रेरा से लेकर प्रशासन तक पर भारी पड़ रहा है आकृति बिल्डर

From builder to administration, figure builder is being overshadowed

भोपाल/राजीव चतुर्वेदी/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश की राजधानी होने की वजह से सरकार से लेकर प्रशासनिक अफसरों का अमला यहीं बैठता है, इसके बाद भी बिल्डरों से आम लोग बेहद परेशान रहते हैं। हालत यह है कि कुछ बिल्डर तो ऐसे हैं जो आम आदमी तो ठीक प्रशासन से लेकर सरकार तक पर भारी पड़ते हैं। 
ऐसा ही मामला है आकृति बिल्डर का। इस बिल्डर द्वारा सुनहरे सपनों को ऐसा जाल बुना जाता है कि आम आदमी अपने घर का सपना सच होने के ख्बाब में ऐसे डूबता है कि अपने जीवन भर की मेहनत की कमाई गंवा बैठता है। एक बार पैसा मिला तो आकृति बिल्डर के वह चक्कर लगाने पर मजबूर हो जाता है। ऐसे शहर में सैकड़ों लोग हैं, जो आकृति बिल्डर के जाल में उलझ कर अब अपनी चप्पलें घिसने को मजबूर बने हुए हैं। हालत यह है कि आकृति ग्रुप में मकान, फ्लैट लेने वाला हर व्यक्ति बेहद परेशान है। दरअसल इस बिल्डर द्वारा सैकड़ों लोगों से पैसा तो ले लिया गया है, लेकिन उनके मकान/फ्लैट का काम शुरू करने की जगह उस पैसे का उपयोग अन्य कामों में कर लिया जाता है। इस ग्रुप के चेयरमैन हेमंत कुमार सोनी व डायरेक्टर राजीव सोनी द्वारा किए जाने वाले इस गोरखधंधे का शिकार होने वाले लोग लंबे समय से बेहद परेशान हैं। वजह भी है कि न तो सोनी बंधु प्रशासन को मानते हैं और न ही रेरा के निर्णयों को। हालत यह है कि उनके खिलाफ अब तक विभिन्न जगहों पर तीन सौ से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं , लेकिन मजाल है कि उनके कान पर जूं तक रेंगी हो। इस बिल्डर की मनमानी इससे ही समझी जा सकती है कि उसके खिलाफ रेरा और कलेक्ट्रेट कार्यालय में करीब 300 से अधिक शिकायतों में से रेरा द्वारा 55 शिकायतों पर कुर्की के आदेश जारी किए जा चुके हैं और करीब एक सैकड़ा शिकायतों पर सुनवाई के आधार पर वसूली का नोटिस भी जारी किया जा चुका है, लेकिन यह सब कागजों तक ही सीमित है। यही वजह है कि इतना सबकुछ होने के बाद भी आकृति बिल्डर्स अपने रसूख की दम पर प्रशासन पर तो भारी पड़ ही रहा है साथ ही लोगों के पैसे लौटाने को भी तैयार नहीं है। ऐसे मामलों में वह प्रशासन और सरकार को गुमराह कर लोगों को परेशान करने में लगा हुआ है।

नहीं वसूल पा रहा जिला प्रशासन दो करोड़ रुपये
ऐसा नहीं कि आकृति बिल्डर आम आदमी के ही पैसे को दबाए हुए है, बल्कि वह जिला प्रशासन के भी दो करोड़ रुपए दबा कर बैठा हुआ है। जिला प्रश्यासन को यह राशि आकृति बिल्डर्स से प्रीमियम और भू-भाटक के रूप में लेना है। इसके लिए कोलार तहसीलदार संतोष मुदगल उन्हें नोटिस भी जारी कर चुके हैं, लेकिन अब तक इस बिल्डर द्वारा फूटी कौड़ी भी जमा नहीं कराई गई है। इसके अलावा अलग-अलग शिकायतों के आधार पर रेरा भी इस बिल्डर को 55 व्यक्तियों को 6 करोड़ 31 लाख, 32 हजार रुपए लौटने का नोटिस दे चुका है, लेकिन इसका भी उस पर कोई असर नहीं हो रहा है।

अब नए प्रोजेक्ट की नहीं मिलेगी आकृति बिल्डर को अनुमति
तमाम आश्वसन और शपथपत्रों में प्रशासन से किए गए वादों पर भी आकृति बिल्डर द्वारा उन्हें पूरा नहीं किया गया है। इस मामले में प्रशासन के सामने अब तक ऐसे डेढ़ हजार लोगों के नाम सामने आ चुके हैं, जो बीते दो दशक से इस बिल्डर के जाल में उलझकर अपनी पूंजी से हाथ धो बैठे हैं। प्रशासन व रेरा के इस मामले में आदेशों का लगातार पालन नहीं करने की वजह से अब जिला प्रशासन ने नगर निगम भोपाल को पत्र लिखकर इस बिल्डर को किसी भी नए प्रोजेक्ट की अनुमति न देने के लिए पत्र दिया है।  

हो रही बुजुर्गों की फजीहत
पांच दर्जन से अधिक सीनियर सिटीजन सालों से इस बिल्डर के चक्कर काटने को मजबूर बने हुए हैं। इन सभी ने अपनी जीवन भर की पूंजी देकर मकान बुक किए थे। एजी8 ग्रुप के चैयरमैन ने नेस्ट के मेंटनेंस व अन्य सभी सुविधाओं के लिए 350 रुपए प्रति वर्गफीट राशि भी वसूली, जो कि आकृति सीनियर सिटीजन होम्स दी नेस्ट ट्रस्ट के खाते में जमा की जानी थी, लेकिन उसे जमा करने की जगह एजी8 के चेयरमैन व डायरेक्टर द्वारा उसका उपयोग स्वयं के लिए किया जा रहा है। जबकि इस राशि को ट्रस्ट के बैंक खाते में जमा कराकर उसके ब्याज से प्राप्त राशि से सीनियर सिटीजन के लिए बने नेस्ट के मेंटनेंस का काम किया जाना था। इस राशि के जमा न होने से सीनियर सिटीजन के स्वास्थ्य, सुरक्षा, खानपान एवं मूलभूत सुविधाओं के प्रबंधन पर संकट बन गया है।

एक साल में तीन बार दिया शपथपत्र
खास बात यह है कि बिल्डर के खिलाफ की गई शिकायतों पर सुनवाई के दौरान तीन बार शपथपत्र देकर जल्द ही आधे अधूरे मकानों को पूरा कर उन्हें संबंधित लोगों को देने का आश्वासन दिया गया , लेकिन इसके बाद भी न तो कोई भी निर्माण कार्य पूरा किया गया और न ही किसी को मकान का आधिपत्य ही दिया गया। बीते साल इस तरह के शपथ पत्र तीन मार्च, 6 अक्टूबर और 8 दिसंबर को तहसीलदार के न्यायालय में दिए गए हैं।  इसके बाद भी किसी भी मकान क्रेता को मकान का काम पूरा कर आधिपत्य नहीं दिया गया है। खास बात यह है कि दो साल पहले 26 अगस्त 2019 को भी तहसील न्यायालय को बिल्डर द्वारा लिखित में बताया गया था कि दो माह में निर्माण पूरा कर आधिपत्य दे दिया जाएगा।

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