खजुराहो-लाइट एंड साउंड की जगह सन्नाटा, पर यह तो हर शहर की कहानी लगती है

खजुराहो, बिच्छू डॉट कॉम। उदास चेहरे और नाउम्मीद नजरें, परेशानी इतनी की बस आंख से आंसू ही नहीं निकले, लेकिन दिल जार-जार रो रहा हो जैसे, हर शख्स परेशान नजर आया और हर कोई ये दुआ कर रहा कि ऊपर वाला ये मुश्किल भरा वक्त गुजार दे। हम उस शहर के लोगों की बात कर रहे हैं जहां के दिन खुशनुमा थे और शाम लाइड एंड साउंड से सराबोर हुआ करते थे। एक ऐसा शहर जिसकी कला और मंदिरों ने पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। दुनियाभर के सैलानी यहां के मशहूर मंदिर देखने के लिए हजारों की तादाद में आते थे लेकिन अब सन्नाटा पसरा है। विश्व धरोहर पर्यटन नगरी खजुराहो, जो किसी भी पहचान का मोहताज नहीं रहा है। लेकिन अब लोग यहां भुखमरी की कगार पर हैं। निराशा, नाउम्मीद और आगे अंधकारमय भविष्य। मध्यप्रदेश का छतरपुर जिला, जहां खजुराहो आता है। इस इलाके की पहचान ही खजुराहो है। बात सिफि जिले या प्रदेश की नहीं, बल्कि दुनिया के किसी भी कोने में आप खजुराहो का नाम लेते हैं, तो लोग फटाक से पहचान जाते हैं। यहां के मंदिर, यहां की मूर्तियां और कलाकृति अनोखी हैं। विश्व में अपनी अलग पहचान रखने वाले शहर के लोग आज दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज हो रहे है। जो एक्ट ऑफ गॉड है, वो इनकी जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। विदेशी सैलानियों का आना यहां जनवरी-फरवरी से ही कम हो गया था और मार्च से जो टोटल लॉक डाउन हुआ उससे तो यहां के लोगों की जिंदगी और खुशियां ही लॉक हो गईं। दुनिया के नक्शे पर भले खजुराहो चमकता हुआ सितारा हो लेकिन यहां के बाशिंदे अंधेरे की तरफ चले जा रहे है। लेकिन यहां की सड़कों पर सन्नाटा है, ज्यादातर दुकानों पर ताले लटके हैं। अलग-अलग चरणों में खुलने वाला लॉक डाउन यहां की जिंदगी में मुस्कुराहट नहीं ला पाया है क्योंकि यहां की 90 प्रतिशत से अधिक आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पर्यटन से जुड़ी हुई है। जो सड़कें टूरिस्ट गाडिय़ों से भरी रहती थी वहां दो चार लोग खड़े नजऱ आए.।

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