उपचुनाव की आहट: सिंधिया का ऑडियो वायरल, अनीता कह रही, 50 लाख अग्रवाल के पास रखवा दिए, टिकट नहीं मिला


विधानसभा चुनाव-2018 में टिकट वितरण के समय का है ऑडियो, बिच्छू डॉट कॉम इस ऑडियो की पुष्टि नहीं करता है, लेकिन राजनीतिक हलके में इससे हड़कंप पैदा हो गया।

Call of by-election: Scindia's audio goes viral, Anita is saying, keep 50 lakhs with Agarwal, tickets not found

भोपाल (राधेश्याम दांगी)। मध्यप्रदेश में उप चुनाव की अभी घोषणा भी नहीं हुई कि, राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस के पूर्व नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा ज्वाइन करने के बाद सिंधिया पर कांग्रेस तरह-तरह के हमले कर रही है। विधानसभा चुनाव-2018 में पैसों की लेनदेन का एक ऑडिया वायरल हो रहा है, जिसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया और अनीता के बीच टिकट को लेकर 50 लाख रुपए की लेनदेन की बात चल रही है। 2 मिनट 56 सेकेंड के इस ऑडियो में महाराज, अनीता को आश्वस्त कर रहे हैं कि राहुल गांधी के आगे वे बेबस थे इसलिए अनीता को टिकट नहीं दिला पाए। ऑडियो में महाराज यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि 20 दिन बाद हमारी (कांग्रेस की, जब सिंधिया कांग्रेस में थे) सरकार बनने वाली है और 15-20 दिन बाद वे अनीता को कहां से कहां पहुंचा देंगे इसकी वह कल्पना भी नहीं कर सकती है। अनीता अपने दुखी मन और भरे गले से कह रही है कि उन्होंने पूरी तैयारी कर ली थी। भारत के पाराशर के कहने पर उन्होंने एडवांस में परसूल अग्रवाल नामक व्यक्ति के पास 50 लाख रुपए रखवा दिए थे। इसके बाद भी उन्हें टिकट से वंचित रहना पड़ा। जब पैसों की बात कहते हुए अनीता का गला भर गया तो महाराज, अनीता को ढांढस बंधाते हुए कह रहे हैं कि तीन-पांच हजार मतों से हारने वालों को राहुलजी (राहुल गांधी) उम्मीदवार बनाने पर तैयार नहीं हुए। इसलिए वे (महाराज) भी असहाय रहे। ऑडियो में महाराज यह कह रहे हैं कि आखिरी समय तक टिकट रोक कर रखा, लेकिन राहुल गांधी के आगे वे भी बेबस रहे और अनीता का काम नहीं करवा पाए।

वायरल ऑडियो का ट्रांसक्रिप्शन पढिए…
अनीता– हलो… हां अनीता बोल रही हूं।
अज्ञात– महाराज बात करेंगे…।
अनीता– जी…। घंटी/बजर बज रही।
महाराज– हलो…।
अनीता- महाराज प्रणाम।
महाराज- हां, अनीता इस बार मैं नहीं कर पाया।
अनीता- महाराज…, महाराज…। यदि आप थोड़ी सी बात सुन ले महाराज…। जैसी तैयारी…।
महाराज– हां, बोलो बोलो…।
अनीता– महाराज जैसी तैयारी का कहा था भारत पाराशरजी ने तो मैंने, उन्होंने कहा पैसों का, उन्होंने कहा महाराज कि पैसे परसूल अग्रवाल जी के पास रख दो, तो पैसा मैंने 50 लाख रुपए 20 दिन पहले परसूल अग्रवाल जी पे रख दिए। समाज के सारे लेटर, समाज के सारे लोगों से बात करवा दी, पुरे महाराज मैंने मंडी के व्यापारियों से सारे मेरे पक्ष में है, पहली बार मेरे ऐसा हो रहा था महाराज। यह अशोकनगर सीट कांग्रेस की जा रही थी। महाराज जब इतना विरोध है, जैसे भी लेटरपेड, जबरदस्ती ले लिए हों, कुछ भी कर लिए हो, जो जीतेगा नहीं महाराज, मैं कह रही हूं महाराज। (बात करते-करते अनीता का गला भर आता है ) ये… वो… पूरा यादव समाज उसका विरोध कर रहा है। मुस्लिम समाज… मुझे इतने सारे लोगों ने ये किया था कि…। मुस्लिम समाज, अनीता दीदी…। और इटोरिया के कहने पर महाराज, इटोरिया ने पैसे ले लिए और आपसे कह दिया कि हरिजन समाज के नेता नहीं है, उसने एक-एक पार्षद से पचास हजार रुपए लिया और पार्षद को पचास हजार में बेच। …और चैथे नंबर पर गए। पार्षद ने ऐसा सट्टा मारा। और महाराज मैं महाराज मेरे खून में गद्दारी नहीं है महाराज। मैं पच्चीस साल से आपकी सेवा कर रही हूं महाराज।
महाराज– मालूम है, मालूम है। मालूम है अनीता मुझे।
अनीता– महाराज…
महाराज- तुम चिंता मत करो, तुम चिंता मत करो…।
अनीता- मैं कैसे मुंह बताऊं, महाराज मैं क्या करुं… महाराज…
महाराज- तुम्हारा पूरा काम, तुम्हारी पूरी रखवाली मैं करुंगा। तुम चिंता मत करो।
अनीता– महाराज देखना…। मेरी केंटीन छुड़ा ली थी ये बोत ज्यादा कांग्रेस, कांग्रेस कर… महाराज….।
महाराज- मालूम है, मुझे मालूम है अनीता, हमारी सरकार बनेगी, ये विश्वास रखो, तुम्हारी पूरी रखवाली मैं करुंगा अनीता, तुम चिंता न करो। मैं हूं न तुम्हारे लिए भर्ई… तुम चिंता मत करो। पूरा न्याय मैं दिलाऊंगा और पूरा सम्मान मैं दिलाऊंगा। तुम चिंता मत करो।
अनीता– महाराज…।
अनीता- महाराज ये हर कांग्रेस की हत्या करता है, महाराज। चाहे नगर पालिका हो, चाहे विधानसभा हो महाराज।
महाराज- मालूम है, इस बार क्या हुआ है अनीता की जो लोग तीन, पांच हजार से कम से हारे हुए हैं, उनको राहुल गांधीजी ने पूरे मप्र में सारे जगह टिकट नहीं दिए। इसलिए मैंने इतनी देर मैंने अटका के रखा था।
अनीता– जी…हम्म
महाराज- पर जो नियम कांग्रेस का बनाया जैसे रविशंकर चौधरी है… तुम्हारा हटा का, उसका भी हो गया है। बनवारी है जौरा का उसका भी टिकट क्लीयर हो गया। जो भी लोग तीन से पांच हजार से कम से हारे थे पिछली बार उनका टिकट क्लीयर हुआ। इसलिए इस, उस नियम के आगे हम कुछ नहीं कर पाए। पर मैंने पूरी कोशिश की कि एंड टाइम तक तुम लोगों को भी मालूम है, मैंने रोक के रखा था। पर, अब … वो राहुलजी का… निर्देश है तो क्या करें, उसके सामने हम कुछ नहीं कर सकते।
अनीता– जी महाराज, क्या करुं मैं…।

महाराज- मैं जानता हूं कि तुम कितनी जुझारु हो, कितनी संकल्पित हो… मैं जानता हूं और तुमको मैं पूरा न्याय दिलाऊंगा। सरकार बनने दो, मैं तुमको कहां, तुम कल्पना भी नी कर सकती हो। मैं करुंगा। तुम मुझ पर विश्वास रखो। पंद्रह बीस दिन की बात है। उसके बाद तुमको पूरा न्याय मिलेगा।

दिग्विजय का ट्वीट

सिंधिया और उनकी माता के अस्वस्थ्य होने पर जहां पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, जयवर्धन सिंह सहित अन्य नेता उनके स्वस्थ्य होने की कामना करते हुए सोशल मीडिया पर नजर आए, वहीं, उसी दिन 2018 का ऑडियो भी वायरल किया गया है। वहीं, दिग्विजय ने ट्वीट करके कहा है कि ‘पैसों के बल पर ही जनता का दिया गया जनमत बदलना है तो चुनाव की क्या आवश्यकता?। यदि भारत में प्रजातंत्र बचाना है तो मप्र में उप चुनावों में ठगी हुई जनता को भाजपा को सबक सीखाना चाहिए। वहीं, उन्होंने एक अन्य टवीट में सिंधिया के कट्टर समर्थक तुलसी सिलावट के बारे में लिखा कि ‘तुलसी सिलावट जी की करगुजारियों का एक सत्य। भूतपूर्व विधायक लाखन सिंह बघेल से मांगी रिश्वत।

क्या है ऑडियो का सच
सवाल- ऑडियो सुनने के बाद एक सवाल सहज उठता है कि ज्योतिरादित्य क्या कांग्रेस में इसीलिए छटपटा रहे थे कि उन्होंने अपने समर्थकों, अनुयायियों से पैसे ले लिए थे और सरकार बनने के बाद उन्हें किसी मुकाम पर पहुंचाने का वादा किया था, जो नहीं निभा पाए?। सरकार बनने के बाद जब वे यह वादा पूरा नहीं कर पाए, तो महाराज पर अपने ही समर्थकों का दबाव बनने लगा हों, इसलिए उन्होंने कांग्रेस सरकार गिरा दी?

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