आकृति बिल्डर के हेमंत सोनी ने बिजनेस सेंटर में भी की गड़बड़ियां

Hemant Soni of Aakriti Builder also made mistakes in Business Center

भोपाल/राजीव चतुर्वेदी/बिच्छू डॉट कॉम। राजधानी के आकृति बिल्डर द्वारा की गई एक के बाद एक प्रोजेक्ट में गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। हालत यह है कि ऐसे मामलों की शिकायतों के बाद भी प्रशासन से लेकर पुलिस अब तक उसके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करती नजर नहीं आ रही है। इसकी वजह से आकृति बिल्डर से संपत्ति खरीदने का सौदा करने वाले लोगों को न केवल संपत्ति पाने के लिए भटकना पड़ रहा है , बल्कि जिन्हें संपत्ति मिल गई है उन्हें तय सुविधाओं को पाने के लिए भी बेहद परेशान होना पड़ रहा है।
हाल ही में आकृति ईको सिटी और आकृति नेस्ट में की गई गड़बड़ियों के खुलासे के बाद अब आकृति बिजनेस सेंटर में भी बड़े पैमाने पर बिल्डर हेमंत सोनी द्वारा की गई गड़बड़ियां सामने आने लगी हैं। यही नहीं इस बिजनेस सेंटर में दुकानें खरीदने वाले लोगों को भी रजिस्ट्री खरीदने के लिए सालों से चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। यह हालात तब हैं जबकि रेरा द्वारा भी इस संबंध में समय सीमा निर्धारित कर रजिस्ट्री कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं। खास बात यह है कि इस बिजनेस सेंटर का नक्शा तक बदल दिया गया है। इसके बाद कराए जा रहे निर्माण को लेकर आकृति बिजनेस सेंटर व्यापारी एकता कल्याण समिति द्वारा बीते साल दो सितंबर को सिटी प्लानर से लिखित शिकायत की गई थी, तब कहीं जाकर नियमविरुद्व किए जा रहे निर्माण पर रोक लगाई जा सकी थी। 18 नबंवर 2011 को उस समय के लैंड यूज के आधार पर नक्शा पास होने के बाद 16 जुलाई 2016 को इसका लैंड यूज ही बदल दिया गया। इसके लिए बिजनेस सेंटर में संपत्ति खरीदने वालों से न तो अनुमति ली गई और न ही उसकी सूचना ही दी गई।
यही नहीं सम्पत्ति खरीदने वालों को बिल्डर द्वारा बिजनेस सेंटर का नगर निगम द्वारा जारी किए जाने वाले कार्यपूर्णता का प्रमाण पत्र की प्रति भी नहीं दी जाती है। गौरतलब है कि इस बिजनेस सेंटर का निर्माण भी आकृति बिल्डर द्वारा एक दशक पहले वर्ष 2011 में शुरू किया गया था। इसमें इसके बाद भी कई खरीददारों को अब तक बतौर अग्रिम रकम का भुगतान करने के बाद भी दुकानें नहीं मिल सकी हैं। यही नहीं इस बिजनेस सेंटर में अब भी कई तरह की सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। इनमें फायर फाइटिंग सिस्टम से लेकर बिजली का सब स्टेशन और पार्किंग जैसे काम भी आधे अधूरे पड़े हुए हैं।
इस तरह बदला लैंड यूज
2011 में इस प्रोजेक्ट को शुरू करते समय एबीसी शापिंग मॉल के ग्राउंड एवं पहले माले पर दुकानों व शोरूम एवं द्वितीय से लेकर चौथी मंजिल तक आॅफिस निर्माण की जानकारी दी गई थी। इसकी ही अनुमति ली गई थी। इसके बाद 2015 में इसका लैंड यूज ही बदल दिया गया और तृतीय व चतुर्थ तल पर आॅफिस की जगह फ्लैट और हॉल निर्माण की अनुमति ले ली गई। जिसकी जानकारी इस मॉल में संपत्ति खरीदने वालों तक को नहीं दी गई।  
3 दुकानों की एनओसी लेकर दर्जनों बेची
खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट के लिए जिस बैंक आॅफ बड़ौदा की शाखा से कर्ज लेकर अनुबंध किया गया है। उससे दुकान बेचने के पहले सिर्फ तीन दुकानों की ही एनओसी ली गई थी, लेकिन उसके बाद भी दर्जनों दुकानों की रजिस्ट्री करा दी गई हैं। यह जानकारी जब दुकानदारों को मिली तो वे हतप्रभ रह गए हैं।
नहीं चुकाया कर्ज
खास बात यह है कि आकृति बिल्डर द्वारा बैंक आॅफ बड़ौदा से अपने प्रोजेक्ट के लिए लिया गया कर्ज नहीं चुकाने पर बैंक प्रबंधन द्वारा  उसके खिलाफ 20 करोड़ 93 लाख रुपए से अधिक की राशि की वूसली के लिए बीते साल 10 जुलाई को कब्जा नोटिस भी जारी किया जा चुका है। इस नोटिस में एबीसी शापिंग मॉल और आकृति बिजनेस आॅर्केड सहित तीन सपंत्तियों को कब्जे में लेने की जानकारी दी गई थी।  

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