आज तय होगा रुख, कल फैसला, चाबी किसानों के हाथ

नई दिल्ली, बिच्छू डॉट कॉम। दिल्ली की सीमाओं पर तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ बीते 55 दिनों से जारी आंदोलन के बीच समाधान के आसार दिखे हैं। सरकार ने सहमति बनने तक कृषि कानूनों को स्थगित करने का प्रस्ताव दिया है। किसान नेताओं ने तय किया कि वे आज अन्य किसानों से बातचीत करने के बाद फैसला लेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बैठक में कहा कि हमें इस मुद्दे पर मिलकर कोई बीच का रास्ता निकालना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आखिर कब तक किसान इस आंदोलन के कारण सड़कों पर बैठे रहेंगे। इसके लिए हम सभी को मिलकर समाधान निकालना पड़ेगा। तोमर ने कहा कि हम तीनों कानूनों पर आपके (किसान नेताओं) साथ बिंदुवार चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार किसी भी कीमत पर कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार और किसान संगठनों के नेताओं की एक कमेटी बना देते हैं, जब तक बीच का रास्ता नहीं निकलेगा तब तक हम कानून को लागू नहीं करेंगे। सरकार ये एफिडेविट सुप्रीम कोर्ट में भी देने को तैयार है। 
किसान तय करेंगे आगे की रणनीति
संयुक्त किसान मोर्चा के डॉ. दर्शनपाल ने कहा कि बैठक सकारात्मक रही। इस दौरान कृषि कानूनों, एमएसपी सहित अन्य पहुलओं की भी चर्चा हुई है। गुरुवार की बैठक में सभी बिन्दुओं पर किसान संगठन विचार विमर्श करने के बाद ही अगला निर्णय लेंगे। 22 जनवरी को किसानों की बैठक के बाद किसान आंदोलन का रुख तय होगा। 
कृषि मंत्री बोले- कल समाधान की उम्मीद
नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, मुझे लगता है 22 तारीख को समाधान की संभावना है। हमने किसानों को प्रस्ताव इसलिए दिया है, क्योंकि आंदोलन खत्म हो और जो किसान कष्ट में हैं, वो अपने घर जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने जो कमेटी बनाई है, वो अपना काम कर रही है। किसानों और किसान आंदोलन से बनी स्थितियों के लिए सरकार की भी सीधी जिम्मेदारी है और इसी के तहत हम प्रक्रिया आगे बढ़ा रहे हैं। आंदोलन जब खत्म होगा और किसान अपने घर लौटेंगे, तब भारत के लोकतंत्र की जीत होगी।
एक्सपर्ट कमेटी की किसानों से पहली मीटिंग आज
कृषि कानूनों के मुद्दे पर समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बनाई गई कमेटी के 3 सदस्यों ने मंगलवार को दिल्ली में पहली बैठक की। इसमें आगे की प्रक्रिया, कब-कब मीटिंग करेंगे, कैसे सुझाव लेंगे और रिपोर्ट तैयार करने पर विचार किया गया। कमेटी के मुताबिक आज समिति किसान संगठनों के साथ बैठक करेगी। जो किसान नहीं आएंगे, उनसे मिलने भी जाएंगे। ऑनलाइन सुझाव लेने के लिए पोर्टल बनाया गया है। 15 मार्च तक किसानों के सुझाव लिए जाएंगे।
परेड की जारी है तैयारी
26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के बारे में डॉ. दर्शनपाल ने कहा कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत किया जाएगा। इसमें न केवल पूर्व सैनिक बल्कि खिलाड़ी सहित समाज के अन्य वर्गों के प्रबुद्ध लोग भी शामिल होंगे। सभी सीमाओं पर किसान आंदोलन के लिए की जा रही तैयारियों को भी झांकी के तौर पर शामिल किया जा सकता है। शिवकुमार कक्काजी ने कहा कि परेड का वार्ता से कोई ताल्लुक नहीं है। इस सिलसिले में दिल्ली पुलिस के साथ तीन बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन किसान आउटर रिंग रोड पर ही परेड की तैयारी में हैं।
कई राज्यों से राजधानी पहुंचे किसान
सुप्रीम कोर्ट और सरकार से कृषि कानूनों पर ठोस जवाब न मिलने के बाद किसानों ने गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर तिरंगा रैली निकालने की तैयारियां तेज कर दी हैं। यूपी, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और अन्य राज्यों से सैकड़ों ट्रैक्टरों के साथ किसान दिल्ली के सिंघु बॉर्डर, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंच चुके हैं। दिल्ली पुलिस किसानों को ट्रैक्टर रैली न निकालने के लिए मनाती रही लेकिन किसान नहीं माने। दरअसल, किसान आंदोलन को लगभग दो महीने होने को आए हैं। तीनों कृषि कानूनों के विरोध में लगातार ठंड में प्रदर्शन कर रहे किसानों का गुस्सा भी बढ़ता जा रहा है। किसान जमकर सरकार की आलोचना कर रहे हैं। बुधवार को जहां पुलिस किसानों को 26 जनवरी पर ट्रैक्टर मार्च न निकालने के लिए मनाने में जुटी रही, वहीं किसान भी इसे अपना अधिकार बताकर मार्च निकालने की जिद पर अड़े रहे। 
पूर्व सैनिकों ने निकाली परेड
टीकरी बर्डर पर बुधवार को पूर्व सैनिकों की ओर से परेड निकाली गई। यह 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर निकाली जाने वाली किसानों की परेड की झलकी मात्र थी। किसानों ने कहा कि 23 जनवरी को दिल्ली की सभी सीमाओं पर परेड का सेमीफाइनल देखने को मिलेगा और 26 जनवरी को पूरी ताकत और तैयारी के साथ फाइनल होगा।

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