विक्रम संवत के प्रवर्तक विक्रमादित्य उज्जैन के शासक थे

विक्रमादित्य की ऐतिहासिकता पर प्रख्यात विद्वान डॉ. एस.के. बाजपेयी का व्याख्यान

उज्जैन/भोपाल, बिच्छू डॉट कॉम। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय मध्यप्रदेश भोपाल द्वारा आयोजित वेब श्रृंखला का छठवां ऑनलाइन व्याख्यान शनिवार को आयोजित किया गया। उज्जैन के शासक ‘विक्रमादित्य की ऐतिहासिकता’ पर व्याख्यान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के बैंगलुरु सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. शिवाकान्त बाजपेयी द्वारा प्रस्तुत किया गया। डॉ. बाजपेयी ने विक्रमादित्य से सम्बन्धित साहित्यिक साक्ष्यों, लोक कथानकों, अभिलेखीय साक्ष्यों एवं पुरातत्वीय साक्ष्यों के आधार पर ईसा पूर्व प्रथम शताब्दी में मध्यभारत के विशाल गणराज्य के होना प्रमाणित किया। मालव गणराज्य की राजधानी उज्जैन थी, जिसके शासक विक्रमादित्य लोकप्रिय शासक थे। शकों को पराजित कर विक्रमादित्य ने उज्जैन को अपनी राजधानी बनायी और ईसा पूर्व 57 का एक संवत चलाया, जिसे आज विक्रम संवत कहा जाता है। डॉ. बाजपेयी ने साहित्यिक साक्ष्यों को पुरातत्विक साक्ष्यों के साथ समीकृत किया और लोक कथाओं के नायक उज्जैन के राजा विक्रमादित्य की ऐतिहासिकता सिद्ध की। पूर्व में इतिहासकार विक्रमादित्य के काल एवं ऐतिहासिकता पर एकमत नहीं थे, किन्तु उज्जैन के स्थानीय इतिहासकारों एवं पुरातत्व विभाग के शोध कार्यों से विक्रमादित्य के सम्बन्ध में नवीन जानकारी प्रकाश में आयी है। डॉ. बाजपेयी ने नवीन जानकारियों की पुष्टि की है। उल्लेखनीय है कि डॉ. वाजपेयी ने 50 से अधिक रिसर्च पेपर और पुरातत्व के विभिन्न पहलुओं पर 10 पुस्तकें लिखी हैं। वर्ष 2003-04 में ‘सिरपुर-पुरातत्व एवं पर्यटन’ पर उनके द्वारा किये गये कार्य के लिये उन्हें पुरातत्ववेत्ताओं के बीच ख्याति प्राप्त हुई। डॉ. वाजपेयी को उनके लोकप्रिय कार्य ‘प्रारंभिक बौद्ध-धर्म एवं समाज’ के लिये उन्हें वर्ष 2003-04 में इंदिरा गाँधी नेशनल अवार्ड प्रदान किया गया। वे कलश और कौशला जर्नल आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया और छत्तीसगढ़ राज्य पुरातत्व विभाग से भी जुड़े रहे हैं।

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