भाजपा के कई परंपरागत चेहरे सत्ता संगठन से हो सकते हैं ओझल

Many traditional faces of BJP can be lost from power organization
  • कुछ ऐसे नेताओं को जगह दी सकती है, जिनका उपचुनाव में बेहतर परफार्म रहा है

    भोपाल/राकेश व्यास/बिच्छू डॉट कॉम। सूबे में हुए उपचुनाव के बाद अब सत्ता व संगठन में नियुक्तियोंं के लिए कार्यकर्ताओं का दबाव शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि अगले साल के पहले माह में संभावित नगरीय निकाय चुनावों के पहले ही कार्यकर्ताओं को उनके हिसाब से सत्ता व संगठन में भागीदारी दे दी जाएगी। इसमें माना जा रहा है कि अब पार्टी उन लोगों को पीछे करने जा रही है जिन्हें पार्टी के साथ ही सत्ता में परंपरागत चेहरे के रुप में पहचान मिल चुकी है। पार्टी उन चेहरों की जगह इस बार न केवल नए चेहरों को आगे कर सकती है, बल्कि उपचुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने वाले लोगों को भी उपकृत कर सकती है।
    हालांकि इसमें पार्टी के सामने सबसे बड़ी मुश्किल श्रीमंत समर्थकों की भागीदारी को लेकर बनी हुई है। सत्ता व संगठन में भागीदारी के इंतजार में पार्टी के राज्य स्तर से लेकर बूथ स्तर तक नेताओं कार्यकर्ताओं की लंबी फौज कतार में है। यही वजह है कि अब उन्हें उपकृत करने के रास्ते तलाशने का काम शुरू कर दिया गया है। माना जा रहा है कि पार्टी की भोपाल में चार दिन बाद 19 को होने वाली बड़ी बैठक के बाद नई नियुक्तियों का दौर शुरू हो सकता है। माना जा रहा है कि सबसे पहले प्रदेश में वीडी की नई टीम का गठन किया जाएगा। इसमें कुछ उन नेताओं को जगह दी सकती है, जिनका उपचुनाव में बेहतर परफार्म रहा है। यही नहीं नए व युवा चेहरों को टीम में शामिल करने की वजह से लगभग हर नेता की टीम में रहने वाले कुछ नेताओं को इस बार बाहर का रास्ता दिखाए जाने की पूरी संभावना है। कहा तो यह भी जा रहा है कि इस बार प्रदेश की टीम में अधिकांश नए चेहरे दिख सकते हैं। इसी तरह से जिला, मंडल और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को टीम में जगह दी जा सकती है। मुख्यालय स्तर पर कई चेहरों से प्रदेश अध्यक्ष की पटरी नहीं बैठी है, इसलिए नई टीम में कई प्रमुख चेहरों को बाहर किया जा सकता है। इसमें प्रचार, प्रबंधन से लेकर मानीटरिंग तक के बड़े नाम हो सकते है। संगठन के लिहाज से 19 नवंबर को होने वाली बैठक महत्वपूर्ण रहेगी।
    मंत्रिमंडल विस्तार पर सिंधिया फैक्टर
    उपचुनाव के दौरान बगैर विधायक रहते छह माह का कार्यकाल पूरा होने से मंत्री पद से गोंविद सिंह और तुलसी सिलावट को इस्तीफा देना पड़ा था। अब फिर से इस दोनों नेताओं को वापस मंत्री बनाया जाना तय है। इनके अलावा तीन मंत्रियों के उपचुनाव में हार जाने की वजह से तीन अन्य रिक्त हो गए हैं। इन तीन पदों के लिए करीब आधा दर्जन से अधिक विधायकों की मजबूत दावेदारी बनी हुई है। इन तीनों रिक्त पदों को लेकर श्रीमंत की सहमति अहम मानी जा रही है। इसकी वजह है उनके समर्थक मंत्रियों की हार से पदों का रिक्त होना। पार्टी के साथ ही मुख्यमंत्री के सामने सबसे बड़ी दिक्कत इस बात की है कि पद कम हैं और दावेदार अधिक हैं। ऐसे में किसे लिया जाए और किसे छोड़ा जाए यह तय करना मुसीबत वाला काम है।
    बड़े नेताओं को किया जाएगा निगम-मंडल में समायोजित
    सरकार अब पार्टी के उन नेताओं को जल्द ही निगम मंडलों में पदस्थ करने की तैयारी कर रही है जिन्हें कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व विधायकों की वजह से टिकट से वंचित किया गया है। ऐसे नेताओं को खुश करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। इनमें वे नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं , जो आम चुनाव में हारने के बाद से अपने राजनीतिक अस्तित्व की चुनौती का सामना कर रहे हैं। इसमें जिन्होंने सत्ता संगठन के लिए काम किया उन्हें भी उपकृत किया जाना है। चुनाव हारने वाले पूर्व मंत्रियों में जयंत मलैया, दीपक जोशी, जयभान सिंह पवैया सहित कई नाम इनमें शामिल हैं। इन्हें इस बार सत्ता-संगठन में एडजस्ट किया जाना है।
    इन पदों पर भी मिलेगा मौका
    सत्ता व संगठन के अलावा निकाय चुनाव में पार्टी प्रत्याशी न बन पाने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठन की ओर से नगरीय निकाय चुनाव के बाद एल्डरमैन बनाए जाने का आश्वासन दिया जा सकता है। इसी तरह से जिला उपभोक्ता परिषद में भी नियुक्तियां होनी हैं। इन पदों पर नियुक्तियां कमलनाथ सरकार के समय से लंबित है। इसके अलावा कई अन्य तरह के प्राधिकरणों में भी नियुक्तियां की जानी हैं। इनमें अंचलों के नेताओं की ही नियुक्तियां की जाती हैं।
    इन पदों पर भी मिलेगा मौका
    सत्ता व संगठन के अलावा निकाय चुनाव में पार्टी प्रत्याशी न बन पाने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठन की ओर से नगरीय निकाय चुनाव के बाद एल्डरमैन बनाए जाने का आश्वासन दिया जा सकता है। इसी तरह से जिला उपभोक्ता परिषद में भी नियुक्तियां होनी हैं। इन पदों पर नियुक्तियां कमलनाथ सरकार के समय से लंबित है। इसके अलावा कई अन्य तरह के प्राधिकरणों में भी नियुक्तियां की जानी हैं। इनमें अंचलों के नेताओं की ही नियुक्तियां की जाती हैं।

Related Articles