शिवराज की बार-बार हिदायत देने के बाद भी नहीं सुन रहे अफसर

शिवराज सिंह चौहान

-पानी की कमी की बड़ी वजह भू-जल स्तर का लगातार गिरना हैंडपंपों का खराब होना भी कारण है

भोपाल/राजीव चतुर्वेदी/बिच्छू डॉट कॉम।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की बार-बार हिदायतों के बाद भी अफसर सरकारी खजाने को पलीता लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। सौभाग्य योजना में भी करोड़ों रुपयों के नुकसान की परतें धीरे धीरे खुलने लगीं हैं। यही नहीं काम किए बगैर ही अफसरों ने भुगतान कर दिया। यानी सौभाग्य योजना से जनता के सौभाग्य से ज्यादा अफसरों की मौज हो गई। दरअसल इसका खुलासा हुआ है थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन से। बता दें कि जब इस योजना का थर्ड पार्टी निरीक्षण किया गया तो मौके पर चालीस फीसदी काम ही नहीं मिला और करोड़ों के बारे-न्यारे कर दिए गए। दिलचस्प है कि यह गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद सिर्फ अधिकारियों पर कार्रवाई के नाम पर कारण बताओ नोटिस देकर इतिश्री कर ली गई। उल्लेखनीय है कि देश के बिना बिजली वाले करोड़ों घरों में विद्युत कनेक्शन पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने सौभाग्य योजना शुरू की थी। इस योजना के अंतर्गत देश के जो आर्थिक रूप से गरीब लोग बिजली का कनेक्शन नहीं ले पाते और बिना बिजली के ही जीवन यापन कर रहे है उन परिवारों को केंद्र सरकार की तरफ से मुफ्त में ही बिजली का कनेक्शन दिया जाना तय किया गया। इस योजना को प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना के नाम से भी जाना जाता है। प्रदेश के अफसरों की तो इस योजना से जैसे मौज हो गई। करोड़ों रुपए की सर्विस केबल खरीदकर गुना, ग्वालियर और भोपाल के स्टोर में रख दी गई। इसके केबल का उपयोग ही नहीं हुआ।  इसके चलते केबल का गारंटी पीरियड भी निकल गया। दूसरी ओर यदि वह केबल उपभोक्ता के यहां लगाई जाती और खराब हो जाती तो उपभोक्ता को भी चपत लगती। 19 करोड़ से भी अधिक कीमत की अलग-अलग तरह की करीब नौ हजार सात सौ किलोमीटर केबल खरीदकर तीनों स्टोर्स में रख दी गई। यहां उल्लेख करना आवश्यक है कि यह खरीद कर्ज के पैसे से की गई है। इस राशि पर 2.28 करोड़ का ब्याज भी देना पड़ रहा है। इस केबल का भी गारंटी पीरियड निकल गया है।

सहज बिजली हर घर योजना
इस योजना के अंतर्गत देश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रो के गरीब परिवारों को शामिल किया गया है। इसे प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना के तहत बिजली कनेक्शन के लिए देश के लोगो का चयन 2011 की सामाजिक, आर्थिक और जातिय जनगणना के आधार पर किया जाता है। जिन लोगो का नाम सामाजिक आर्थिक जनगणना में है उन्हें ही मुफ्त में बिजली कनेक्शन दिया जायेगा। जिन लोगो का नाम इस जनगणना में नहीं होगा उन्हें  बिजली का कनेक्शन मात्र 500 रुपए देकर मिल सकता है और यह 500 रुपए भी वह दस आसान किस्तों में दे सकते है।

योजना का ये है उद्देश्य
उल्लेखनीय है कि देश में बहुत से ऐसे घर परिवार हैं जहां अभी भी बिजली नहीं है और वहां के लोग आर्थिक रूप से गरीब होने के कारण बिना बिजली के ही जीवन यापन कर रहे है। जिससे उनको दिक्कत का बहुत सामना करना पड़ता है। इन सभी समस्या को दूर करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना को आरम्भ किया गया है। इस योजना के जरिये देश के जिन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रो में गरीब परिवारों के घरो में बिजली नहीं है उन्हें मुफ्त में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराना और उनके घरो को रोशन करना है जिससे वह आराम पूर्वक अपना गुजर बसर कर सकें।

ऐसे दिया गड़बड़ी को अंजाम
दरअसल केंद्र व राज्य सरकार ने गांव तक बिजली पहुंचाने के लिए राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना व अटल ज्योति योजना का संचालन शुरू किया था। इस योजना के तहत काफी गांव कवर कर लिए गए थे। चूंकि पहले से ही कार्य हो चुका था लेकिन सौभाग्य योजना में भी पहले जहां लाइनें थी वहां कार्य दिखा दिए गए। इस कारण योजना में घोटाला हो गया। थर्ड पार्टी निरीक्षण में इनकी गड़बड़ी का खुलासा हो रहा है।

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