अब सरकार की प्राथमिकता बनी कोरोना और उपार्जन

शिव सरकार

भोपाल/राजीव चतुर्वेदी/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर और गेहूं की फसल आने की वजह से अब शिव सरकार ने अपनी पुरानी प्राथमिकताओं को छोड़कर पूरा फोकस इन दोनों ही मामलों पर करना शुरू कर दिया है। यही वजह है कि इस बार 12 अप्रैल को होने वाल कलेक्टर और कमिश्रर कॉफ्रेंस को स्थिगित कर दिया गया है। माना जा रहा है कि अब यह कॉन्फ्रेंस अगले माह ही होगी।
दरअसल प्रदेश में इन दिनों कोरोना बेकाबू हो चुका है। हालत यह है कि कई बड़े शहरों में कोरोना की दर बीस फीसदी से अधिक चल रही है। ऐसे में पूरे अमले को इससे निपटने पर ध्यान देने को कह दिया गया है। उधर प्रदेश में उपार्जन का काम भी शुरू हो चुका है। इस काम में भी बड़े अमले को लगाया गया है। इसकी वजह से ही कॉन्फ्रेंस का एजेंडा जारी होने के बाद भी उसे स्थगित करने का फैसला किया गया है। दरअसल इस तरह का हर माह आयोजन करने के पीछे सरकार की मंशा प्रशासन को चुस्त दुरुस्त रखने के अलावा विभिन्न योजनाओं की समीक्षा कर वास्तविकता का पता करना भी है। अब प्रदेश में हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं।
कोरोना संक्रमण की स्थिति बेकाबू बनी हुई है। हालत इतने गंभीर बने हुए हैं कि अस्पतालों में बिस्तर से लेकर दवाओं तक की कमी बन गई है। यही वजह है कि अब सरकार ने इसे अपनी पहली प्राथमिकता में रख लिया है। इसको लेकर मुख्यमंत्री द्वारा अपने स्तर पर लगातार न केवल समीक्षा की जा रही है, बल्कि जागरुकता के कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा अब प्रदेश में गेहूं के अलावा सरसों, मसूर और चना के उपार्जन का काम भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। यह काम भी सरकार की प्राथमिकता में है। प्रदेश सरकार ने इस साल बीते साल की तुलना में डेढ़ गुना अधिक गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य तय किया हुआ है। इसके लिए सरकार द्वारा तमाम व्यवस्थाएं तो की ही जा रही हैं, साथ ही किसानों को उनकी फसल का दाम सही समय पर मिल सके इस पर भी पूरा फोकस किया जा रहा है।
अगले माह हो सकती है अब कॉंन्फ्रेंस
माना जा रहा है कि एक माह में कोरोना पर काबू पाने के साथ ही बड़े पैमाने पर फसल का उपार्जन का काम कर लिया जाएगा। इसकी वजह से अब अगले माह ही कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जाना संभव हो सकता है। माना जा रहा है कि तब बारिश से पहले गेहूं के सुरक्षित भंडारण के साथ ही खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर समीक्षा की जा सकती है। यही नहीं इसमें स्ट्रीट बेंडर योजना की समीक्षा के अलावा तमाम तरह के माफिया के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान की समीक्षा भी की जा सकती है। फिलहाल कोरोना के बेकाबू होने की वजह से अब प्रशासनिक रुप से भी पूरा फोकस इस पर ही बना हुआ है। यही वजह है कि अब सरकार इसके लिए पूरा ध्यान वैक्सीनीकरण पर बना हुआ है।

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