मिर्जापुर 2 रिव्यू: कालीन भैया ने लौटते ही जमाया अपना रुआब, निगाहें इस बार ‘स्त्री शक्ति’ पर

कलाकार: दिव्येंदु शर्मा, अली फजल, श्वेता त्रिपाठी, रसिका दुग्गल और पंकज त्रिपाठी आदि।
निर्देशक: गुरमीत सिंह और मिहिर देसाई
ओटीटी: प्राइम वीडियो
रेटिंग: **1/2

मुम्बई, बिच्छू डॉट कॉम। दो साल हो गए मिर्जापुर पर कब्जे की कहानी में खून की नदियां बहे हुए। उत्तर प्रदेश में तब से इतना असली का क्राइम हो चुका है कि प्राइम वीडियो को देश में अपने पांव खड़ा करने वाली इस सीरीज के दूसरे सीजन का खून खराबा फिल्मी लगने लगा है। उत्तर प्रदेश ने इस बीच में बिकरू देखा है। आठ पुलिसवालों की लाशें गिरती देखी हैं। एक माफिया डॉन को मंदिर में शरण लेते देखा है। और, भोर में जानवरों के सड़क पर आ जाने के बाद गाडिय़ां पलटती देखी हैं और ये भी देखा है कि महामृत्युंजय मंत्र भले भुजा चीरकर अंदर बैठा दिया जाए, लेकिन अंत बुरे का बुरा ही होता है।
प्राइम वीडियो की सीरीज ‘मिर्जापुर’ के दूसरे सीजन के लिए इस बार चुनौती पहले से कहीं ज्यादा बड़ी है। कुछ कुछ वैसे ही जैसे ‘सैक्रेड गेम्स 2Ó के लिए इसका पहला सीजन ही कसौटी बन गया था। ‘मिर्जापुर’ का पहला सीजन रगों में दौडऩे की बजाय आंखों से लहू टपकाने वाली नस्ल का तांडव रहा है। इस बार भी कहानी वहीं से फायर हो रही है। कट्टा, तमंचा, गोला, बारूद सब पहले से ज्यादा है। प्राइम वीडियो वालों ने शो को तय समय से पहले भले रिलीज कर दिया हो लेकिन रिव्यू के लिए जो दो एपीसोड समीक्षकों को भेजे गए, उसमें अभी बहुत कुछ खुलना बाकी है।

अखंडानंद उर्फ कालीन भैया का साम्राज्य विस्तार किन किन संधियों और आक्रमणों से होकर गुजरने वाला है, इसका खाका कहानी के शुरू में ही खींच दिया गया है। मूसलाधार बरसती गालियां हैं और तौल में खरीद गई गोलियां हैं। ये दुनिया आम मनोरंजन के शौकीनों के लिए नहीं है। पिछली बार का याद है ना? यहां सब कुछ इफरात में है। फौलादी जिस्म भी और जिस्मानी रिश्ते भी।
इस बार की कहानी घायल शेरों के मुकाबले की कहानी बन चुकी है। गुड्डू पंडित को बदला लेना है, हर उस जख्म को जो उसके शरीर पर तो है डिम्पी और गोलू को भी जो अंदर तक छील गया है। बब्लू को वह भूला नहीं है। चूडिय़ों की जगह अब कट्टों ने ले ली है और लड़कियों की लाली इस बार खून के रंग से आने वाली है। हर तरफ खून है। सबकी आंखों में खराबा है। कहानी इस बार मिर्जापुर से चलकर लखनऊ तक पहुंच चुकी है। कंप्यूटर और उसके दोस्तों को लोग इस बार खूब मिस करने वाले हैं। लेकिन, जो किरदार कभी कुछ नहीं मिल करता वो बीना फिर अपना फन काढ़ चुकी हैं। इस कहानी में त्रिया चरित्र भर भरके है, लेकिन ‘मिर्जापुर 2’ के पहले दो एपीसोड्स के सुपरस्टार हैं कालीन भैया यानी अपने पंकज त्रिपाठी। सिनेमा में जोकरई करते दिखने वाले पंकज त्रिपाठी का ये रूप दिल दहला देने वाला है।
कहानी इस बार मिर्जापुर से चलकर लखनऊ तक पहुंच चुकी है। कंप्यूटर और उसके दोस्तों को लोग इस बार खूब मिस करने वाले हैं। लेकिन, जो किरदार कभी कुछ नहीं मिल करता वो बीना फिर अपना फन काढ़ चुकी हैं। इस कहानी में त्रिया चरित्र भर भरके है, लेकिन ‘मिर्जापुर 2’ के पहले दो एपीसोड्स के सुपरस्टार हैं कालीन भैया यानी अपने पंकज त्रिपाठी। सिनेमा में जोकरई करते दिखने वाले पंकज त्रिपाठी का ये रूप दिल दहला देने वाला है। अली फजल लगता है जैसे हर सीन से पहले दस बीस दंड और चालीस पचास बैठकें मारने के बाद ही डॉयलॉग बोलने आते हैं। लेकिन, देखना ये भी है कि इसके चलते वह सामान्य नहीं दिख पाते। श्वेता त्रिपाठी के किरदार पर इस बार सबकी निगाहें इस मामले में भी ज्यादा जमी हैं क्योंकि असल कांड पिछली बार इनके ‘हाथों’ ही हुआ था। दिव्येंदु शर्मा के साथ चहेरे की मासूमियत की दिक्कत है। शीबा चड्ढा और राजेश तेलंग के किरदारों में कुछ खास बदला नहीं है। कहानी खुलनी शुरू हो चुकी है, क्लाइमेक्स अभी बाकी है।

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