मंत्रियों की पसंद नापसंद को ध्यान में रखकर हुए स्थानांतरण

Transfer keeping in mind the likes of ministers and dislikes

– कई मंत्रियों की अपने विभागों में अफसरों से पटरी नहीं बैठ पा रही थी तो कई अफसरों की शिकायतें भी थीं…

भोपाल/गणेश पाण्डेय/बिच्छू डॉट कॉम। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने नौकरशाहों के तबादले की एक छोटी सूची जारी की है। इस सूची में भी उन अफसरों को बदला गया है, जो मंत्रियों के इशारे पर काम नहीं कर रहे थे। सहकारिता माफिया के दबाव में एनके अग्रवाल हटाए गए तो आयुष मंत्री ने अपने पीएस एवं आयुक्त हजेला को बदलवा दिया।
सूत्रों का कहना है कि मंत्री ‘अपनों’ को उपकृत कराना चाह रहे थे और यह नौकरशाह उनकी सुन नहीं रहे थे। बुधवार को जारी आईएएस अफसरों के तबादले आदेश में प्रतीक हजेला को प्रमुख सचिव एवं आयुक्त आयुष से हटा दिया गया है। उनके स्थान पर करलिन देशमुख प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा एवं कौशल को प्रमुख सचिव आयुष के पद पर पदस्थ किया है। प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा व रोजगार श्रीमती करलिन खोंगवार देशमुख और संचालक कौशल विकास धनराजू एस को विभागीय मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया की नाराजगी भारी पड़ी। श्रीमती देशमुख, धनराजू एस नियम कानून के तहत कार्य करने वाले अधिकारी है। इसी कारण सरकार ने स्थानांतरण के बाद दोनों अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है।
दोनों अधिकारियों का स्थानांतरण आदेश रोजगार मेले की समाप्ति के तत्काल बाद जारी किया गया। नियमों से बाहर जाकर काम नहीं करने वाले धनराजू के खिलाफ करीब आधा दर्जन मंत्रियों ने मुख्यमंत्री से सिफारिश की थी। इसकी वजह साफ है कि धनराजू प्रधानमंत्री स्किल डेवलपमेंट के नाम पर होने वाले गोरखधंधे पर नकेल कस रहे थे। नए सचिव तकनीकी शिक्षा मुकेश गुप्ता मंत्री यशोधरा राजे की पसंद बताए जाते हैं। इसी तरह सहकारिता मंत्री डा. अरविंद सिंह भदौरिया की नाराजगी के कारण आयुक्त सहकारी संस्थाएं एमके अग्रवाल को हटा दिया गया है। बताते हैं कि उनकी भी अपने विभागीय मंत्री से पटरी नहीं बैठ रही थी। जबकि अग्रवाल की आयुक्त सहकारिता के पद पर पदस्थापना सितंबर में ही की गई थी। उनकी जगह पर उज्जैन कमिश्नर रहे नरेश पाल को आयुक्त सहकारिता बनाया गया है। फेरबदल में मंडी बोर्ड व संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र से वरिष्ठ अधिकारियों को हटाकर कनिष्ठ अधिकारियों की पदस्थापना की गई है। सूत्रों की माने तो प्रतीक हजेला को विभागीय मंत्री रामकिशोर कावरे “सुर” नहीं मिलने की वजह से हटाया गया। जबकि हजेला को आयुक्त आयुष एवं प्रमुख सचिव के पद पर पदस्थ हुए 3 महीने भी नहीं हुए थे। 

2 साल से नहीं मिला आयुष को पूर्णकालिक आयुक्त
 वरिष्ठ महिला आईएएस शिखा दुबे के सेवानिवृत्ति के बाद से आज दिनांक तक आयुष विभाग का प्रमुख सचिव और आयुक्त एक ही नौकरशाह को पदस्थ किया जा रहा है। इसके चलते प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं हो रहा है। यानी आयुक्त के पद पर पदस्थ जो आईएएस सतपुड़ा भवन में बैठकर शासन के लिए प्रस्ताव बनाते हैं,  वही अक्सर वल्लभ भवन में बैठकर बतौर प्रमुख सचिव स्वयं के बनाए प्रस्ताव पर अपनी सहमति की मोहर भी लगाते हैं। इससे पारदर्शी प्रक्रिया नहीं हो पा रही है। इसके साथ ही प्रमुख सचिव मंत्री को नजरअंदाज कर मनमानी करने लगते हैं। वर्ष 2019 में जब शिखा दुबे अपर मुख्य सचिव आयुष के पद पर पदस्थ थी तब शासन ने संजीव झा को आयुक्त आयुष के पद पर पदस्थ किया गया था। इसके बाद से सचिव और प्रमुख सचिव को ही आयुक्त बनाया जा रहा है।

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