सरकार ने माना कि बगैर निर्माण के किया गया करोड़ों का भुगतान

The government admitted that the payment of crores was done without construction

भोपाल/राजीव चतुर्वेदी/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश का उद्यानिकी विभाग ऐसा सरकारी महकमा बन चुका है, जिसमें हर स्तर पर घपला -घोटाला किया जाता है। अब तो सरकार भी इस बात को स्वीकार कर चुकी है कि विभाग में संचालनालय स्तर के अफसरों ने मिलकर ठेकेदारों से मिलीभगत कर उन्हें बगैर निर्माण कार्य के ही करोड़ों रुपए का भुगतान कर दिया गया  है। इसमें मुख्यालय से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों की मिली भगत सामने आई है। जांच में यह सभी दोषी भी पाए गए हैं। इनमें आयुक्त सह संचालक उद्यानिकी भी शामिल हैं। इसके चलते ही छह प्रभारी सहायक संचालक उद्यान निलंबित किए जा चुके हैं। यह जानकारी उद्यानिकी राज्य मंत्री भरत सिंह कुशवाह ने विधायक सज्जन वर्मा ने विधानसभा के जरिये पूछे गए सवाल के उत्तर में  दी है। दरअसल वर्मा ने पूछा था कि वर्ष 2018 से 2020 की अवधि में कोल्ड स्टोरेज के लिए अनुदान देने में करीब 70 से 80 करोड़ रुपए की आर्थिक अनियमितता विभाग के अधिकारियों द्वारा की गई है, जिसमें बिना निर्माण के ही करोड़ों रुपए की सब्सिडी जारी कर दी गई जबकि मौके पर काम नहीं हुआ है। इतना ही नहीं इसके लिए पूर्व संचालकों ने निर्धारित दिशा-निर्देशों को बदलकर विभाग के अधिकारियों ने भुगतान आदेश जारी किए हैं। उन्होंने प्रश्न में पूछा कि इस मामले में किस अधिकारी के विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई है। इसके जवाब में विभागीय मंत्री कुशवाह ने बताया कि एकीकृत बागवानी विकास मिशन के दिशा-निर्देशों का पालन न करने की जानकारी मिलने के बाद कराई गई जांच में  गड़बड़ी मिली है। जांच में तत्कालीन आयुक्त सह संचालक उद्यानिकी एम. कालीदुरई को दोषी पाया गया है।
पन्ना के प्रभारी सहायक संचालक की 16 शिकायतें: विधायक राकेश मावई ने पन्ना के प्रभारी सहायक संचालक उद्यान महेश प्रताप बुन्देला के वित्तीय एवं अन्य भ्रष्टाचार से संबंधित जांच और कार्यवाही के लिए तीन माह में लिखे गए पत्रों के बारे में जानकारी मांगते हुए पूछा कि उनके खिलाफ बीते 5 वर्ष में क्षेत्रीय आमजनों व अन्य जन प्रतिनिधियों से कितनी शिकायतें विभाग तथा शासन को मिली हैं। उत्तर में विभागीय मंत्री ने जांच में अनियमितता की बात मानते हुए कहा कि आयुक्त सह संचालक उद्यानिकी के एक फरवरी 21 के पत्र द्वारा शिकायतों की जांच के लिए कलेक्टर को लिखा गया। उनके खिलाफ इस अवधि में कुल 16 शिकायतें मिली हैं।  

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