सरकार के प्रयासों से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था

शिवराज सिंह चौहान

भोपाल/प्रणव बजाज/बिच्छू डॉट कॉम। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पिछले साल चौथी बार जब प्रदेश की सत्ता संभाली तो कोरोना महामारी से निपटने की बड़ी चुनौती उनके सामने थी। वहीं मजदूरों को रोजगार और किसानों की समस्याएं भी कम नहीं थी। ऐसे में शिवराज ने दूरदर्शिता दिखाई और प्रदेश के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के जो प्रयास शुरू किए उसके परिणाम अब सामने आना शुरू हो गए हैं। दरअसल सरकार ने कोरोना की लड़ाई लड़ते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था खासतौर पर कृषि उत्पादक संगठन की मजबूती पर अपना विशेष जोर दिया। उनके उत्पादों को उचित प्लेटफॉर्म मिले साथ ही उन्हें उत्पाद के बाजिव दाम मिल सकें इसके लिए केंद्र की योजना के तहत लक्ष्य निर्धारित कर काम किया गया। यही वजह है कि प्रदेश में केंद्र सरकार की किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) गठन और संवर्धन योजना किसानों खासकर छोटे जोत के किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है। इस योजना के तहत ना सिर्फ खेती-किसानी को बढ़ावा मिल रहा है बल्कि यह किसान परिवारों को सामाजिक और आर्थिक रूप से भी मजबूत कर रहा है। ये किसान संगठन खेती-किसानी को तो आगे बढ़ाएंगे ही, व्यावसायिक रूप के साथ-साथ देश में सामाजिक रूप से भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे। विशेष कृषि उपज (स्पेसिफिक) एफपीओ बनने से किसानों को और भी अधिक लाभ होगा। छोटे किसानों के लिए छोटी जोत एक बड़ी समस्या है, लेकिन एफपीओ बनने से किसान समूहों के रूप में संगठित हो रहे हैं। यह संगठन शक्ति कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाएंगी।
किसान उत्पादक संगठन ऐसे कर रहे तरक्की
प्रदेश भर में किसान संगठन इस योजना से लाभ अर्जित कर रहे हैं। सागर जिले की देवर्शी किसान दूध उत्पादक कंपनी से ढाई हजार से अधिक का सशक्त बना रही है। इसका टर्नओवर आठ करोड़ से ज्यादा है। गुना की नेसकला कंपनी से दो हजार किसान जुड़े हैं। यह कंपनी सोयाबीन धनिया और गेहूं के बीजों का उत्पादन करती है। इस संस्था का टर्नओवर पौने तीन करोड़ रुपए है। इसी तरह  बैतूल की एपीओ सतपुड़ा महिला सिल्क का उत्पादक कंपनी किसानों के हित में काम कर रही है। इसका टर्नओवर भी तीन करोड़ से अधिक है। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश की यह पहली सिल्क उत्पादन कंपनी है। वहीं नरसिंहपुर के किसानों की कंपनी टर्नओवर पांच करोड़ रुपए से अधिक है। राजगढ़ की महिला मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी सफलतापूर्वक काम कर रही है। इसका एक साल में 26 करोड़ का टर्नओवर हो चुका है। इसी तरह आगर जिले का एफपीओ समर्थ किसान प्रोड्यूसर भी साढ़े पांच करोड़ के टर्नओवर के साथ काम कर रही हैं।
किसान को उपज के अच्छे दाम मिलेंगे, बिचौलियों से बचेंगे
सरकार ने जो दावा किया गया था वह भी किसानों द्वारा साकार होता दिख रहा है। सरकार का कहना है कि एफपीओ सिस्टम में किसान को उसके उत्पाद के भाव अच्छे मिलते हैं, क्योंकि सिर्फ एक किसान नहीं बल्कि किसानों के एक बड़े समूह के पास मोलभाव की ताकत होती है। वहीं अगर अकेला किसान अपनी पैदावार बेचने जाता है, तो उसका मुनाफा बिचौलियों को मिलता है। दरअसल यह एफपीओ छोटे व मंझोले किसानों का एक समूह होता है। इससे जुड़े किसानों को न सिर्फ अपनी उपज का बाजार मिलता है, बल्कि खाद, बीज, दवाइयों और कृषि उपकरण आदि भी खरीदना आसान हो जाता है। इससे सेवाएं सस्ती हो जाती हैं और बिचौलियों के मकड़जाल से भी किसानों को मुक्ति मिलती है।
क्या है एफपीओ, कैसे होता है लाभ
केंद्र सरकार ने पिछले साल फरवरी में यूपी के बुंदेलखंड क्षेत्र में पड़ने वाले चित्रकूट जिले से इस योजना को खेती-किसानी के विकास के साथ-साथ छोटे किसानों की आय बढ़ाने के हिसाब से शुरू किया था। अब आगे इस योजना के तहत वर्ष 23-24 तक देशभर में दस हजार नए कृषि उत्पादक संगठन (एफपीओ) स्थापित करने का लक्ष्य है। इस दौरान पहले सत्र 2020-21 के दौरान 2200 से अधिक एफपीओ का आवंटन किया गया। एफपीओ एक ऐसी व्यवस्था है जो किसानों से अनाज, फल, सब्जी, फूल, मछली व बागवानी से संबंधित फसलों को खरीदकर सीधे कंपनियों को बेचा जाता है। इसमें किसान जुड़े होते हैं। इन एफपीओ से अब तक देश के लाखों किसान जुडकर लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

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