी थी कांग्रेस


कांग्रेस में और बढ़ेंगे टकराव, फ्रंट फुट पर आए चौधरी


Chaudhary left Congress on a tweet by Digvijay

भोपाल (गणेश पांडे)। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने के बाद इस बात की संभावना बनने लगी थी कि कांग्रेस में अब सब ठीक-ठाक हो जाएगा और रही सही गुटबाजी भी खत्म हो जाएगी। मगर एक बार फिर पार्टी के भीतर टकराव के आसार बनने लगे हैं। एक तरफ चिर परिचित नेता दिग्विजय सिंह हैं तो दूसरी तरफ से टकराने के लिए तैयार ग्वालियर चंबल के चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी हैं। आखिर दिग्विजय सिंह की पार्टी के भीतर वर्तमान में क्या यह हैसियत है कि वह किसी दूसरे नेता पर इस तरह की बात कह सकें। दिग्विजय सिंह और चौधरी राकेश चौधरी के बीच शुरू हुआ समर कहां जाकर ठहरेगा यह कोई नहीं जानता।

इसलिए राकेश से नाराज हैं दिग्विजय
राकेश सिंह की आस्था बदलने की प्रवृत्ति दिग्विजय की नाराजगी का सबब है। वैसे भी राजनीति में नेताओं की आस्था और निष्ठा स्थाई नहीं रहती। मध्य प्रदेश के विभाजन के बाद चौधरी राकेश सिंह दिग्विजय सिंह कैंप के सदस्य रहे। इसके बाद वे सुरेश पचौरी, भाजपा के नेता नरोत्तम मिश्रा और फिर पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया कैंप में पहुंच गए थे। सिंधिया और दिग्विजय सिंह ही राजनीतिक शत्रुता किसी से छिपी नहीं है।
बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि जब मध्यप्रदेश का विभाजन हुआ था तब स्वर्गीय पंडित श्यामाचरण शुक्ला प्रदेश के दो नेताओं हीरालाल सिलावट और चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को लेकर दिग्विजय सिंह के पास पहुंचे थे। इनमें से हीरालाल सिलावट इस दुनिया में नहीं रहे। पंडित जी ने दिग्विजय सिंह से आश्वासन लिया था कि वे उनके दोनों अनुयायियों को राजनीतिक प्रश्रय देंगे। स्व. पंडित शुक्ल के कहने पर ही दिग्विजय सिंह ने स्व सिलावट और चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया था। 2003 के चुनाव के पूर्व ही चौधरी राकेश सिंह ने दिग्विजय सिंह के कैंप छोड़कर सुरेश पचौरी के साथ आ गए। 2013 में भी कांग्रेस विपक्ष में ही रही। 2013 में विपक्ष के नेता अजय सिंह द्वारा लाए गए शिवराज सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के दौरान चौधरी राकेश सिंह 11 जुलाई 2013 कांग्रेस छोड़कर नरोत्तम मिश्रा की अगुवाई में भाजपा में चले गए। इसके बाद अप्रैल 19 में चौधरी राकेश सिंह ने ग्वालियर चंबल संभाग के कद्दावर नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में कांग्रेस में वापसी की। तब से उनकी पहचान सिंधिया समर्थक के रूप में बन गई। सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद चौधरी राकेश सिंह वापस पचौरी खेमे से जुड़ गए। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पचौरी ही उन्हें उपचुनाव में मेहगांव से टिकट देने की पुरजोर वकालत कर रहे हैं। कांग्रेस की गुटबाजी में दिग्विजय सिंह और सुरेश पचौरी एक-दूसरे के विरोधी माने जाते हैं।

दिग्विजय के एक ट्वीट पर चौधरी ने छोड़ी थी कांग्रेस
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का वह ट्वीट जिसमें उन्होंने लिखा था कि बच्चा बच्चा राम का, राघवजी के काम का। तब राकेश का कहना था, हम हिन्दू हैं और जिस तरह कांग्रेस के नेता ट्वीट कर भगवान राम को बदनाम कर रहे हैं, यह सहन नहीं किया जा सकता।

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