बचपन से बागी थी कंगना… पापा से कहा था… थप्पड़ का जवाब थप्पड़ से मिलेगा…

कंगना

मुंबई/बिच्छू डॉट काॅम। अभिनेत्री कंगना रनौत के बागी तेवरों की आज घर घर में चर्चा है… लेकिन आपको बतादें कंगना की यह बगावत आज से नहीं वरन पिछले तमाम सालो से चली आ रही है….  एक बार तो उसने अपने पापा का हाथ पकड़कर कहा….. आप थप्पड़ मारेंगे तो मैं भी आपको थप्पड़ ही मारूंगी…… अब यह सारे खुलासे खुद कंगना कर  रही हैं। कंगना रनौत बॉलीवुड के वह एक्ट्रेस हैं, जो सोशल मीडिया पर अक्सर चर्चाओं में रहती हैं. ट्विटर पर वह अक्सर सभी मुद्दों पर राय रखती रहती हैं. बॉलीवुड की पंगा क्वीन कंगना रनौत ने हाल ही में अपनी जिंदगी से जुड़ी कुछ बातों को शेयर किया है, जिनकी अब चर्चाएं हो रही हैं।

उन्होंने ट्वीट कर बताया कैसे 15 साल की उम्र में ही बागी बन गई थीं और अपने पापा के साथ बगावत की.बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने ट्वीट किया, मेरे पिता के पास लाइसेंस्ड राइफल और बंदूके हैं. मेरे बचपन में वह डांटते नहीं बल्कि दहाड़ते थे. उनकी आवाज से मेरी पसलियां तक कांपती थीं. अपनी जवानी में वो अपने कॉलेज में गैंग वॉर करवाने के लिए मशहूर थे, जिसकी वजह से उन्हें गुंडा माना जाता था. मैंने 15 साल की उम्र में उनसे लड़ाई की थी और घर छोड़ दिया था. ऐसे में, मैं 15 साल की उम्र में पहली बागी राजपूत महिला बन गई थी. उन्होंने दूसरा ट्वीट किया और कहा , इस चिल्लर इंडस्ट्री को लगता है कि सफलता मेरे सिर चढ़कर बोल रही है और ये लोग मुझे ठीक कर सकते हैं. मैं हमेशा से बागी थी, ये बस सफलता पाने के बाद मेरी आवाज और बुलंद हो गई है और आज मैं देश की सबसे महत्त्वपूर्ण आवाजों में से एक हूं. इतिहास गवाह है कि जिसने भी मुझे ठीक करने की कोशिश की है, मैंने उसे ठीक कर दिया है.कंगना यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने एक और ट्वीट किया और कहा- मेरे पापा चाहते थे कि मैं दुनिया की बेस्ट डॉक्टर बनूं. उन्होंने सोचा कि हमें बेस्ट इंस्टिट्यूट में पढ़ाकर वो एक क्रांतिकारी पापा बन रहे हैं. जब मैंने स्कूल जाने से मना किया तो उन्होंने मुझे थप्पड़ मारने की कोशिश की, तब मैंने उनका हाथ पकड़ लिया था. मैंने उन्हें कहा- अगर आप मुझे थप्पड़ मारोगे तो मैं भी आपको थप्पड़ मरूंगी. पंगा गर्ल ने आगे बताया, वो हमारे रिश्ते का अंत था. उन्होंने मुझे देखा, फिर मेरी मां को देखा और फिर कमरे से चले गए. मुझे पता था कि मैंने अपनी सीमा पार कर दी है और मैंने उन्हें कभी दोबारा नहीं पाया. लेकिन मैं पिंजरे में नहीं रह सकती थी और आजादी पाने के लिए मैं कुछ भी कर सकती थी।

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