गरीब सवर्णो को भी मिल सकती है सरकारी नौकरी में आयु में छूट


नई दिल्ली, बिच्छू डॉट कॉम। सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़ों को आरक्षण का फायदा पहुंचाने के लिए सरकार नई व्यवस्था पर काम कर रही है। खबर है कि सरकार अब ऐसे लोगों को सरकारी नौकरियों की उम्र में भी छूट देने की तैयारी में है। यह ओबीसी के समान करीब 3 साल की हो सकती है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने लंबे सोच-विचार के बाद इस बारे में कार्मिक मंत्रालय को चि_ी लिखी है। अभी सरकारी नौकरियों में सिर्फ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को ही उम्र में छूट मिलती है। इनमें एससी-एसटी को पांच साल और ओबीसी को 3 साल की छूट मिली हुई है। जानकारी के मुतातिबक, सरकार जल्द ही इसे लेकर फैसला कर सकती है। वैसे भी बिहार से जिस तरीके से यह मांग प्रभावी ढंग उठ रही है, उसमें संभव है कि इसका निर्णय बिहार चुनाव के पहले ही कर दिया जाए। फिलहाल यह मांग सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़ों को 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने के बाद से ही उठने लगी थी। इसमें कहा गया था कि आरक्षण का सही लाभ तभी मिलेगा, जब एसएसी-एसटी और ओबीसी की तरह सरकारी नौकरियों के लिए उम्र में भी छूट दी जाए। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के मुताबिक इसे लेकर नए साल की शुरुआत में ही कार्मिक मंत्रालय को प्रस्ताव दिया गया था। सूत्रों के मुताबिक हाल ही में कार्मिक मंत्रालय की ओर निर्णय में देरी होते हुए फिर से स्मरण कराया है। गरीब सवर्णों को सरकारी नौकरियों के लिए उम्र में तीन साल की छूट का यह फार्मूला ओबीसी को दी गई छूट से ही निकाला गया है। वैसे भी इन्हें आरक्षण देने का फार्मूला भी ओबीसी की तर्ज पर तैयार किया गया है। इसमें दोनों ही आय सीमा एक बराबर ही आठ लाख रखी गई है। गौरतलब है कि सरकार ने गरीब सवर्णों को दस फीसद आरक्षण देने का यह फैसला जनवरी 2019 में आम चुनाव से ठीक पहले ही लिया था।
राज्यसभा में भी उठा मुद्दा, उम्र के साथ फीस में भी रियायत की मांग: गरीब सवर्णों को आरक्षण के साथ ही सरकारी नौकरियों की उम्र में भी छूट का मुद्दा बुधवार को राज्यसभा में भी उठा। बिहार से भाजपा के सदस्य सतीश चंद्र दूबे ने शून्य काल के दौरान इसे प्रमुखता से उठाया। साथ ही मांग की कि गरीब सवर्णों को भी सरकारी नौकरियों में उम्र में छूट दी जाए। साथ ही इसने लिए जाने वाले शुल्क में भी रियायत की जाए। वैसे भी यह सभी आर्थिक आधार पर पिछड़े है। ऐसे में जल्द ही इस पर फैसला लिया जाए।

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