संघ का नया एजेंडा गौ हत्या प्रतिबंध और गंगा सफाई

8 अगस्त को भोपाल पहुंचेंगे संघ प्रमुख भागवत

भोपाल, (हृदेश धारवार/बिच्छू डॉट कॉम)। धारा 370, तीन तलाक, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन के बाद अब संघ ने अपने नए एजेंडे पर काम करना शुरू कर दिया है। जिसको लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत अपने तीन दिवसीय दौरे पर भोपाल आ रहे हैं। मोहन भागवत 8 अगस्त को भोपाल पहुंचेंगे यहां 3 दिन तक लगातार मैराथन बैठक करेंगे। जिसमें संघ के सभी अनुषांगिक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे। बैठक के पहले दिन मोहन भागवत भारतीय मजदूर संघ कार्यालय दत्तोपंत ठेंगड़ी भवन पहुंचेंगे । जहां वे संघ के पदाधिकारियों से चर्चा करेंगे। सूत्रों की माने तो अब आरएसएस ने गौ हत्या पर प्रतिबंध और गंगा सफाई अभियान को अपनी प्राथमिक सूची में रखा है। संघ चाहता है कि भारत में गौ हत्या पर पूर्णता प्रतिबंध लगाया जाए और इसके लिए अलग से एक कानून बनाया जाए। इसको लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत संघ पदाधिकारियों से चर्चा कर सकते हैं। इसके अलावा दूसरा महत्वपूर्ण विषयगंगा सफाई का है। 2014 में केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद गंगा स्वच्छता मंत्रालय बनाया गया था औऱ बीजेपी की फायरब्रांड नेता उमा भारती को इस विभाग का मंत्री बनाया गया था । लेकिन उमा भारती गंगा सफाई के क्षेत्र में कुछ खास काम नहीं कर सकी। जिसकी वजह से संघ का एजेंडा अभी तक अधूरा है। संघ प्रमुख मोहन भागवत अलग-अलग मंचों पर गौ हत्या और गंगा सफाई के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते रहे हैं।

…भागवत के दौरे से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
संघ प्रमुख मोहन भागवत के भोपाल दौरे से प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ गई है।भागवत के इस दौरे को प्रदेश के सियासी हालात से जोड़कर भी देखा जा रहा है। बता दें कि मध्यप्रदेश की 27 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। उपचुनाव वाली सभी सीटों पर संघ के अनुषांगिक संगठनों के प्रतिनिधि मोर्चा संभाले हुए है। भागवत अपनी बैठक में उपचुनाव को लेकर भी चर्चा कर सकते हैं।

एजेंडे में शामिल है समान नागरिक संहिता
संघ का तीसरा सबसे बड़ा एजेंडा देश मे समान नागरिकता संहिता कानून लागू करना। संघ ने इस पर पर भी अपना काम शुरू कर दिया है। यह कानून मुस्लिम पर्सनल लॉ, हिंदू पर्सनल लॉ जैसे धर्म-आधारित कानूनों की जगह लेगा। यह मुख्य रूप से शादी, पैतृक संपत्ति, तलाक और अन्य धार्मिक परंपराओं से जुड़ा है। भारत में यूनीफॉर्म क्रिमिनल कोड है जो अपराध करने पर धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता, लेकिन तलाक और पैतृक संपत्ति के मामले में कानूनों में एकरूपता नहीं है। बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में यूनीफॉर्म क्रिमिनल कोड की तरह कॉमन सिविल कोड लाने का वादा किया है।

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