तो अब क्या शिव की काऊ पॉलिटिक्स पर खर्च होंगे 400 करोड़!

So now what will be the 400 million spent on Shiva's cow politics!

भोपाल/राजीव चतुर्वेदी/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में सबसे बड़ा गौ सेवक बनने और गौशालाओं का निर्माण कराने को लेकर राजनीति पिछले करीब दो वर्षों से चर्चा में रही है। प्रदेश में पहले जब कांग्रेस की सरकार थी तब मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश भर में एक हजार गौशालाओं के निर्माण का फैसला लिया और निर्माण कार्य शुरू किया। 500 गौशालाएं बन भी गईं लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते काम में शिथिलता आ गई। लेकिन बाद में भाजपा सरकार के दौरान मार्च से जून के बीच में भी कोरोना काल में ही करीब दो सौ गौशालाओं का निर्माण हुआ। वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस की एक हजार के स्थान पर दो हजार गौशालाओं के निर्माण का फैसला लिया और कहा कि अब प्रदेश में गाय आर्थिक स्वावलंबन का आधार बनेगी। इसके लिए उन्होंने गौ-धन संरक्षण और संवर्धन के लिए अलग मंत्रालय की भी घोषणा कर दी। बता दें, कि प्रदेश में जो गौशालाओं का निर्माण किया गया है उसमें प्रत्येक गौशाला की लागत 30 लाख रुपए है। इसके लिए अलग-अलग स्रोतों से राशि का इंतजाम किया गया है। इसमें सबसे अधिक मनरेगा के बजट से 297 करोड रुपए का इंतजाम किया गया। इसके अलावा मंडी बोर्ड, राज्य गौ संवर्धन बोर्ड से भी राशि का इंतजाम किया गया। गौशाला बनाने का काम ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किया गया। अब चूंकि इतनी बड़ी संख्या में गौशालाओं का निर्माण किया जाना है। ऐसे में शिवराज सरकार इसके लिए तकरीबन 400 करोड़ की राशि इस मद में खर्च करेगी।

अन्य विभाग भी निभा रहे जिम्मेदारी
गौशाला बनाने के लिए चार से अधिक विभागों ने भागीदारी निभाई है। गौशाला में बिजली और पानी की भी व्यवस्था होना चाहिए। इसके लिए कृषि विभाग आगे आया है। विभाग ने गौशाला में बिजली पानी के इंतजाम के लिए 24 करोड़ 97 लाख रुपए जारी किए हैं। वही गौशाला में गोवंश पशुओं को रखने के लिए चारे, भूसे का इंतजाम भी जरूरी है। इस काम के लिए पशुपालन विभाग सामने आया है और विभाग ने इस काम के लिए 130 करोड़ रुपए की व्यवस्था की है। गौशाला केवल राज्य सरकार के बजट पर ही आश्रित नहीं रहेंगी। इनको आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी तैयारी की गई है। इसके तहत प्रत्येक गौशाला को ऐसे उपकरण दिए जा रहे हैं जो कि ना सिर्फ गोबर से को कास्ट बनाएंगे बल्कि गमले आदि का भी निर्माण करेंगे। इस उपकरण की लागत 75 हजार रुपए है, जिसे प्रत्येक गौशाला को दिया जा रहा है। चूंकि गौशाला का संचालन राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी। इसे अनुदान प्राप्त संस्था को नहीं दिया जाएगा। इसलिए पहले ही राशि का इंतजाम कर लिया गया है, जिससे कि गौशाला के संचालन में किसी तरह की परेशानी नहीं हो।
गौ-संरक्षण और संवर्धन कार्य से आर्थिक स्वावलम्बन : गौ-धन संरक्षण और संवर्धन के लिए गठित मंत्रिपरिषद समिति की वर्चुअल बैठक में मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि गौ-वंश के प्रति हमारी आस्था और श्रद्धा है। प्राचीनकाल में गाय और बैल ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आधार थे। वर्तमान में भी गौ-संरक्षण और संवर्धन के कार्य आर्थिक स्वावलम्बन का आधार बन सकते हैं। आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाने के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध है। इस दिशा में गौ-माता अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी। गाय का दूध अमृत है। कुपोषण को दूर करने में गाय के दूध का भरपूर उपयोग हो सकता है। गाय का गोबर कृषि के लिये संजीवनी है। इसका उपयोग खाद बनाने में कर रासायनिक खाद के उपयोग को कम किया जा सकता है। गोबर से बड़े स्तर पर गौ-काष्ठ का निर्माण और उपयोग कर लकड़ी के प्रयोग को कम किया जा सकता है। जंगलों को बचाया जा सकता है। गौ-मूत्र से कीटनाशक और औषधियों बनती है।

गौ-मूत्र, गोबर, दूध का पूर्ण उपयोग
राज्य सरकार गौ-संरक्षण और संवर्धन के साथ दूध, गोबर और गौ-मूत्र का उपयोग पूरी गम्भीरता के साथ मानव कल्याण के लिए करेगी। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि गौ-संरक्षण, संवर्धन के लिए पशुपालन विभाग, कृषि, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, गृह, वन और राजस्व विभागों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। उन्होंने कहा गौ-संरक्षण एवं संवर्धन में मध्यप्रदेश देश में मिसाल कायम करे ऐसे प्रयास होंगे। गौ-संरक्षण एवं संवर्धन के लिये गठित मंत्रिपरिषद समिति की बैठक में महत्वपूर्ण निणय लिये गये हैं।

गौ-शालाओं का बेहतर संचालन
मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना अंतर्गत स्वीकृत गौ-शालाओं का संचालन शासन द्वारा सक्षम और इच्छुक समाजसेवी संस्थाओं तथा स्व-सहायता समूह के सहयोग से किया जाएगा। गौ-शालाओं के संचालन में जनसहयोग लिया जाएगा। गौ-शालाओं के संचालन और गौ-संरक्षण एवं संवर्धन के लिये आवश्यक होने पर वित्तीय संसाधन जुटाने के लिये उपकर लगाया जा सकता है। इस उपकर को लगाने में यह विशेष रूप से ध्यान रखा जाएगा कि आमजन पर आर्थिक भार नहीं बढ़े। गोबर गैस प्लान्ट स्थापित करने की भारत सरकार की योजना के अंतर्गत ग्रामों में गोबर गैस प्लान्ट स्थापित किये जा सकेंगे। ग्रामीण परिवारों को गोबर गैस प्लान्ट से कनेक्शन दिये जा सकेंगे। आगर-मालवा जिला स्थित गौ-अभ्यारण्य सालरिया में कृषि विज्ञान केन्द्र की तर्ज पर पशु चिकित्सा एवं पशु पालन विज्ञान केन्द्र की स्थापना नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर के माध्यम से की जाएगी।

Related Articles