चावल घोटाले को रफा-दफा करने की तैयारी

Preparations to crack the rice scam

भोपाल (राकेश व्यास/बिच्छू डॉट कॉम)। प्रदेश के चर्चित चावल घोटाले को अब रफा-दफा करने की तैयारी की जा रही है। नेताओं तथा नौकरशाहों के गठजोड़ से इस घोटाले में अब तक किसी भी रसूखदार के खिलाफ कार्यवाही नहीं की गई है। बता दें कि पशुओं को खिलाए जाने वाले चावल की भारतीय खाद्य निगम की जांच में 16 नमूने और अमानक पाए गए, उसके बाद भी अन्य रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री के निर्देश पर ईओडब्ल्यू की जबलपुर इकाई ने इस मामले में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की थी, लेकिन अब तक किसी प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही तो क्या एफआईआर तक नहीं की गई है। ईओडब्ल्यू सूत्रों का कहना है कि भारतीय खाद्य निगम की कुछ और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद जिन जिलों में गड़बड़ी हुई है वहां कार्यवाही की जाएगी। हालांकि इस मामले में बड़ा सवाल ये भी है कि जब चावल घोटाला प्रदेश के कई जिलों में फैला है तो जांच सिर्फ ईओडब्ल्यू जबलपुर को ही सौंपी गई है। उधर भोपाल में भी 1315 मीट्रिक टन खराब चावल के भंडारण का पता चला है। फिलहाल एक हफ्ते बाद भी इस पूरे मामले में अब तक आर्थिक अपराध ब्यूरो ने कोई कार्रवई नहीं की है, जिससे उसकी भूमिका पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। दरअसल इस पूरे मामले में नियम और अनुबंध का हवाला देकर मिलर और जिम्मेदार अफसरों को बचाने का खेल शुरू कर दिया गया है। यही वजह है कि अब सरकार के स्तर पर खराब चावल की जगह अच्छा चावल सप्लाई करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। तमाम शिकायतों के बाद भी प्रदेश सरकार और उसके अफसर इस मामले को दबाए हुए थे, लेकिन केन्द्र से हुई शिकायत के बाद जब केन्द्र सरकार द्वारा आदिवासी बाहुल्य बालाघाट और मंडला जिले मेंं इसकी जांच कराई गई तो मप्र सरकार को भी इस मामले में आगे आना पड़ा है। सरकार ने आनन-फानन में मामले की जांच आर्थिक अपराध ब्यूरो को सौंप कर इतिश्री कर ली है। इस मामले में खास बात जो सामने आ रही है उसमें आरोपियों को बचाने के लिए कस्टम मिलिंग नीति का सहारा लिया जा रहा है। इस नीति के प्रावधान के तहत खराब गुणवत्ता वाले चावल के बदले में अच्छा चावल लेने का प्रावधान है।

भोपाल में यह हैं हालात
राजधानी होने के बाद भी भोपाल में भी पोल्ट्री ग्रेड का चावल जमकर बांटा गया। इसकी हकीकत भारतीय खाद्य निगम ने जिले के तीन गोदामों में रखे 2011 मी. टन चावल में से 1315 मी. टन चावल को खराब करार दे दिया है। यही नहीं इस ग्रेड का चावल अब लोगों के पास बहुतायत मात्रा में तीन माह के राशन के नाम पर पहुंच चुका है। अब इस मामले में जिम्मेदार अफसर एक दूसरे विभाग पर जिम्मा थोपकर पल्ला झाड़ रहे हैं।

क्वालिटी के लिए तय हैं जिम्मेदार
खाद्यान्न की गुणवत्ता तय करने के लिए कई विभागों के अफसरों की जिम्मेदारी तय है। इनमें खाद्य विभाग, भंडार निगम, नागरिक आपूर्ति निगम और भारतीय खाद्य निगम शामिल है। इन विभागों के विभिन्न पदों पर पदस्थ अफसरों की अलग-अलग जिम्मेदारी है। इसके बाद भी घटिया चावल की आपूर्ति होना बड़ी मिली भगत का खुलासा करती है।

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