हमदर्दी के सहारे तोमर पड़ सकते हैं सब पर भारी

मुरैना जिले में भाजपा के दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर

भोपाल/अनिरुद्ध सोनोने/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश का मुरैना जिला वह जिला है , जहां पर इस समय सबलगढ़ को छोड़कर शेष सभी विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव की बयार बह रही है। जिले की दिमनी विस क्षेत्र वह है जहां पर सरकार के साथ ही भाजपा के दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा भी पूरी तरह से दांव पर लगी हुई है। यहां से शिवराज सरकार के किसान कल्याण और कृषि विकास राज्यमंत्री गिर्राज डंडौतिया भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरने जा रहे हैं। इस सीट पर अभी से कांग्रेस उम्मीदवार उम्मीदवार रवींद्र सिंह तोमर इन भाजपा दिग्गजों पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। इसकी वजह है उनका दो चुनावों में मामूली मतों से हारने की वजह से जनता में उनको लेकर पैदा हो रही सहानुभूति। यही वजह है कि फिलहाल माना जा रहा है कि तोमर इस सीट पर पूरी तरह से भाजपा के लगभग तय हो चुके उम्मीदवार डंडौतिया के अलावा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए कड़ी चुनौती बन गए हैं। यह वो क्षेत्र हैं जहां पर अभी से तीनों प्रमुख दलों में शामिल कांग्रेस , भाजपा व बसपा ने अभी से पूरी ताकत झोंकना शुरू कर दिया है। इस सीट से कांग्रेस प्रत्याशी बनाए गए रवींद्र सिंह तोमर कई दलों में रह चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2008 में बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था, तब वे करीब 150 मतों से चुनाव हार गए थे। इसके बाद वे भाजपा में होते कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस के टिकट पर 2013 में चुनावी मैदान में उतरे तो , लेकिन एक बार फिर किस्मत उनसे दगा कर गई। इस बार भी वे मामूली मतों से हार गए थे। कांग्रेस ने बीते चुनाव में उनकी जगह गिर्राज डंडौतिया को प्रत्याशी बनाया था , जो जीत हासिल करने में सफल रहे थे। डंडौतिया के भाजपा में शामिल होने की वजह से तोमर को फिर प्रत्याशी बनाया गया है। हालांकि पार्टी के ंअदर ही स्थानीय नेताओं द्वारा उनका बाहरी होने की वजह से विरोध किया जा रहा था , लेकिन अब माहौल धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है।

बसपा बदल सकती है रुख
फिलहाल इस क्षेत्र के लिए बसपा के उम्मीदवार का इंतजार किया जा रहा है। बीते चुनाव में बसपा उम्मीदवार की वजह से ही भाजपा प्रत्याशी का चुनावी गणित बिगड़ गया था। तब कांग्रेस के गिर्राज को 69,597 मत, जबकि भाजपा के शिव मंगल सिंह तोमर को 51,120 मत मिले थे। उस समय बसपा के छतर सिंह भले ही 14,456 मत पा सके थे , लेकिन उनकी बजह से ही शिव मंगल का माहौल बिगड़ा था। इस बार भी बसपा मजबूत तैयारी कर रही है। फिलहाल सभी की नजर उसके उम्मीदवार पर है। जातीय गणित के हिसाब से देखें तो भाजपा उम्मीदवार ब्राह्मण और कांग्रेस का क्षत्रिय वर्ग से आता है। इस वजह से एक बार फिर सीधी लड़ाई ब्राह्मण-क्षत्रीय के बीच रहना तय है। इलाके में अब पिछड़ी और अनुसूचित जातियों की भी निर्णायक भूमिका रहने की संभावना के चलते जातीय समीकरण साधने के प्रयास किए जा रहे हैं। यही वजह है कि भाजपा ने गिर्राज की जीत के लिए राज्य सहकारी विपणन संघ के पूर्व अध्यक्ष मेघ सिंह गुर्जर को प्रभारी बनाया है।

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