माफिया के बाद मामा को भांजियों की चिंता

After mafia, maternal uncle worries about nephew

भोपाल/प्रणव बजाज/बिच्छू डॉट कॉम। मामा यानि कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा माफिया से लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के बाद अब प्रदेश की बालिकाओं यानि भांजियों की नए चिंता शुरू कर दी गई है। इसके लिए उनके द्वारा आला अफसरों के साथ बैठकर महिला अपराधों पर रोक लगाने के लिए न केवल चिंतन मनन किया जा रहा है बल्कि, उनकी विवाह की उम्र में बदलाव को भी बहस का मुद्दा बनाने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। दरअसल चौहान अपनी इस चौथी पारी में बीते कुछ माह से विभिन्न माफियाओं पर कार्रवाई को लेकर बेहद सख्त बने हुए हैं। इसकी वजह से न केवल माफिया को जेल भेजा जा रहा है , बल्कि उनके द्वारा बनाई गई संपत्ति को भी तहस -नहस किया जा रहा है। इनमें भू माफिया , मिलावट करने वालों से लेकर ड्रग माफिया तक शामिल है। अब प्रदेश में माफिया के खिलाफ जारी कार्रवाई का असर भी तेजी से दिखना शुरू हो गया है। माफिया विरोधी कार्रवाई के बीच अब मुख्यमंत्री ने लड़कियों की विवाह आयु 18 से बढ़ाकर 21 साल करने की वकालत शुरू कर दी है। इससे अब एक नई बहस को जन्म दे दिया गया है। उनका कहना है कि वे इसे बहस का विषय बनाना चाहते हैं। यह बात उनके द्वारा प्रदेश से गायब हुई बालिकाओं के संबंध में उच्च स्तरीय बैठक में कही गई। इस दौरान उन्होंने बीते साल लॉकडाउन के दौरान अपै्रल से दिसंबर के बीच प्रदेश में कुल 7 हजार बच्चियों व युवतियों के लापता होने पर डीजीपी विवेक जौहरी को उनकी तलाश के लिए अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अन्य जिलों में काम करने वाली युवतियों का रिकॉर्ड का सिस्टम बनाएं, जिसमें वे शिकायत कर सकें। इसके साथ ही कार्य के जिले से बाहर जाने पर उनका रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने का भी सिस्टम तैयार किया जाए। इस दौरान बताया गया कि लापता 7 हजार युवतियों में से पुलिस ने करीब 4 हजार की तलाश कर ली है, जबकि 3 हजार का पता लगाया जाना है।
ब्लैकमेल करने वालों की करें पुलिस से शिकायत
मुख्यमंत्री ने इस दौरान आग्रह किया है कि कई बार लोग बेटियों का अश्लील वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करते रहते हैं , ऐसे लोगों से डरने की जगह पुलिस से शिकायत करें , मामा आपके साथ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब प्रदेश में महिलाओं के प्रति दूषित मानसिकता रखने वालों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आठ माह में अपराधियों के खिलाफ की जा रही सख्त कार्यवाही का परिणाम है कि अलग-अलग अपराधों में 15 से लेकर 50 प्रतिशत तक की कमी आई है। यही नहीं उन्होंने कहा कि अब अपहृत बच्चे की बरामदगी के लिए चैकलिस्ट के अनुसार कार्यवाही की जाएगी। इसके तहत परिजनों को एक रिकार्ड पत्र दिया जाएगा, जिसमें पुलिस की जारी विवेचना का पूरा विवरण होगा। इसमें यह भी बताया जाएगा कि कितने दिनों में कब क्या कार्यवाही की गई है।
इसके अलावा अपहृत बच्चे के परिजन के साथ प्रत्येक 15 दिन में थाना प्रभारी और प्रत्येक 30 दिन में एसडीओपी केस डायरी के साथ बैठेंगे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अधिकार पत्र के अनुसार कार्यवाही हुई है अथवा नहीं। मुख्यमंत्री ने विभिन्न तरह की हेल्पलाइन को एक करने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अभी प्रदेश में उमंग ऐप और हेल्पलाइन 1090 है। भारत सरकार का हेल्पलाइन नंबर 1090 है। अलग-अलग नबंर होने की वजह से उन्हें याद रखना मुश्किल रहता है।
हर स्तर पर होगी समीक्षा
ऐसे मामलों में अब एसपी से लेकर डीजीपी तक सभी करेंगे। ऐसे मामलों की सबसे पहले पुलिस अधीक्षक द्वारा समीक्षा की जाएगी इसके बाद जोन स्तर पर और फिर डीजीपी द्वारा समीक्षा की जाएगी। यही नहीं जनसुनवाई में पुलिस अधीक्षक कार्यालय में गायब हुए बच्चों के परिजन को प्राथमिकता से सुना जाएगा।
महिला अपराधों में 15 फीसदी की कमी
बीते साल सरकार द्वारा महिला अपराध रोकने के लिये कड़े कदम उठाए जाने की वजह से बीते नौ माह में 15 फीसदी से अधिक कमी आयी है। अप्रैल-2019 से दिसम्बर-2019 के 9 माह की अवधि में कुल 24 हजार 187 मामले दर्ज किये गये, जबकि अप्रैल-2020 से दिसम्बर-2020 के 9 माह की अवधि में महिला अपराधों के 20 हजार 522 मामले ही दर्ज हुए। जानकारी अनुसार वर्ष 2019 में महिला अपराध के प्रकरण 11.1 प्रतिशत थे, जबकि वर्ष 2020 में मात्र 9.3 प्रतिशत महिला अपराध के प्रकरण दर्ज हुए। इस अवधि में बलात्कार के प्रकरणों में 15.4 प्रतिशत की गिरावट आई। अपहरण एवं व्यपहरण के प्रकरणों में 16.8 प्रतिशत की गिरावट आई। छेड़छाड़ के प्रकरणों में भी 9.5, भ्रूण हत्या में 17.1 और मानव दुव्यार्पार के प्रकरणों में 15.7 प्रतिशत की कमी आयी है। इसी तरह से मार्च, जुलाई एवं सितम्बर में चलाये गये 3 अभियान में 3 हजार 337 बालिकाएं बरामद की गई हैं। जो राज्य की औसत बरामदगी का प्रतिशत 60.3 है। इस मामले में देवास ने सर्वाधिक बरामदगी 84.4 की है।
यह बताई डीजीपी ने वजह
डीजीपी जौहरी ने समीक्षा में इनके लापता होने की प्रमुख वजहों को भी बताया। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र के थानों में दर्ज मामलों में अधिकाश में बिना बताए घर से जाना, नाराज होकर भागना या बिना बताए प्रेमी के साथ भागने के तथ्य सामने आए हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र से मजदूरी के नाम पर पलायन होता है। इसमें श्रम विभाग की कार्रवाई आवश्यक होगी। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भी देखें, कॉन्ट्रैक्टर उन्हें कहां और किस कार्य से ले जाते हैं, इसका रिकॉर्ड रखा जाए।

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