एचपीवी वायरस महिलाओं में बढ़ाता है गर्भाशय कैंसर का खतरा

HPV virus increases risk of uterine cancer in women

बिच्छू डॉट कॉम। गर्दन, हाथ-पैर या फिर जननांगों पर पैपिलोमा यानी मस्सों का पाया जाना आम बात है। कई बार तो ये मुंग के अंदर गले में भी हो जाते हैं। बेशक इनमें कोई दर्द नहीं होता लेकिन कुछ मस्से बेहद खतरनाक होते हैं। एच.पी.वी यानी ह्राूमन पैपिलोमा वायरस कैंसर की निशानी भी हो सकता है इसलिए इन्हें हल्के में मत लें और समय पर उपचार करवाएं तथा वैक्सीन लगाएं।

पैपिलोमा एक विषाणु संक्रमण है और ये एक तरह से शरीर पर मस्से(वॉट्स) के रूप में नजर आते हैं। यह मस्से परजीवी होते हैं। परजीवी का अर्थ यह है कि हमारे शरीर में कुछ पल रहा है। हमारा शरीर इन परजीवियों के लिए एक होस्ट का काम कर रहा होता है और यह अंदर ही अंदर हमारे शरीर की कोशिकाओं को खाकर पलते रहते हैं। यही नहीं पलने का साथ-साथ यह शरीर में फैलते भी हैं। कुछ केसों में यह स्वयं सूख जाते हैं और कई मामलों में यह सालों-साल रहते हैं।

क्योंकि पैपिलोमा विषाणु संक्रमण है इसलिए यह एक शरीर से दूसरे शरीर में फैलता है। इसका वायरस शरीर में उस जगह से प्रवेश करता है जहां से त्वचा कटी-फटी हो। इसके बाद यह खून में मिल जाने के बाद आगे फैलता है। वहीं इसका दूसरा इसका कारण असुरक्षित शारीरिक संबंध भी हो सकता है क्योंकि मुंह से लेकर गर्भाश्य के अंदर तक भी हो सकते हैं।

मुख्य रूप से एचपीवी के 10 प्रकार बताए गए हैं मगर इसकी क्लासिफिकेशन के मुताबिक यह 130 प्रकार का है। एचपीवी टाइप 1, 2, और 4 आम मस्से होते हैं। इन्हीं में से कुछ मस्से गर्भाश्य में पाये जाने वाले हैं जो सर्विक्स कैंसर का कारण हो सकते हैं। यही नहीं, एचपीवी के वायरस के 6 प्रकार का कैंसर हो सकता है। यह वायरस सर्वाइकल कैंसर से लेकर पेनिस, वजाइना, एनस और ओरोफेरिन्क्स के कैंसर का कारण बनता है।

महिलाओं को अधिक खतरा
एचपीवी संक्रमण के लगातार रहने पर महिलाओं में गर्भाशय के कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। यदि गर्भाशय में असामान्य कोशिकाएं पनप रही हैं और इस बात का पता चलने पर इलाज किया जा सकता है। एक रिपोर्ट के मुतबिक गर्भाशय कैंसर के अधिकतर मामले एचपीवी के कारण होते हैं।

इन लोगों को अधिक खतरा…
– अधिक शराब या सिगरेट पीने वाले लोद
– बढ़ती उम्र
– एक से अधिक लोगों के साथ यौन संबंध बनाना
– जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है।

एचपीवी के लक्षण
-शरीर के विभिन्न हिस्से में मस्से बन जाना, जिन्हें वॉर्ट्स भी कहते है। ये जिनाइटल वॉर्ट्स, कॉमन वॉर्ट्स, प्लैंटर वॉर्ट्स यानी तलवे का मस्सा और फ्लैट वॉर्ट्स हो सकते हैं।
-मल से खून आना, खुजली या दर्द होना।
-सूजन महसूस होना।
-गले और कान में लगातार दर्द रहना।
-सांस लेने या भोजन निगलने में परेशानी।
-अचानक वजन कम होना।
-आवाज में बदलाव व गले में खराश।

इलाज
शरीर में कहीं भी वॉट्स या मस्से नजर आए तो डॉक्टर से सलाह ली जानी चाहिए। साधारण मस्सों के लिए कई तरह की क्रीम्स आती हैं लेकिन असाध्य मस्सों के लिए वैक्सीनेशन की जरूरत होती है जो डॉक्टर की सलाह से ली जानी चाहिए।

कैसे रखें बचाव?
– महिलाओं को लगातार टेस्ट करवाते रहना चाहिए।
– एक से अधिक लोगों से संबंध न बनाएं।
– युवाओं के लिए एचपीवी वायरस से बचने का टीका भी मौजूद है।

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