प्रद्युमन सिंह तोमर की राह आसान नहीं

भोपाल, (अनिरुद्ध सोनोने/बिच्छू डॉट कॉम)। शिव सरकार के कबीना मंत्री और श्रीमंत के करीबी नेता प्रद्युमन सिंह तोमर का भविष्य अब पूरी तरह से दो माह के अंदर होने वाले उपचुनाव पर पूरी तरह से निर्भर है। बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बाद भी तोमर की राह मुश्किल बनी हुई है। इससे पार पाने के लिए अब वे पूरी तरह से भाजपा के दिग्गज हिन्दू नेता और महल के धुर विरोधी रहे पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया पर आश्रित नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि यह दोनों ही नेता ग्वालियर की स्थानीय राजनीति में एक दूसरे के विरोधी रहे हैं। यही नहीं उनके बीच बीते तीन चुनाव में मुकाबला हो चुका है। इनमें से दो बार तोमर और एक बार पवैया ने जीत तय की है। तोमर जहां श्रीमंत के बेहद करीबी लोगों में शामिल हैं, वहीं पवैया को महल विरोधी माना जाता है। अब यह दोनों नेता एक ही पार्टी में हैं। इसके चलते समीकरण पूरी तरह से बदल चुके हैं। खास बात यह है कि यह दोनों ही नेता मंत्री भी रह चुके हैं और तोमर अब भी मंत्री हैं। दलबदल के चलते अब ग्वालियर की सीट पर तोमर को जीत दर्ज करने के लिए पवैया की जरूरत महसूस की जा रही है। हालांकि पवैया पार्टी के फैसले से नाखुश हैं, यही वजह है कि वे अब तक तोमर के साथ किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में मंच साझा करते नजर नहीं आए हैं। बीते चुनाव तोमर ने पवैया को बीस हजार के लगभग मतों से पराजित किया था, लेकिन अब हालात पूरी तरह से बदले हुए हैं। यह बात अलग है कि पवैया संघ पृष्ठभूमि वाले और भाजपा के अनुशासित कार्यकर्ता होने की वजह से देर सबेर तोमर के पक्ष में खड़े नजर आ सकते हैं। फिलहाल इस सीट पर अब सभी की निगाहें कांग्रेस और बसपा प्रत्याशियों के नामों पर लगी हुई हैं। इन दोनों ही दलों के प्रत्याशी तय होने के बाद इस सीट की तस्वीर पूरी तरह से साफ हो जाएगी। श्रीमंत और उनके समर्थकों के भाजपा में जाने की वजह से यहां पर कांग्रेस संगठन के साथ ही नेताओं की कमी से जूझने की वजह से बेहद कमजोर स्थिति में नजर आ रही है। माना जा रहा है कि बसपा और कांग्रेस यहां भाजपा के किसी विद्रोही नेता की तलाश में है। अगर ऐसा होता है तो उपचुनाव का मुकाबला रोचक होना तय है।

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