मप्र के लिए आज का दिन उद्योग व रोजगार के लिए बना ऐतिहासिक

उद्योग व रोजगार

भोपाल/राजीव चतुर्वेदी/बिच्छू डॉट कॉम। उद्योग व रोजगार के लिए आज का दिन मप्र के लिए ऐतिहासिक बन गया है। इसकी वजह है आज गुरुवार को एक साथ 4864 करोड़ की लागत वाली 1898 औद्योगिक इकाईयों की आधारशिला रखा जाना।  इसकी वजह से प्रदेश में एक साथ करीब तीस हजार लोगों के लिए रोजगार के रास्ते खुल गए हैं। खास बात यह है कि इनकी
आधारशिला स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा वर्चुअल रुप से रखी गई है। प्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका है जब एक साथ इतनी बड़ी संख्या में एक साथ औद्योगिक इकाईयों की आधारशिला रखी गई है। यह कदम सरकार के उन प्रयासों का फल है जो उसके द्वारा मिशन अर्थ के तहत उद्योगों में निवेश के लिए बढ़ावा देने के लिए उठाए जा रहे हैं। इन दिनों प्रदेश में मप्र की शिव सरकार द्वारा आत्म निर्भर मप्र के तहत स्टार्ट योर बिजनेस इन 30 डेज पर बल दिया जा रहा है।  बीते साल कोरोना महामारी की वजह से प्रदेश में लॉकडाउन के दौरान सरकार के साथ ही आम आदमी की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई थी। इसकी वजह से न केवल उद्योग धंधे बंद हो गए थे , बल्कि लोगों को बड़ी संख्या में अपनी नौकरियों से भी हाथ धोना पड़ा था। कोरोना के हालात सुधरे तो सरकार ने पूरा फोकस रोजगार पर कर रखा है। इसके लिए उद्योग धंधों को पटरी पर लाने और प्रदेश में निवेश बढ़ाने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश सरकार के स्तर पर कई तरह के नियमों में बदलाव करते हुए उन्हें कई तरह की रियायतों का भी प्रावधान किया है। सरकार की मंशा अब उन तरह के उद्योगों को पूरी तरह से बढ़ावा देने पर है, जिसमें अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिल सके। इसका नतीजा आज सामने आ चुका है। यह बात अलग है कि आज जिन इकाईयों के लिए आधरशिला रखी गई है उनमें से अधिकांश स्टार्टअप श्रेणी के तहत लघु और मध्यम श्रेणी के हैं। खास बात यह है कि इससे कम से कम रोजगार की तलाश करने वाले युवा खुद के लिए तो रोजगार खड़ा कर ही रहे हैं साथ ही दूसरों को भी रोजगार देने वाले बन रहे हैं। इसके लिए सरकार स्तर से सस्ता कर्ज भी उपलब्ध कराया गया है।

हर यूनिट की औसतन लागत ढाई करोड़
 आज जिन उद्योगों की आाधरशिला रखी गई है उनकी संख्या 1898 है। इनकी लागत करीब 4864 करोड़ रुपए है। इस हिसाब से देखें तो हर इकाई की औसतन लागत करीब 2 करोड़ 56 लाख रुपए आती है। वैसे तो यह आंकड़ा निवेश के हिसाब से छोटा लगता है , लेकिन कोरोना काल  में यह बहुत बढ़ा आंकड़ा है। इसे सरकार के लिए मौजूदा समय के हिसाब से बहुत बड़ा माना जा रहा है।

हर यूनिट में मिलेगा औसतन डेढ़ दर्जन रोजगार
प्रांरभिक रुप से माना जा रहा है कि इन 1898 औद्योगिक इकाईयों में करीब तीस हजार लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इस हिसाब से देखें तो हर यूनिट में औसतन रुप से करीब डेढ़ दर्जन लोगों के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। दरअसल इन दिनों सरकार के सामने लोगों को रोजगार देने की बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके लिए प्रदेश में बीते छह माह से जिले से लेकर ब्लॉक स्तर तक रोजगार के मेलों का भी आयोजन किया जा रहा है, लेकिन उनमें सरकार को आशा के अनुरूप सफलता नहीं मिल सकी है। सरकार का लक्ष्य इन मेलों के माध्यम से हर माह करीब एक लाख रोजगार देने का लक्ष्य था, लेकिन अब तक इसमें सफलता नहीं मिल सकी है।

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