बिसाहू के लिए मुसीबत बन सकते हैं कुंजाम

Kunjam can become a problem for Bisahu

भोपाल/अनिरुद्ध सोनोने/बिच्छू डॉट कॉम। महाकौशल अंचल के तहत आने वाली अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित अनूपपुर विधानसभा सीट पर इस बार भी अभी से कड़ा मुकाबला होना तय माना जा रहा है। इसकी वजह है यहां पर उपचुनाव में शिव कबीना के सदस्य बिसाहूलाल सिंह भाजपा के उम्मीदवार होंगे, तो वहीं कांग्रेस ने उन्हें चुनौती देने के लिए बिसाहू के गौड़ समाज से ही पंचायती राजनीति के बड़े नेता विश्वनाथ सिंह कुंजाम को मैदान में उतार दिया है। यही वजह है कि इस बार बिसाहू के लिए मुसीबत तय मानी जा रही है। आदिवासियों का यह गढ़ कांग्रेसी प्रभाव वाला माना जाता है। यह बात अलग है कि कांग्रेस के साथ ही अपने कुछ व्यक्तिगत प्रभाव की वजह से बिसाहू यहां से निर्वाचित होते रहे हैं। इस बार कांग्रेस ने उनके बागी होने के बाद उनकी तगड़ी घेराबंदी करने के लिए जातीय समीकरण का दांव चला है। बीते विस चुनाव में बिसाहू को जीत के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी थी , इसके बाद भी वे 2018 में भाजपा के पूर्व विधायक रामलाल रौतेल से मात्र 11,561 मतों से जीत पाए थे। रौतेल ने 2013 में बिसाहूलाल को हरा दिया था पर यह बात भी सी है कि यहां से सर्वाधिक पांच बार विधायक रहने की वजह से बिसाहू ने अपनी खुद की जमीन तैयार की है। यह बात अलग है कि इस बीच उनके विरोधियों की भी संख्या में वृद्धि हुई है। अब वे कांग्रेस छोड़ भाजपा में हैं। इस इलाके क्षेत्र में बीते चुनाव में मुख्य मुकाबला आठ उम्मीदवारों में से कांग्रेस और भाजपा के बीच ही रहा था। नोटा में 2730 वोट पड़े थे, लेकिन बाकी किसी दल के उम्मीदवार को दो हजार मत भी नहीं मिले थे।

ब्राह्मण मतदाताओं पर भाजपा की नजर
इस विधानसभा सीट पर अब भाजपा जातीय समीकरण साधने का प्रयास कर रही है। यही वजह है कि भाजपा ने यहां पर पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ल और संजय पाठक को यहां का चुनाव प्रभारी बनाया है। कांग्रेस ने यह जिम्मा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति को दिया है। फिलहाल बसपा ने अब तक अपना पत्ता नहीं खोला है। इस आदिवासी क्षेत्र में भाजपा की नजर ब्राह्मण मतदाताओं पर है, इसलिए शुक्ल और पाठक को जिम्मेदारी दी गई है। प्रभारी के जरिए यहां पर जातीय समीकरण दुरुस्त करने की कोशिश में है।

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