पुलिस की पिटाई से फेफड़े की झिल्ली फट गई थी- सांसद प्रज्ञा ठाकुर

भोपाल, बिच्छू डॉट कॉम। भारतीय जनता पार्टी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने रिपब्लिक टीवी पर बातचीत के दौरान बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस की पिटाई में मुझे बेल्ट से पीटा गया। पिटाई की वजह से उनकी फेफड़े की झिल्ली फट गई थी। रिपब्लिक टीवी पर एंकर अर्णब गोस्वामी के सामने भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि ‘मुझे यह लोग एक होटल में ले कर गए… राजदूत होटल था… वहां इन्होंने पलंग पर कुछ वायर बिछाए..कुछ इंस्ट्रूमेन्ट्स नीचे रखे और ऊपर से बेडशीट बिछाई और उसपर मुझे बैठाया गया और पता नहीं क्या-क्या उल्टा-सीधा प्रश्न पूछते रहे और उसके बाद जो मेरी जानकारी में नहीं था उन प्रश्नों का जवाब जब मैंने नहीं दिया और इनके समक्ष मैं झुकी नहीं…
इनके द्वारा कही गई बात जब मैंने नहीं कही तो इन्होंने इतना मुझे टॉर्चर किया कि मैं वहां बेहोश हो गई…और फिर ये गोपनीय तरीके से मुझे किसी अस्पताल में लेकर गएज्वो सुश्रुषा हॉस्पीटल था..और उस हॉस्पीटल की जो रिपोर्ट आई उस रिपोर्ट में आया कि मार लगने से मेरे फेफड़े की झिल्ली फटी और उसके कारण मैं बेहोश हुई तथा मेरी सांस रुकी…
उसके बाद इनलोगों ने मुझे उसी अवस्था में उठा कर दूसरे अस्पताल में लेकर गए…मुझे पैदल ही अस्पताल में सीढिय़ां चढ़वाई गईं…मुझे जानबूझ कर दूसरे अस्पताल में रखा ताकि कोई इन्हें ट्रेस ना कर पाए…इनलोगों ने गैरकानूनी तरीके से हमे 13 दिन रखा।’
इसपर एंकर अर्णब गोस्वामी ने भाजपा सांसद से पूछा कि जब आपको राजदूत होटल ले जाया गया था तब उस वक्त कौन-कौन पुलिस वाले थे? इसपर प्रज्ञा ठाकुर ने जवाब दिया कि ‘जब मुझे ले जाया गया उस वक्त सुवरणा शिंदे थीं और कोई एक इंस्पेक्टर था और खानविल्कर थे…यह लोग साथ में उस समय थे।’ चैनल पर साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि ‘परमबीर के षड्यंत्र के विरुद्ध मैं कुछ कर रही हूं, जिन-जिन लोगों ने मुझे टॉर्चर किया मैं उनपर केस करूंगी।
इनको दंड दिलवाऊंगी’… साध्वी प्रज्ञा का पूरा नाम प्रज्ञा सिंह ठाकुर है। मध्य प्रदेश के भिंड जिले के कछवाहा गांव में जन्मीं प्रज्ञा सिंह 2008 के मालेगांव ब्लास्ट मामले में गिरफ़्तारी से चर्चा में आईं थीं। महाराष्ट्र के मालेगांव में अंजुमन चौक और भीकू चौक के बीच शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट के सामने 29 सितंबर 2008 की रात 9.35 बजे बम धमाका हुआ था जिसमें छह लोग मारे गए और 101 लोग घायल हुए थे।
इस धमाके में एक मोटरसाइकिल इस्तेमाल की गई थी। एनआईए की रिपोर्ट के मुताबिक यह मोटरसाइकिल प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर थी। इसके बाद प्रज्ञा को गिरफ़्तार किया गया था। उन पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) लगाया गया। बाद में इस मामले में एनआईए ने जब साल 2016 में अपनी अंतिम रिपोर्ट दी तब उस वक्त प्रज्ञा सिंह को दोषमुक्त बनाया गया था। उनपर से मकोका भी हटा लिया गया था।

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