उमा-ज्योति के बयानात से सकते में हैं मठाधीश

The abbot may be able to do Uma-Jyoti's earnest

मध्यप्रदेश की राजनीति में बदलते समीकरण

भोपाल/राजीव चतुर्वेदी/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों के लिए प्रचार अपने चरम पर है। चुनावी समर के अंतिम चरण में सक्रिय हुई पूर्व मुख्यमंत्री साध्वी उमा भारती की चार बातें और श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया के एक बयान से भाजपा के पांच बड़े क्षत्रप सकते में है। साध्वी उमा ने कल सुरखी की सभा में बयान दिया था कि –
(बयान – एक) मुझे अब भाजपा की प्रचंड राजनीति करना है।

(बयान – दो) मैं, 2024 का चुनाव लडूंगी।
(बयान तीन) सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के सबसे बड़े सिपहसालार और चहेते गोविंद सिंह राजपूत के बारे में यह कहना कि गोविन्द सिंह मेरे बुरे दिनों के साथी हैं। उन्होंने कहा कि जब मैंने भाजपा छोड़ी और राम रोटी यात्रा निकाली तब गोविन्द सिंह ने मेरा साथ दिया और यात्रा की सारी व्यवस्थाओं में सहयोग किया। उन्होंने सुरखी विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी गोविन्द सिंह राजपूत को अपना वनवास के दिनों का साथी बताया।
(चौथा- बयान) कि यूपी में भी मेरे ही नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया, लेकिन मैंने मुख्यमंत्री बनने से मना कर दिया।
श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया का वह बयान जिसमें वे चुनावी सभाओं में यह कहते हैं कि ‘ना भाजपा ना कांग्रेस’ यह सिर्फ सिंधिया घराने की लाज रखने का चुनाव है। दरअसल, भाजपा की फायर ब्रांड नेता और प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री साध्वी उमा भारती के चार बयान और श्रीमंत सिंधिया के एक बयान से राजनीतिक और वैज्ञानिक अलग-अलग मायने लगा रहे हैं। चर्चा ये भी है कि क्या अब प्रदेश में साध्वी-श्रीमंत एक्सप्रेस काम करेगी। बता दें, कि साध्वी उमा भारती लोधी समाज की सबसे बड़ी नेता है। इस वर्ग की प्रदेश में अच्छी खासी संख्या है। राष्ट्रीय राजनीति में कल्याण सिंह के बाद वे काफी सक्रिय नेता रही हैं। इस दौरान राष्ट्रीय राजनीति में कल्याण सिंह और उमा भारती की पहचान रही है।

राजमाता से संपर्क और राष्ट्रीय राजनीति
बता दें, कि उमा भारती का राजनीतिक कार्यकाल ग्वालियर की राजमाता विजयराजे सिंधिया के सानिध्य में शुरू हुआ, यह बात किसी से छिपी नहीं है। वे वर्ष 1989 में खजुराहो सीट से लोकसभा के लिए चुनी गई। उन्होंने 1999 में प्रदेश की राजधानी भोपाल से चुनाव जीता और अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व वाली सरकार में मानव संसाधन विकास, पर्यटन, कोयला, युवा कल्याण और खेलकूद मंत्रालय संभाले। उमाश्री भारती ने राम जन्मभूमि आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई थी। उनका दिया हुआ नारा ‘रामलला आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे’ काफी प्रचलित हुआ था। उनके धार्मिक परिपेक्ष में उनकी आस्था से सभी परिचित हैं। सन 2003 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को विजय दिलवाने के बाद वे मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री चुनीं गई। हालांकि उनका कार्यकाल सिर्फ एक वर्ष का ही रहा, क्योंकि 1994 के हुबली दंगों के लिए उन्हें गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया। इसके चलते उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने झांसी संसदीय क्षेत्र से विजय प्राप्त की और एक बार फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुई। मोदी सरकार में उन्हें जल संसाधन नदी विकास और गंगा सफाई मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

सागर से लड़ सकती हैं चुनाव
राजनीतिक और मीडिया जगत में चर्चा है कि उमा भारती बुंदेलखंड की सागर सीट से चुनाव लड़ सकती हैं। वह इसलिए कि उमा भारती बुंदेलखंड क्षेत्र का बड़ा चेहरा हैं। वे जिस समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं यहां उस वर्ग की संख्या अच्छी-खासी है। उमा की लोधी समाज में स्वीकार्यता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि हाल ही में कांग्रेस के इसी वर्ग दो विधायकों को उन्होंने भाजपा में शामिल करा दिया है। उन्होंने ऐसे समय में भाजपा को मजबूत करने का काम किया है जब भाजपा को संख्या बल की वाकई जरूरत है। इनमें बड़ा मलहरा से प्रद्युम्न लोधी और दमोह के राहुल लोधी ने कांग्रेस से त्यागपत्र देकर भाजपा ज्वाइन कर ली है। वहीं सागर की ही सुरखी सीट पर प्रचार के दौरान गोविन्द राजपूत की प्रशंसा करना इस बात के संकेत हो सकते हैं कि साध्वी सागर से चुनाव लड़कर प्रचंड राजनीति करने का हौंसला रखती हैं।
जनता समझ गई कि इनसे अच्छे तो भाजपा वाले हैं
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मंगलवार को भांडेर, ग्वालियर के साथ ही दिमनी विधानसभा क्षेत्र में चुनाव सभाओं को संबोधित किया। दिमनी की सभा में उन्होंने कहा कि कांग्रेस खुद का घर संभाल नहीं पाई। जिस नौजवान सिंधिया की वजह से आपने सरकार बनाई उसका सम्मान रखना चाहिए था। वह यही कह रहे थे कि आपने जो वादे किए उनको पूरा करो, और आपने उनका अपमान किया। उमाश्री ने इस दौरान श्रीमान बंटाधार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति 17 साल पहले बंटाधार सिंह बनके प्रदेश का बंटाधार कर चुके आपने उनकी बात मानी। कांग्रेस के विधायकों ने ही कांग्रेस की सरकार गिराई। हालांकि 2018 में हमें थोड़ा सा झटका जरूर लगा, वह जरूरी था। बाद में हमें समझ आया कि जनता ही भगवान होती है, हम भगवान नहीं हैं। साथ ही इससे जनता में भी यह समझ गई कि इनसे अच्छे तो भाजपा वाले ही हैं। बता दें कि उमा भारती की सभाओं में काफी भीड़ जुट रही। वे रायसेन जिले की सांची, सागर की सुरखी और टीकमगढ़ की बड़ा मलहरा सीट पर भी सभाएं कर चुकीं हैं।

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