श्रीमंत विरोधी होने से मिली हरिवल्लभ को कांग्रेस की उम्मीदवारी

Harivallabh gets Congress candidacy due to being anti-Srimanta

पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व.माधवराव सिंधिया के विशवासपात्र रह चुके हैं शुक्ला

भोपाल/राकेश व्यास/बिच्छू डॉट कॉम। कांग्रेस ने आखिरकार शिवपुरी जिले के पोहरी विधानसभा सीट के लिए प्रत्याशी की घोषणा कर ही दी है। यहां से कांग्रेस ने श्रीमंत विरोधी पूर्व विधायक हरिवल्लभ शुक्ला पर दांव लगाया है। शुक्ला पूर्व में श्रीमंत के पिता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया के विशवासपात्र रह चुके हैं। उनके निधन के कुछ समय बाद ही उनकी श्रीमंत से पटरी नहीं बैठ पा रही थी, जिसके चलते उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कह दिया था।
यही वजह है कि वे भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके बाद उन्होंने श्रीमंत के विरोध में भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव में चुनौति दी थी। इसके कुछ बाद के कुछ सालों में विभिन्न दलों में होते हुए फिर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इस बीच वे दो बार विधायक भी चुने गए। एक बार वे कांग्रेस से और एक बार समानता दल के टिकट पर विधायक रह चुके हैं। यह बात अलग है कि शुक्ला पर दलबदलू होने की छाप है। इसकी वजह है उनका समय-समय पर दलबदल कर कांग्रेस, भाजपा, समानता दल व बसपा की सवारी करना है। वे उन नेताओं में शामिल हैं , जिन्हें श्रीमंत के पिता का बाल सखा माना जाता है। पोहरी विधानसभा सीट से वे दो बार विधायक रहे शुक्ला पहली बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे। इसके बाद पार्टी ने जब उन्हें टिकट नहीं दिया तो वे राष्ट्रीय समानता दल में चले गए थे , उसके टिकट पर फिर वे विधायक चुने गए।
प्रदेश में इस दल की स्थिति को देखते हुए वे न केवल भाजपा में शामिल हो गए थे , बल्कि 2004 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर गुना लोकसभा सीट से श्रीमंत को चुनौती भी दी थी। यही वजह है कि उन्हें इसके बाद से श्रीमंत का घोर विरोधी माना जाने लगा था। जिसकी वजह से ही उनके बतौर इनाम एक बार फिर कांग्रेस ने पोहरी से प्रत्याशी बनाया है। इसमें भी खास बात यह है कि उन्हें इलाके में कांग्रेस का अब सबसे अधिक जनाधार वाला नेता भी माना जाता है। यह बात अलग है कि वे 2008 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर यहां से हार का सामना कर चुके हैं। इसके बाद ही 2013 के चुनाव से ठीक पहले फिर कांग्रेस में न केवल शामिल हुए थे , बल्कि कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ चके हैं। यह बात अलग है कि उन्हें तब भी भाजपा प्रत्याशी प्रहलाद भारती ने हरा दिया था। यही नहीं श्रीमंत के भाजपा में जाने के बाद से वे लगतार उन पर हमलावर बने हुए थे, इस दौरान उन्होंने श्रीमंत को वायरस बताते हुए यह तक कहा कि 40 साल से जो वायरस कांग्रेस में था, अब वह भाजपा में चला गया है। इसलिए अब भाजपा को चिंता करने की जरूरत है और खतरा भाजपा को है।

महज 3625 वोटों से हारे थे शुक्ला
2013 के विस चुनाव में हरिवल्लभ शुक्ला कांग्रेस प्रत्याशी के रुप में कड़े मुकाबले में भाजपा के प्रहलाद भारती से मात्र 3625 मतों से हारे थे। भारती को 53 हजार 68 वोट और शुक्ला को 49 हजार 443 वोट मिले थे। जबकि 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने उनकी जगह सुरेश राठखेड़ा को प्रत्याशी बनाया था और उन्हें जीत भी मिली थी। राठखेड़ा इस बार भाजपा से चुनाव लड़ने वाले हैं।

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