भोपाल ननि में बिगड़े समीकरण महिलाओं का होगा बोलबाला

भोपाल/राजीव चतुर्वेदी//बिच्छू डॉट कॉम। भोपाल नगर निगम का आगामी चुनाव बड़ा दिलचस्प होगा। इस बार परिषद में 42 महिला और 43 पुरुष पार्षद चुने जाएंगे। वहीं ज्यादातर बड़े नेताओं को अपना वार्ड बदलना पड़ेगा। आरक्षण की वजह से पिछली महापौर परिषद के ज्यादातर सदस्यों को नए वार्ड से ही मैदान में उतरना पड़ेगा। इनमें केवल मिश्रा, महेश मकवाना, दिनेश यादव, शंकर मकोरिया, भूपेंद्र माली, मोहम्मद सगीर, गिरीश शर्मा, अमित शर्मा, सुरजीत सिंह चौहान, योगेंद्र चौहान उर्फ गुड्डू आदि शामिल है। अब इन नेताओं को ना केवल चुनाव लड़ने के लिए नए वार्ड तलाशना होंगे बल्कि चुनाव जीतने की भी चुनौती रहेगी। कुछ तो अपनी पत्नियों को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे हैं। कुछ पूर्व पार्षद तो ऐसे भी हैं जिनका इस बार चुनाव लड़ने का सपना पूरा नहीं हो पाएगा। उत्तर विधानसभा में उलटफेर होने से आरिफ अकील के सामने संकट खड़ा हो गया है। वहीं नरेला, गोविंदपुरा और मध्य विधानसभा के वार्डो में भी काफी उलटफेर हुआ है। इसमें जो वार्ड पहले महिला थे वह पुरुष हो गए हैं।

इन नेताओं को पड़ेगा फर्क
वार्ड 51 से पार्षद रहे और नगर परिषद के अध्यक्ष रहे डॉ सुजीत सिंह चौहान को पार्षद का चुनाव लड़ने के लिए अब किसी दूसरे वार्ड की खोज करनी होगी या फिर अपनी पत्नी को चुनावी मैदान में उतारना होगा। इसी तरह वार्ड 23 महिला पिछड़ा वर्ग आरक्षित हो जाने से यहां से पार्षद रहे रफीक कुरैशी भी अब इस वार्ड से पार्षद चुनाव में उम्मीदवारी नहीं कर सकेंगे। अब रुख करते हैं कोलार की तरफ, कोलार में भी आरक्षण प्रक्रिया से कइयों का गणित बिगड़ गया है। कोलार के 5 वार्ड 80, 81, 82, 83 और 84 में कई नेताओं का चुनाव लड़ने का सफर टूटता नजर आ रहा है। वार्ड 80 अनारक्षित पुरुष था। यहां से ओबीसी की रविंद्र यति पार्षद थे। अब यह वार्ड महिला ओबीसी हो गया है। वार्ड 81 से एससी वर्ग के पवन बोराना पार्षद थे। अब यह वार्ड एससी महिला हो गया है। वार्ड 82 पहले अनारक्षित पुरुष था। यहां से ओबीसी के भूपेंद्र माली पार्षद थे। अब यह वार्ड ओबीसी महिला हो गया है। इसी तरह वार्ड 83 पहले ओबीसी महिला था और मनफूल मीणा यहां से पार्षद थी। अब इस वार्ड के ओबीसी पुरुष होने से उनके पति श्याम मीणा कांग्रेसी दावेदारी कर सकते हैं। कोलार का ही वार्ड 84 पहले ओबीसी पुरुष था जो अब अनारक्षित महिला हो गया है। यहां का वार्ड 83 ओबीसी मुक्त हो होने से रविंद्र यति, भूरा लाल माली, मंजीत सिंह मारण, और कामता प्रसाद पाटीदार दावेदारी पेश कर सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो यहां चुनाव काफी दिलचस्प होगा।
ननि वार्ड आरक्षण एक नजर में: भोपाल नगर निगम के 85 वार्डों में से 42 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें से 24 अनारक्षित 11 अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), 6 अनुसूचित जाति (अजा) और एक वार्ड अनुसूचित जनजाति (अजजा) महिला के लिए आरक्षित किया गया है।

कोलार में देखने को मिलेगा महिला पार्षदों का दबदबा
निकाय चुनाव के पूर्व आरक्षण प्रक्रिया से यह तो स्पष्ट हो गया है कि कोलार में अब आगामी 5 सालों तक महिला पार्षदों का दबदबा देखने को मिलेगा। दरअसल कोलार के 6 में से 5 वार्ड महिलाओं के खाते में चले गए हैं। वार्ड 83 ओबीसी मुक्त हो गया है। दूसरी तरफ के बड़े नेताओं के वार्ड भी महिलाओं के खाते में चले गए हैं। इसमें नेता प्रतिपक्ष रहे मोहम्मद सगीर, योगेंद्र गुड्डू चौहान व अन्य लोग शामिल है।

अनारक्षित वार्ड एक नजर में
वार्ड नंबर 1, 4, 5, 6, 12, 13, 15, 19, 22, 24, 29, 34, 39, 40, 41, 42, 44, 54, 55, 58, 62, 66, 69, 70, 73 और 78 नंबर वार्ड शामिल है।
24 वार्ड अनारक्षित महिला वार्ड: 2, 3, 7, 14, 17, 20, 21, 32, 33, 35, 38, 43, 46, 51, 52, 56, 64, 68, 71, 74, 75, 79, 84 और वार्ड 85
ओबीसी के लिए 21 वार्ड
जिनमें 10 वार्ड मुक्त हैं: 9, 16, 18, 25, 30, 36, 57, 72, 77, और 83
ओबीसी के 11 वार्ड महिलाओं के लिए: 8, 23, 27, 31, 37, 45, 61, 65, 67, 80 और 82
अजा के लिए ये 12 वार्ड आरक्षित: अजा मुक्त वार्ड 28, 48, 49, 53, 63 और 76
अजा महिला वार्ड 10, 11, 47, 50, 59 और 81
इसके अलावा दो वार्ड 26 और 60 अजजा के लिए आरक्षित किए गए हैं।

आरक्षण प्रक्रिया से इन्हें नहीं पड़ा फर्क
उल्लेखनीय है कि इनमें कुछ नेता ऐसे भी हैं जिन्हें नगर निगम की वार्ड आरक्षण प्रक्रिया से कोई फर्क नहीं पड़ा। इनमें पार्षद रही राजकुमारी मीना, संतोष कंसाना, तुलसा वर्मा और शाबिस्ता सुल्तान शामिल हैं। वार्ड एक अनारक्षित मुक्त होने से यहां से पार्षद रही राजकुमारी दोबारा चुनाव लड़ सकती हैं या फिर उनके पति भी दावेदारी पेश कर सकते हैं। वार्ड 24 अनारक्षित मुक्त हो जाने से यह से पार्षद शाबिस्ता सुल्तान या उनके पति कोई भी चुनाव लड़ सकते हैं। पहले यह वार्ड ओबीसी महिला था। तुलसा वर्मा का वार्ड 73 पहले अनारक्षित महिला था लेकिन अब अनारक्षित मुक्त हो जाने से तुलसा को उसी वार्ड से चुनाव लड़ने में कोई दिक्कत नहीं होगी। इसी तरह वार्ड 29 से पार्षद रही संतोष कंसाना और उनके पति दोनों ही इस वार्ड से पार्षद का चुनाव लड़ सकते हैं उनका वार्ड आरक्षण मुक्त हो गया है।

ननि अध्यक्ष की दौड़ वाले ये नेता ढूंढेंगे विकल्प
आगामी समय में होने वाले निकाय चुनाव के बाद नगर निगम अध्यक्ष बनने के लिए कांग्रेसी नेता मोहम्मद सगीर, गिरीश शर्मा, प्रदीप मोनू सक्सेना, महेश मकवाना, अमित शर्मा और केवल मिश्रा अपनी दावेदारी कर सकते थे, लेकिन वार्ड आरक्षण के बाद इनकी उम्मीदों पर जवर्दस्त झटका लगता दिखाई दे रहा है। अब इन सभी नेताओं को चुनाव जीतने और दोबारा पार्षदी पाने के लिए अन्य कोई वार्ड में जाकर मेहनत करनी होगी और फिर वहां से चुनाव भी जीतना होगा।


इन नेताओं को तलाशने होंगे नए विकल्प
कृष्ण मोहन सोनी- एमआईसी सदस्य रहे वरिष्ठ पार्षद सोनी पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। ऐसे में उनका वार्ड दो अनारक्षित महिला होने से उन्हें फर्क नहीं पड़ेगा। हालांकि इस सीट से उनकी पत्नी को चुनाव लड़ा सकते हैं। यदि सोनी स्वयं चुनाव लड़ेंगे तो उन्हें अन्य वार्ड का रुख करना पड़ेगा।
सुरजीत सिंह चौहान- नगर निगम अध्यक्ष रहे सुरजीत सिंह का वार्ड 51 पहले ओबीसी मुक्त था अब वह अनारक्षित महिला हो गया है। सुरजीत अब यहां से चुनाव नहीं लड़ सकेंगे
गिरीश शर्मा- गोविंदपुरा से विधानसभा चुनाव लड़े गिरीश शर्मा को अब पार्षद के लिए दूसरा पाठ तलाशना होगा अब उनका वार्ड ओबीसी महिला हो गया है।
मोहम्मद सगीर- नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष रहे मोहम्मद सगीर वार्ड 43 से अब चुनाव नहीं लड़ सकेंगे उनका वार्ड अब अनारक्षित महिला हो गया है वे अपनी पत्नी को चुनाव लड़ा सकते हैं या वे किसी दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ सकते हैं।
अमित शर्मा- सक्रिय कांग्रेस नेता और वार्ड 31 से पार्षद रहे अमित शर्मा को भी इस बार चुनाव लड़ने के लिए नया वार्ड तलाशना होगा। इसलिए कि उनका वार्ड ओबीसी के खाते में चला गया है।
केवल मिश्रा- एमआईसी सदस्य रहे केवल मिश्रा नगर निगम अध्यक्ष की दौड़ में थे लेकिन अब उन्हें वार्ड 56 को छोड़ना होगा यह बाढ़ अनारक्षित महिला हो गया है वार्ड 58 कस्तूरबा नगर से चुनाव लड़ सकते हैं
महेश मकवाना- एमआईसी सदस्य वार्ड तीन बार से पार्षद महेश मकवाना को भी अब नया भाग तलाशना होगा यह अनुसूचित जाति महिला के खाते में चला गया है।
शंकर मकोरिया- एमआईसी सदस्य को भी पार्षद की कुर्सी पाने वार्ड बदलना होगा क्योंकि वार्ड 33 अनारक्षित महिला हो गया है।
प्रदीप मोनू सक्सेना- वार्ड 27 से पार्षद रहे सक्सेना का वार्ड ओबीसी महिला हो जाने से अब उन्हें नया वार्ड ढूंढना होगा।
योगेंद्र चौहान गुड्डू- वार्ड 40 से पार्षद रहे योगेंद्र और गुड्डू चौहान को भी अपनी सीट बदलनी होगी अब उनका बार्ड अनारक्षित महिला हो गया है अपने को भी चुनाव लड़ सकते हैं।
मनोज राठौर- वार्ड 7 पहले ओबीसी से मुक्त था। अब अनारक्षित महिला हो जाने से अब राठौर अपनी पत्नी को चुनाव लड़ा सकते हैं। यदि मनोज को चुनाव लड़ना है तो दूसरा वार्ड ढूंढ़ना होगा।
आशा जैन- एमआईसी सदस्य और वार्ड पार्षद आशा जैन भी अब चुनाव नहीं लड़ सकेंगी। उनका वार्ड अब ओबीसी मुक्त हो गया है।
मोहम्मद सऊद- वार्ड 8 महिला के खाते में जाने से निर्दलीय पार्षद रहे मोहम्मद सऊद को यदि चुनाव लड़ना है तो दूसरे वार्ड का रुख करना पड़ेगा।
सुरेंद्र वाडिका- सुरेंद्र को भी अपना वार्ड 64 बदलना होगा। हालांकि इस सीट से वे अपनी पत्नी को चुनाव लड़ा
सकते हैं।

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