अरे ये क्या! 14 जिलों में पेट्रोल-डीजल की घटी बिक्री

Hey what Reduced sale of petrol and diesel in 14 districts

भोपाल/राकेश व्यास/बिच्छू डॉट कॉम। महंगाई के इस दौर में भी मध्यप्रदेश सरकार आम आदमी की पेट्रोल-डीजल के दामों के बहाने जेब काटने की जिद छोड़ने को तैयार नहीं है। अब यही जिद सरकार के खजाने पर भारी पड़ने लगी है। हालात यह है कि प्रदेश के सीमावर्ती 14 जिलों में पेट्रोल-डीजल की 30 फीसदी बिक्री घट गई है, जिससे सरकार  के खजाने को अब तक 1600 करोड़ रुपए की चपत लग चुकी है। अब इन जिलों के वाहन चालक आस पड़ोस के दूसरे राज्यों के पेट्रोल पंपों से ही पेट्रोल-डीजल ले रहे हैं। इसके अलावा अन्य राज्यों से मप्र होकर जाने वाले बड़े व भारी वाहन चालकों ने भी प्रदेश से पेट्रोल-डीजल लेने से पूरी तौबा कर ली है। अगर यही हालात रहे तो सरकार को हर माह सैकड़ों करोड़ रुपए का नुकसान होना तय है। दरअसल मप्र ऐसा राज्य है, जहां पर अन्य राज्यों की तुलना में पेट्रोल-डीजल पर सार्वधिक कर वसूला जाता है। इसकी वजह से मप्र में सबसे अधिक महंगे दामों पर पेट्रोल-डीजल मिलता है। खास बात यह है कि मप्र में यह हाल तब हैं, जब यूपीए सरकार में मामूली दाम बढ़ने पर तत्कालीन प्रदेश की पूरी सरकार सड़कों पर आ जाती थी। लेकिन अब प्रदेश और देश दोनों जगहों पर भाजपा की ही सरकार है लेकिन इसके बावजूद भी जनता को र्इंधन की बढ़ती कीमतों से कोई राहत नहीं मिल रही है। यही नहीं इसके उलट प्रदेश सरकार पूर्व में तमाम करों में वृद्धि कर चुकी है। दरअसल जनता की मजबूरी भी है कि रोजी-रोटी कमाने के प्रयास में उसे पेट्रोल-डीजल का ईंधन इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिसकी वजह से उसकी जेब कट रही है।  मप्र के दो पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र के मुकाबले मप्र में पेट्रोल-डीजल बहुत महंगा है। इसी वजह से प्रदेश के वे लोग जो उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा के पास रहते हैं, वे यूपी और महाराष्ट्र के पेट्रोल पम्पों से ही र्इंधन अपनी गाड़ियों में डलवा रहे हैं। इससे उन्हें प्रति लीटर करीब 10 से 11 रुपए की बचत हो रही है। प्रदेश के ऐसे जिलों की संख्या 14 है। मप्र में यूपी-महाराष्ट्र की तुलना में पेट्रोल प्रति लीटर 10 से 11 रुपए तक महंगा है। इसी तरह से राजस्थान में भी मप्र की तुलना में प्रति लीटर दो से तीन रुपए तक दाम कम हैं। मप्र में यूपी, महाराष्ट्र से अधिक पेट्रोल-डीजल के दाम होने की बड़ी वजह है यहां पेट्रोल पर 6.2 प्रतिशत और डीजल पर 5.52 प्रतिशत वैट अधिक लगना है। उप्र में पट्रोल पर 26.8 प्रतिशत ही वैट है तो एमपी में सेस मिलाकर 39 प्रतिशत वैट लगता है। यही हाल डीजल का भी है। मप्र में डीजल पर सेस मिलाकर 28 प्रतिशत तो उप्र में 17.48 प्रतिशत ही वैट लगता है।
इन 14 जिलों में कम हुई बिक्री
मप्र के जिन जिलों में पेट्रोल-डीजल की बिक्री में तेजी से कमी आ रही है उनमें रीवा, सतना, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, दतिया , भिंड, मुरैना, ग्वालियर, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, छिंदवाड़ा, बालाघाट शामिल हैं।  इन 14 जिलों में करीब 2000 पेट्रोल पंप हैं। यही नहीं मप्र का निवाड़ी जिला मुख्यालय ऐसा है जो चारों तरफ से उप्र की सीमा से लगा हुआ है , जिसकी वजह से यहां पर एक भी पेट्रोल पंप नहीं है। यहां पहले जो पेट्रोल पंप था , वह भी बिक्री न होने की वजह से बंद हो चुका है। अगर सरकार प्रदेश में वैट कम कर उसकी कीमत इन राज्यों के बराबर कर दे तो करीब तीन सौ फीसदी की वृद्धि हो जाएगी। इससे इन जिलों से सरकार के राजस्व में 1600 से 1700 करोड़ रुपए तक की आय में वृद्धि हो सकती है। फिलहाल इन जिलों से 6 से 7 हजार करोड़ रुपए का ही राजस्व मिल पा रहा है।
ईंधन से सरकार को होती है 11 हजार करोड़ की आय  
मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह के मुताबिक प्रदेश में करीब 42 सौ पेट्रोल पंप हैं। इनसे राज्य सरकार को सालाना 11 हजार करोड़ रुपए की आय होती है, लेकिन यहां पेट्रोल-डीजल के दाम अधिक होने से सरकार को कम राजस्व मिल पा रहा है अगर सरकार पड़ोसी राज्यों के मुकाबले ईंधन के भाव का अंतर कम कर दे, तो प्रदेश सरकार की आय में 1600 से 1700 करोड़ रुपए की वृद्धि हो सकती है।
भोपाल में यह है खपत
राजधानी में 126 और पूरे मध्यप्रदेश में 4200 पेट्रोल पंप संचालित हैं, भोपाल में हर रोज डीजल की खपत 12 लाख लीटर और पेट्रोल की खपत साढ़े 9 लाख लीटर की है। पेट्रोल-डीजल के दामों में हुई वृद्धि की वजह से प्रदेश के आधे पेट्रोल पंप प्रीमियम पेट्रोल-डीजल से ड्राय हो गए हैं। भोपाल में प्रीमियम पेट्रोल के दाम 1 सौ 2 रुपए 26 पैसे और प्रीमियम डीजल के 92 रुपए 57 पैसे हैं। जबकि साधारण पेट्रोल 98 रुपए 58 पैसे और डीजल 89 रुपए 21 पैसे प्रति लीटर हैं।
केंद्र द्वारा की जा रही कर वसूली
केंद्र सरकार हर लीटर पेट्रोल पर 1.40 प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी, अतिरिक्त विशेष एक्साइज ड्यूटी 11 रुपए, कृषि व बुनियादी संरचना विकास सेस 2.50 रुपए और अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी के रूप में सड़क व बुनियादी संरचना के लिए 18 रुपए वसूल रही है। यह समस्त राशि पेट्रोल की कीमत से तय होती है।

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