कचरे के ढेर में करोड़ों का माया जाल

Maya trap of crores in garbage heap

इंदौर/विनोद शर्मा/प्रणव बजाज/बिच्छू डॉट कॉम। जिस कचरे को कचरा गाड़ी में डाल कर शहरवासियों ने इंदौर को स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर-1 बनाया उसी कचरे को नगर निगम के कारिंदो ने कमाई का जरिया बना डाला। इसका बड़ा उदाहरण ट्रेंचिंग ग्राउंड स्थित प्रोसेसिंग प्लांट है। मीडिया कर्मियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाकर यहां कचरे से करोड़ों के वारे न्यारे किए जा रहे हैं। चौथे दर्जे के कर्मचारी से लेकर उपयंत्री और निगम मुख्यालय में बैठे अफसर प्रोसेसिंग के नाम पर अपनी जेब भरने पर आमादा है। नगर निगम में आला दर्जे के इंजीनियर होने के बाद भी ट्रेंचिंग ग्राउंड स्थित प्रोसेसिंग प्लांट की जिम्मेदारी राम गुप्ता जैसे मस्टर उपयंत्री संभाल रहे हैं। सजा के तौर पर ट्रेंचिंग ग्राउंड में अपनी पोस्टिंग को गुप्ता ने मुख्यालय में बैठे अफसरों के सहयोग और मैदानी अमले के समर्पण से मजेदार बना डाला। पहले भी कई घोटालों को अंजाम दे चुका गुप्ता 3 साल में प्रोसेसिंग प्लांट से ही करोड़ों की कमाई कर चुका है। मशीनों के मेंटेनेंस से लेकर पोकलेन-डंपर के डीजल जोड़ घटाव करके लाखों रुपए कमाए। जिस कचरे से खाद बनाना थी उस कचरे को ट्रेंचिंग ग्राउंड के पिछले हिस्से में ही दफना दिया। स्वच्छता सर्वेक्षण की शर्तों के अनुसार ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरे का ढेर मंजूर नहीं था और इसकी प्रोसेसिंग निरंतर जारी रहनी चाहिए थी इसीलिए कचरे को गड्ढा खोदकर दफना दिया गया। शायद यही वजह है कि चीफ इंजीनियर, अपर आयुक्त और आयुक्त मामले में चाहकर भी उधेड़बुन नहीं कर पाए। जिसका पूरा फायदा गुप्ता जैसे लोग उठा रहे हैं काबिलेगौर यह भी है कि अधिकारी जहां लॉकडाउन में ज्यादा कचरा आने की बात कर रहे है वही हकीकत ठीक इसके विपरीत है निचले स्तर के कर्मचारियों की मानें तो लॉकडाउन के समय तो गीले कचरे की आवक में 70 प्रतिशत तक कि कमी आ गई थी, क्योंकि होटल, रेस्टोरेंट, मंडियां आदि सभी बंद थी और पूरे लॉकडाउन के दौरान प्लांट सारे चालू थे ओर वर्कर भी सभी नियमित थे जब सारी प्रक्रिया नियमित थी तो लगभग 2 लाख टन कचरे का अभी भी जमा होना (80 हजार से 1 लाख टन ट्रिंचिंग ग्राउंड में ओर 1 लाख से 1.5 लाख टन कचरा पहाड़ी के ऊपर दफन) कई सवालों को जन्म देता है।

ट्रेंचिंग ग्राउंड के सामानों से सजा गुप्ता का घर….
ट्रेंचिंग ग्राउंड पर तैनात मैदानी अमले की मानें तो ग्राउंड के लिए आए कई सामान गुप्ता जी के घर पहुंच गए। यहां बनने वाली पेवर ब्लॉक इस्तेमाल की गई। यहां तक कि एक एलसीडी भी ग्राउंड के बजाय उनके घर की दीवार पर सज गई।

लोकायुक्त तक पहुंची शिकायत
ट्रेंचिंग ग्राउंड पर चल रहे कचरे से करोड़ों की कमाई के खेल की शिकायत लोकायुक्त तक पहुंच चुकी है। शिकायतकर्ता की मानें तो गुप्ता की संपत्ति की जांच होती है तो बड़े पैमाने पर बेहिसाब और अनुपातहीन संपत्ति सामने आएगी।

मस्टर उपयंत्री की निगम खर्चे पर मौज ही मौज
गुप्ता ओहदे में भले मस्टर पर नियुक्त उपयंत्री हैं लेकिन नगर निगम के संसाधनों का वह उसी तरह से दोहन कर रहे हैं जैसे कोई स्थाई इंजीनियर करता है. नगर निगम ने गाड़ी दे रखी है जिसके वे पात्र नहि है और तो और ड्राइवर भी गुप्ता ने अपनी पसंद का रखवा लिया जिसकी तनखा भी निगम ही दे रहा है. कुछ दिनों पूर्व निगमायुक्तद्वारा जारी कारण बताओ नोटिस जारी कर गुप्ता के वेतन पर भी रोक लगा दी थी नियमानुसार मस्टरकर्मी वेतन रुकने पर कार्य पर नहि माने जाते लेकिन इन सबके बावजूद गुप्ता अभी भी निरंतर कचरे से कमाई में लगे है

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