कंबोडिया में सैन्य ठिकाना बनाने की राह पर चीन

नाम पेन्ह। पूरी दुनिया में सैन्य ठिकाने फैलाने की कोशिश में जुटा चीन अब कंबोडिया में भी डारा सकोर क्षेत्र में हवाई और समुद्री पोर्ट बनाने को लेकर चर्चा में आया है। यह पोर्ट कंबोडिया में किसी सैन्य ठिकाने की तरह काम करेगा। हालांकि कंबोडिया ने इससे इनकार किया है लेकिन माना जा रहा है कि चीन और कंबोडिया के बीच इस मामले को लेकर एक समझौता हो चुका है। समझौते के तहत चीनी सेना कंबोडिया के समुद्री सैन्य ठिकाने का अगले 40 वर्ष तक इस्तेमाल कर सकेगी। इसी समझौते के तहत दारा सकोर की हवाई पट्टी को भी लीज पर देने की योजना है। इस समझौते पर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय अपनी आपत्ति और आशंका जता चुका है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीनी कंपनी तियानजिन ने 3.8 अरब डॉलर लगाकर दारा सकोर को 99 सालों के लिए लीज पर लिया है। इसके तहत कंबोडिया के तटीय क्षेत्र का 20 फीसदी हिस्सा आता है। चीन की कंपनी तियानजिन यूनियन डेवलपमेंट ग्रुप ने दारा सकोर के नेशनल पार्क में हवाई पट्टी और पास के रिजॉर्ट में बंदरगाह बनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये प्रोजेक्ट चीन के विस्तारवादी रवैये पर एक और कार्रवाई है।
दक्षिण चीन सागर में मिलेगी मजबूती
दारा सकोर की हवाई पट्टी कंबोडिया का सबसे बड़ा रनवे होगी और अगर चीन सैन्य बेस की तरह इसका इस्तेमाल करे तो दक्षिण चीन सागर की दावेदारी करने वाले देशों के खिलाफ वह सबसे मजबूत हो जाएगा। यहां करीब 80 प्रतिशत हिस्से पर चीन अपना दावा करता है, जबकि ये समुद्र 6 देशों की सीमाओं से सटता है और सभी देश इसके थोड़े-थोड़े हिस्से को अपना मानने का दावा करते हैं।
चीन के आगे समर्पण के आरोप
कर्ज देकर कब्जा करने की रणनीति के तहत चीन कंबोडिया में भारी निवेश कर रहा है। चीन ने 2017 में वहां 5.8 अरब डॉलर का निवेश किया था और 2023 तक इस निवेश को 10 अरब डॉलर तक पहुंचाने में है। यह हालत देखते हुए दूसरे देश आरोप लगा रहे हैं कि कंबोडिया ने अब चीन के आगे आर्थिक समर्पण कर दिया है।

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