भाजपा के लिए मुसीबत बनी छह सीटें

Six seats became a problem for BJP

संघ से मदद की दरकार

भोपाल/प्रणव बजाज//बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित होते ही अचानक भाजपा संगठन में मंथन के लिए चले बैठकों के दौर में छह सीटों पर पार्टी की सिथति खराब होने की बात सामने आयी है। अब इन कमजोर सीटों पर स्थिति में सुधार के लिए संघ की मदद लिए जाने का तय किया गया है। यह वे सीटें हैं , जहां पर पार्टी से बगाबत कर कांग्रेस के बैनर तले पूर्व भाजपाई चुनौती दे रहे हैं। खास बात यह है कि इन सीटों पर भाजपा कार्यकर्ता भी फिलहाल बागियों के साथ खड़े दिख रहे हैं। यही वजह है कि पार्टी अब इन सीटों पर खास फोकस करने की रणनीति बना रही है। इसके तहहत इन सीटों पर दिग्गज नेताओं को चुनाव की कमान देने की तैयारी की जा रही है। इसी तरह से पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए तय किया गया कि इन क्षेत्रों में संघ के सहयोग से सामाजिक बैठकें की जाएं।

राष्ट्रीय पदाधिकारियों से मांगा समय
बीते रोज भाजपा प्रदेश कार्यालय में हुई बैठकों के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा और श्रीमंत ने नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों कैलाश विजयवर्गीय, ओमप्रकाश धुर्वे, लाल सिंह आर्य और सुधीर गुप्ता से अलग से चर्चा कर उनसे चुनाव होने तक प्रदेश में पूरा समय देने का आग्रह किया है। इस दौरान सीएम ने कहा कि हम राष्ट्रीय नेतृत्व से बात करेंगे। इसी तरह से अजजा वोटों को भाजपा से जोड़ने के लिए ओमप्रकाश धुर्वे करैरा, दिमनी, अंबाह, मुरार आदि क्षेत्रों का दौरा भी करेगें।

महेंद्र बौद्ध पर भी चर्चा
सूत्रों की मानें तो बीते रोज भाजपा के रणनीतिकारों ने हाल ही में कांग्रेस छोड़ बसपा में शामिल होने वाले महेंद्र बौद्ध को भाजपा में लाने पर चर्चा की गई। उनका मानना है कि अगर बौद्ध भाजपा में आते हैं तो भांडेर में भाजपा की जीत की राह आसान हो जाएगी। कहा जा रहा है कि उनके नाम पर श्रीमंत के सहमत नहीं होने की वजह से मामला टाल दिया गया है।

सूबेदार, पंवार और ऊंटवाल पर सहमति
बताया जा रहा है कि पार्टी को जिन तीन सीटों के नाम तय करना है , उन पर चर्चा के बाद सहमति बन चुकी है। इनमें जौरा से पूर्व विधायक सूबेदार सिंह राजौधा, ब्यावरा में नारायण सिंह पंवार और आगर में बंटी ऊंटवाल के नाम शामिल हैं। माना जा रहा है कि कहा जा रहा है कि एक दो दिन में प्रत्याशियों की सूची लेकर सीएम और प्रदेश अध्यक्ष दिल्ली जाएंगे। उसकेबाद नामों की घोषणा कर दी जाएगी।

2018 का फामूर्ला अपनाएंगे कमलनाथ
भोपाल, बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में होने वाले उपचुनाव को लेकर कमलनाथ एक बार फिर 2018 का फामूर्ला अपनाने की तैयारी में है। 2018 के चुनाव में कांग्रेस के घोषणा पत्र की जगह वचन पत्र जारी किया था और प्रदेश की सत्ता हासिल की थी। प्रदेश कांग्रेस अब मिनी वचन पत्र के सहारे 28 सीटों को जीतने की कोशिश में जुटी है। कांग्रेस पार्टी ने 28 मिनी वचन पत्र तैयार कर स्थानीय मुद्दों के जरिए लोगों को लुभाने की कोशिश की है। चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद अब जीत के लिए रणनीति अपनाने की कवायद की जा रही है। कांग्रेस पार्टी उपचुनाव में वचन गान के जरिए लोगों को लुभाने की कोशिश करेगी। कांग्रेस ने विधानसभा वार वचन पत्र का तैयार किया है, जिसमें कृषि और किसान, सिंचाई, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेलकूद, पेयजल, सड़क पुल, उद्योग, रोजगार, पर्यटन, संस्कृति, प्रशासनिक से लेकर नए वचन का सारांश भी पेश किया जा रहा है। कुल मिलाकर कांग्रेस ने उपचुनाव के लिए अपने वादों का पिटारा खोल दिया है।

मिनी वचन पत्र के बिंदु
कमलनाथ ने घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को सौ यूनिट ?100 बिल देने का वादा किया है। कर्मचारियों के बकाया डीए और वेतन वृद्धि जारी करने से लेकर अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण की बात भी कही गई है। गौशालाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की तर्ज पर गौ धन सेवा योजना शुरू करने और गौ सेवकों की सेवाएं लेने का भी वादा किया है। कोरोना संक्रमण को राजकीय आपदा घोषित करने का भी ऐलान कांग्रेस ने किया है। कांग्रेस ने वचन पत्र में पिछली कांग्रेस सरकार के हुए फैसलों के साथी बीजेपी पर निशाना साधने के काम किया है। कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में कांग्रेस के सवा साल जनता खुशहाल का स्लोगन दिया है। साथ ही कांग्रेस पार्टी इस बात का दावा करती हुई नजर आ रही है कि आपके सपने होंगे साकार फिर बनेगी कमलनाथ सरकार।

2018 में साबित हुआ था मास्टर स्ट्रोक
दरअसल 2018 के चुनाव में कांग्रेस का वचन पत्र मास्टर स्ट्रोक साबित हुआ था और यही कारण है उसी फामूर्ले को अपनाते हुए कांग्रेस मिनी वचन पत्र के सहारे बीजेपी को टक्कर देने की तैयारी में है। स्थानीय स्तर पर तैयार मिनी वचन पत्र कांग्रेस के लिए कितना कारगर साबित होता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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