महंगाई डायन खाए जात है…

Inflation witch is eaten ..

– महंगी खाद्य सामग्री ने बिगाड़ा रसोई का बजट
मध्यमवर्गीय परिवारों की टूट रही सर्वाधिक आर्थिक रुप से कमर
भोपाल/प्रणव बजाज/बिच्छू डॉट कॉम। कोरोना और लॉकडाउन की वजह से पहले ही आमदनी में नुकसान झेल रहे लोगों को पेट्रोल -डीजल और रसोई गैस की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी को बेहद परेशान कर रखा है, ऐसे में खाद्य सामग्री की कीमतों में हो रही बेतहाशा वृद्धि ने भी आम आदमी की आर्थिक रुप से कमर ही तोड़ दी है। पिछले महीने प्याज, दाल, खाने के तेल सहित मसालों के दामों में बेहद वृद्धि हुई है। इसकी वजह से आम लोगों के रसोई का पूरा बजट ही बिगड़ चुका है।
इसकी वजह से अब लोगों द्वारा खाद्य सामग्रियों की खरीद में कटौती करने की मजबूरी बन चुकी है। हालत यह हो गई है कि अब जनता महंगाई को लेकर त्राहिमाम करने लगी है। इसके बाद भी केन्द्र हो या राज्य सरकार बढ़ती महंगाई को काम करने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है। दरअसल सरकार इस मामले में मस्त है और जनता त्रस्त है। इस महंगाई का सर्वाधिक असर मध्यमवर्गीय लोगों पर पड़ा है। यह वो वर्ग है जिसकी चिंता न तो केन्द्र सरकार करती है और न ही राज्य सरकार। अगर  पेट्रोल -डीजल और रसोई गैस के दामों में इसी तरह की वृद्धि जारी रही तो महंगाई का बढ़ना आगे भी जारी रहना तय है, जिसकी वजह से लोगों की सहनशीलता जबाब दे सकती है।
खादय सामग्री की बात करें तो प्याज के दामों में ही एक माह में तीस फीसद तक की वृद्धि हो चुकी है। लगभग यही हाल खाद्य तेल का भी है। दालों के भाव तो पहले से लोगों को परेशान कर रहे हैं।  तुअर की दाल में भी प्याज की ही तरह एक माह में 20 फीसद तक की वृद्धि हो चुकी है, जबकि अन्य दालों के भावों में भी इसी अवधि में 15 फीसद तक की वृद्धि देखी जा रही है।  खास बात यह है कि रसोई में सर्वाधिक उपयोग होने वाले रिफाइंड, सरसों का तेल या फिर डालडा आदि के दाम तो डेढ़ गुना तक बढ़ चुके हैं। इसकी वजह से इनके दाम अब तक की सर्वाधिक कीमत में मिल रहे हैं। तेल विक्रेता उमाशंकर का कहना है कि  सोयाबीन तेल की कीमत कुछ समय पहले 95 रुपए प्रति लीटर थी, अब वही 140 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है। सरसों का तेल भी 150 रुपए किलो हो चुका है। कोई भी दाल हो सभी में 15 से लेकर 25 रुपए किलो तक की कीमत बढ़ चुकी है।
प्याज के दाम निकाल रहे हैं आंसू
बीते एक माह से प्याज की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। हालत यह है कि इन दिनों बाजार में एक किलो प्याज की कीमत 40 रुपए किलो तक बनी हुई है। यह बात अलग है कि मंडी में वही प्याज 20 से लेकर 22 प्रति किलो तक बनी हुई है। खास बात यह है कि यह हाल ऐसी स्थिति में है जब नई प्याज का आना शुरू हो चुका है। बताया जा रहा है कि अभी आवक कम होने की वजह से इसके दामों में कमी नहीं आ रही है। प्याज के एक थोक विके्रता के मुताबिक स्थानीय प्याज कम आ रही है। यह प्याज भी कानपुर, लखनऊ, हैदराबाद आदि जगहों पर निर्यात की जा रही है, जिसकी वजह से उसके दामों में तेजी बनी हुई है।
रसोई गैस भी हुई महंगी
सोमवार को ही रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में 25 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। भोपाल में बिना सब्सिडी वाला एलपीजी सिलेंडर अब 25 रुपए महंगा होकर 825 रुपए हो गया है, पहले ये 800 रुपए था। 2021 में ही रसोई गैस सिलेंडर 125 रुपए महंगा हुआ है। फरवरी में घरेलू सिलेंडर के दाम 3 बार बढ़े थे। सरकार ने 4 फरवरी को एलपीजी के दाम में 25 रुपए का इजाफा किया था। उसके बाद 15 फरवरी को 50 रुपए और 25 फरवरी को 25 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी। अब 1 मार्च को फिर से सिलेंडर 25 रुपए महंगा हो गया है।
पेट्रोल डीजल के दाम बड़ा कारण  
पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। डीजल के महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन लागत में भारी वृद्धि हो रही है। इसका असर सब्जी से लेकर अन्य खाद्य सामग्री के दामों पर भी पड़ रहा है। अगर कुछ दिन डीजल के दामों की यही स्थिति रही तो भाड़ा में 15 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी होना तय है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा।
यह बन चुके हैं हालात
मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट पूरी तरह से महंगाई ने बिगाड़ कर रख दिया है। इस वजह से लोगों ने रोजमर्रा के सामानों में कटौती शुरू कर दी है। हालत यह है कि पहले पूरे माह का राशन एक साथ खरीदा जाता था, जो अब अत्यावश्यक होने पर फुटकर ही खरीदा जा रहा है।
सर्वाधिक बुरे हाल मध्यमवर्गीय
मध्यमवर्गीय परिवारों के बुरे हाल बने हुए हैं। यह वो वर्ग है जिसे न तो सरकार कोई मदद या रियायत देती है और न ही केन्द्र सरकार। यही नहीं सरकारी योजनाओं में भी इस वर्ग की पूरी तरह से उपेक्षा की जाती है, जबकि यही वह वर्ग है जो करों के भुगतान में सबसे अधिक ईमानदार रहता है। कोरोना कॉल में भी इसी वर्ग को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा है।

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