मध्य प्रदेश भाजपा में विकसित हुए पांच पॉवर सेंटर

Five power centers developed in Madhya Pradesh BJP

प्रदेश की राजनीति में लगातार बदलते समीकरण

भोपाल/हृदेश धारवार/बिच्छू डॉट कॉम। कैडर बेस्ड पार्टी कही जाने वाली भारतीय जनता पार्टी में अब मास (समूह) आधारित लीडरशिप उभरकर सामने आने लगी है। राष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की जोड़ी मास (समूह) का प्रतिनिधित्व कर रही है। ठीक उसी तरह मध्यप्रदेश भाजपा में भी 5 पॉवर सेंटर विकसित हुए हैं। जिनका संगठन से इतर अपना स्वयं का जनाधार है। जिसमें मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम शामिल हैं। मध्यप्रदेश में एक समय था जब शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर और अरविंद मेनन की तिकड़ी का बोलबाला था। 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव में इस तिकड़ी की सफल रणनीति की वजह सफलता मिली थी। शिवराज सिंह चौहान 2005 से 2018 तक लगातार 13 साल तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।
इसके बाद भी उनके व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया। शिवराज सिंह पिछड़ा वर्ग का एक बड़ा चेहरा हैं। मध्यप्रदेश में पिछड़े वर्ग की आबादी 55 फीसदी है। वे पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। विनम्र , सहज और सरल स्वभाव की वजह से वे आज भाजपा में सर्वमान्य नेता हैं। यही वजह है कि प्रदेश में कमलनाथ सरकार के गिर जाने के बाद उन्हें फिर से मुख्यमंत्री बनाया गया। किसान पुत्र होने के नाते उन्होंने किसानों का दर्द भलीभांति समझा और उनके हित की योजनाएं बनाई।

नरेंद्र सिंह तोमर खामोशी से बने लोकप्रिय
केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह अपनी खामोशी की वजह से आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुड लिस्ट में 5वें नम्बर के नेता बने हुए हैं। वे 2014 से लेकर अभी तक मोदी कैबिनेट में महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। नरेंद्र सिंह तोमर ने ग्वालियर- चंबल में छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत की। वे प्रदेश में क्षत्रीय नेता के रूप में स्थापित हो चुके हैं। 2 बार मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। इस वजह से प्रदेश में उनका अपना एक जनाधार है। नरेंद्र सिंह तोमर कभी किसी विवादित विषय पर बयान नहीं देते। वे मुश्किल समय मे भी खामोशी से अपना काम करते रहते हैं। यही वजह है आज प्रदेश व देश मे कोई उनका विरोधी नहीं हैं। इसलिए तोमर सर्व स्वीकार्य और पवार सेंटर बनकर उभरे हैं।

विजयवर्गीय की आक्रामकता ही उनकी पहचान
भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में दुसरी बार महासचिव बने कैलाश विजयवर्गीय अपनी आक्रामकता से मालवांचल में एक बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। दुसरी बार महामंत्री बनने के बाद पहली बार भोपाल आगमन पर उनके समर्थकों कैलाश विजयवर्गीय का गर्मजोशी से स्वागत किया। पूरा शहर कैलाश विजयवर्गीय के होर्डिंग से पटा दिया। कैलाश विजयवर्गीय वैश्य समाज का प्रतिनिधित्व भी करते हैं आज वे वैश्य समाज का एक बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। कैलाश विजयवर्गीय मूल रूप से इंदौर के रहने वाले हैं। इंदौर में पार्षद से लेकर महापौर तक रहे हैं और शिवराज सरकार में मंत्री भी रहे। बीजपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह के करीबी रिश्तों के चलते उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी में स्थान दिया गया। कैलाश विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल के प्रभारी हैं वहां कम्युनिष्ट विचारधारा से लड़ाई लड़ते हुए भाजपा की सरकार बनाना उनके लिए बड़ी चुनौती है।

वीडी शर्मा के नेतृत्व पर संघ ने जताया भरोसा
छात्र राजनीति से सक्रिय राजनीति की दहलीज पर कदम रखने वाले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा संघ की पहली पसंद हैं। संगठन में काम करने के उनके अनुभव को देखते हुए यूथ लीडरशिप विकसित करने के लिए वीडी शर्मा को प्रदेश अध्यक्ष पद की कमान सौंपी है। वीडी शर्मा ब्राह्मण चेहरे के रूप में उभरकर सामने आए हैं। वीडी शर्मा युवाओं के लिए वीडी भाईसाहब के रूप में पहचाने जाते हैं। वीडी शर्मा नेहरू युवा केन्द्र के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे हैं। इसके अलावा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में अलग अलग संभाग के संगठन मंत्री रहे हैं। पूरे प्रदेश युवा की सबसे बड़ी टीम आज वीडी शर्मा के पास है। वीडी शर्मा अपने काम से आज भाजपा में पावर सेंटर बन चुके हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया बने मराठा चेहरा
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर – चम्बल का एक बड़ा चेहरा हैं। सिंधिया घराने की रियासत ग्वालियर -चम्बल के अलावा मालवा के कुछ क्षेत्रों में रही है। राष्ट्रीय स्तर पर यदि बात की जाए तो भाजपा के पास सिंधिया के बराबर कद कोई नेता नहीं है। सिंधिया कांग्रेस की सरकार में केंद्र में मंत्री रह चुके हैं। कंग्रेस लगातार हो रही उपेक्षा से नाराज होकर सिंधिया अपने 22 विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए। सिंधिया भी युवाओं में बेहद लोकप्रिय हैं। ग्वालियर – चम्बल में उनका स्वयं का जनाधार हैं। सिंधिया के जनाधार के दम पर ही भाजपा मध्यप्रदेश में सरकार बनाने का दंभ भर रही है। मध्यप्रदेश की 28 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव में सिंधिया की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है।

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