अब संघ के पदचिन्हों पर वीडी की टीम ने किया दौड़ना शुरू

Now VD's team started running on the footsteps of the Sangh

भोपाल/प्रणव बजाज/बिच्छू डॉट कॉम। जिस घर का मुखिया जैसा होता है, उस परिवार के सदस्य भी उसी तरह की सोच व कार्यपद्धति का अनुसरण करते हैं। मध्यप्रदेश भाजपा के मुखिया वीडी शर्मा संघ के वरिष्ठ प्रचारक रह चुके हैं और लंबे समय तक विद्यार्थी परिषद में संगठन का काम करते रहे हैं, जिसकी वजह से उनकी काम करने की शैली और संगठनात्मक क्षमता पर पूरी तरह से संघ की ही छाप दिखती है। यही वजह है कि बीते एक साल में मप्र के भाजपा संगठन में बदलाव दिखना शुरू हो गया है। पीढ़ी परिवर्तन से लेकर संगठन के तमाम आयोजन में यह बदलाव साफतौर पर देखा जा सकता है। उनकी कार्यप्रणाली से लग रहा है कि वे धीरे-धीरे संघ की कार्यपद्धति को लागू करने में लगे हुए हैं। वहीं इस बदलाव की नई शुरूआत उनके द्वारा उज्जैन में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में दिखाई दी। यह बदलाव आयोजन के खर्च को लेकर किया गया है। इसके तहत अब तय किया जा चुका है कि संगठन का कोई भी आयोजन कहीं भी होगा उसका खर्च अब प्रदेश संगठन द्वारा नहीं उठाया जाएगा।
 यह खर्च आयोजन स्थल वाले जिले के संगठन द्वारा ही उठाया जाएगा। अब तक इस तरह के आयोजन के लिए प्रदेश संगठन के फंड से भुगतान करने की परंपरा रही है। जिले में प्रदेश या संभागीय स्तर तक के आयोजन में भी यही व्यवस्था लागू रहेगी। इस नई व्यवस्था की शुरूआत संगठन द्वारा उज्जैन से की जा चुकी है। वहां आयोजित प्रशिक्षण वर्ग का पूरा खर्च स्थानीय टीम द्वारा ही उठाया गया है। इसके पहले तक राज्य संगठन के फंड से मिलने वाले पैसे की वजह से कई बार व्यवस्था में लगे लोगों द्वारा फिजूलखर्ची तक की जाती थी। अपने कार्यकाल का एक साल पूरा होते ही वीडी द्वारा इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए ऐसे किसी भी कार्यक्रम के लिए प्रदेश कार्यालय से फंड देने पर रोक लगा दी है। नई व्यवस्था के तहत अब चाहे कोई  प्रशिक्षण वर्ग हो अथवा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक, जिस जिले में इसका आयोजन किया जाएगा, उसके आयोजन का खर्च वहां के स्थानीय संगठन द्वारा ही उठाया जाएगा। इसके लिए सभी जिलाध्यक्षों को दिशा-निर्देश भी अधिकृत तौर पर दे दिया गए हैं।
संवाद व संपर्क पर जोर
वीडी द्वारा प्रदेश संगठन का पद  संभालने के बाद से ही नेताओं को संघ की तर्ज पर संवाद और संपर्क करने की परिपाटी पर जोर दिया जा रहा है। यही वजह है कि मौजूदा समय में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव व चलन को देखते हुए इस क्षेत्र में नवाचार करते हुए  उनके द्वारा पार्टी के सभी जनप्रतिनिधियों व पदाधिकारियों को सोशल मीडिया के अधिक से अधिक उपयोग को लेकर गाइडलाइन तक बना दी गई है।  जिसमें कहा गया है कि सोशल मीडिया को महज प्रचार-प्रसार और वार-पलटवार के दायरे तक ही सीमित न रखते हुए  इस प्लेटफार्म को वे अपने रोज के कामकाज का हिस्सा बनाएं। ग्रुप के बीच भी यह कम्युनिकेशन का बड़ा माध्यम है।  इस संबंध में जो निर्देश जारी किए हैं उसमें कहा गया कि फेसबुक और व्हाट्सएप सहित सोशल मीडिया के अन्य सभी प्लेटफार्म का उपयोग केवल अपने प्रचार-प्रसार और वार-पलटवार के लिए नहीं बल्कि इसे अपने रोजाना के कामकाज का हिस्सा बनाएं और कार्यकर्ताओं सहित ही इसे टारगेट ग्रुप के सदस्यों की सूची बनाकर उनसे निरंतर संवाद का माध्यम बनाएं। दरअसल भाजपा इस नवाचार के जरिए लोगों को इंटरनेट मीडिया के माध्यम से अपनी समस्याएं बताने की सुविधा पार्टी देने जा रही है। इससे लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाने जैसी परेशानियों का भी समाधान हो सकेगा। इसके तहत अब आवेदक या शिकायतकर्ता को इसके लिए विधायक के पार्टी कार्यालय तक नहीं जाना होगा और न ही राजधानी अथवा अन्य बड़े शहरों में स्थित कार्यालय या मंत्रालय के बार-बार चक्कर काटने पड़ेंगे।
संघ की है यह कार्यपद्धति
दरअसल यह कार्यपद्धति संघ की है। आरएसएस की राष्ट्रीय स्तर से लेकर निचले स्तर तक की कोई भी बैठक कहीं भी होती है , तो उसकी व्यवस्था स्थानीय जिले या फिर राज्य की इकाई द्वारा ही की जाती है। संघ पृष्ठभूमि से आने वाले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष शर्मा संगठन के मुखिया बनने के बाद से ही लगातार संघ की लाइन पर चलने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। इसकी पहली बानगी उनकी टीम में दिखी थी। उसमें उनके द्वारा विचारधारा और समर्पण के आधार पर जिस तरह से चेहरों को मौका दिया गया और जिलाध्यक्षों के चयन और मंडल स्तर की टीम का गठन किया गया उसमें भी संघ की शैली पूरी तरह से नजर आई। इसके अलावा जिस तरह से वे प्रदेश में दौरे कर रहे हैं और उसमें भी कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं, उसमें भी वे प्रचारक की भूमिका  में ही दिखते हैं। इस दौरान वे स्थानीय वरिष्ठ नेताओं से वन-टू-वन और बूथ स्तर के कार्यकर्ता के घर पंगत पर संगत जैसे कदम उठाकर भी संघ की शैली में काम रकने का स्पष्ट संदेश दे रहे हैं।
जिलों में रहता है फंड
प्रदेशाध्यक्ष शर्मा द्वारा की गई इस नई व्यवस्था को फिजूलखर्ची रोकने वाला कदम माना जा रहा है। प्रदेश से खर्च उठाने की वजह से कई बार बैठकों और प्रशिक्षण पर काफी अनाप-शनाप खर्च कर दिया जाता था। इसके लिए बड़ी संख्या में चंदा वसूली अभियान भी चलाया जाता है जबकि हर जिले में आजीवन सहयोग निधि के अलावा नियमित सहयोग से मिलने वाली राशि का फंड रहता है। यही वजह है कि अब फिजूलखर्ची पर इसे रोक लगाने के प्रयास वाला कदम माना जा रहा है।
 बूथ मैनेजमेंट पर फोकस
प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा अपने  मैदानी दौरों में बूथ कार्यकर्ताओं को मजबूत बना रहे हैं। इसके लिए उनके दौरों में संघ का ही पुराना पैटर्न दिख रहा है। उनके द्वारा प्रत्येक नगर निगम क्षेत्र को टारगेट बनाकर समाज के हर वर्ग का मन टटोलने का काम किया जा रहा हैं। शर्मा बूथ से लेकर मंडल और जिलों के नेताओं से वन-टू-वन कर मनभेद और मतभेद उभरने से रोकने में भी जुटे हैं। खास बात है कि वे अपने दौरों में एक समय का भोजन किसी बूथ स्तर के कार्यकर्ता के घर कर रहे हैं। यही नहीं बूथ अध्यक्ष व कार्यकर्ता के घर जिले के प्रमुख नेता भी प्रदेशाध्यक्ष की पंगत में संगत कर रहे हैं। बूथ जीतो चुनाव जीतो और बूथ मजबूत तो संगठन मजबूत का नारा देकर प्रदेशाध्यक्ष शर्मा ने अब खुद प्रभारियों को भी यही मंत्र दिया है।
इनका कहना है
भारतीय जनता पार्टी ने अपने जिला संगठनों को आर्थिक रुप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाया है। वैसे भी बड़े कार्यक्रम कभी -कभी ही होते हैं। आजीवन सहयोग निधि का एक बड़ा फंड जिलों में रहता है। प्रदेश कार्यालय के फंड से हर व्यवस्था करना उचित भी नहीं था।
– भगवान दास सबनानी, प्रदेश महामंत्री भाजपा

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