गेंहू के बाद अब मप्र धान खरीदी का रिकार्ड तोड़ने को तैयार

After wheat, now MP is ready to break the record of paddy purchase
  • कृषि कैबिनेट के माध्यम से किसानों से जुड़े मामलों में हो रहे फैसले तेजी से
    भोपाल/हृदेश धारवार/बिच्छू डॉट कॉम।
    गेहूं उत्पादन में देश में सिरमौर रहे पंजाब को पीछे छोड़ने के बाद अब मध्य प्रदेश धान के मामले में भी पंजाब को पीछे छोड़ने को तैयार दिख रहा है। इसके चलते इस बार प्रदेश में धान खरीदी का पुराना रिकार्ड टूटना तय माना जा रहा है। मप्र में बीते साल सर्वाधिक धान की खरीदी 25.86 लाख टन की हुई थी। इसकी तुलना में इस बार 40 लाख टन खरीद का अनुमान लगाया गया है। प्रदेश में दरअसल, बीते कुछ सालों में कृषि क्षेत्र में तेजी से बदलाव आए हैं। इसकी वजह है प्रदेश की भाजपा सरकार के दौरान कृषि कैबिनेट जैसे कदम उठाए जाना। इसकी वजह से ही प्रदेश में कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार होने से अच्छे नतीजे आ रहे हैं। यही नहीं मप्र देश का ऐसा पहला राज्य है जिसे लगातार केन्द्र का सात बार कृषि कर्मण अवार्ड मिला है। सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र के लिए अलग से कृषि बजट की भी व्यवस्था की गई है। पूरे प्रदेश में इस बार अभी से धान की खरीदी शुरू कर दी गई है। नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों के मुताबिक अब तक रिकॉर्ड खरीद 25.86 लाख टन पिछले साल हुई थी। इस बार इसके 40 लाख टन तक पहुंचने के आसार हैं। इसके पहले 129 लाख टन से ज्यादा गेहूं खरीदकर मध्यप्रदेश पंजाब को भी पीछे छोड़ चुका है। मध्यप्रदेश को सात बार केंद्र सरकार कृषि कर्मण अवॉर्ड समग्र उत्पादन, गेहूं उत्पादन से लेकर कृषि विकास दर को लेकर मिल चुका है।
    यह भी है वजह
    प्रदेश में प्राकृतिक आपदा में प्रभावित फसलों के लिए तय मुआवजा राशि में वृद्धि करना हो या फिर सिंचाई के लिए खराब ट्रांसफार्मर बदलने के लिए प्रावधान करने हो या फिर उपज का वाजिब दाम नहीं मिलने पर भावांतर देना हो। इन सभी मामलों में कृषि कैबिनेट में विचार-विमर्श के बाद रणनीति बनाई गई है। यह भी वजह है कि अब गेंहू के बाद मप्र अब बासमती धान के उत्पादन का बड़ा केंद्र बन चुका है। हालांकि, पंजाब सहित अन्य राज्य मध्यप्रदेश को धान उत्पादक भौगोलिक क्षेत्र में शामिल होने से रोकने के लिए भरपूर प्रयासरत हैं।

    इनका कहना है

    प्रदेश के किसानों के साथ किसी भी हाल में अन्याय नहीं होगा। यही वजह है कि बासमती धान की मान्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की जा चुकी है। शिव सरकार में कृषि कैबिनेट के माध्यम से किसानों से जुड़े मामलों में तेजी के साथ फैसले पहले भी लिए गए हैं और आगे भी लिए जाएंगे। मप्र में पैदा होने वाले शरबती गेहंू, पिपरिया की दाल, बालाघाट के चावल सहित अन्य उपजों का पेटेंट कराने के लिए दस्तावेजी प्रमाण तैयार कराए जा रहे हैं।
  • कमल पटेल, कृषि मंत्री मप्र शासन।

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