क्या नीतीश बाबू केंद्रीय कैबिनेट में शामिल होगे?

नगीन बारकिया

वैसे तो यह बहुत दूर की कोड़ी लगती है लेकिन संसद के गलियारों में चल रही इन चर्चाओं को एकदम नकारा नहीं जा सकता। कहीं न कहीं आग जलती है तभी धुंआ दिखाई देता है। बिहार चुनावों के प्रभारी के रूप में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ ही महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को भी बिहार का कार्य सौंपने के भाजपा हाईकमान के फैसले के बाद ही इन चर्चाओं ने जन्म लिया जिसमें कहा जा रहा है कि अब जदयू नेता नीतीश कुमार की सीएम की पारी समाप्त हो रही है और उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में कोई भारी भरकम मंत्रालय देकर दिल्ली बुलाया जा रहा है। जहां तक बिहार के मुख्यमंत्री पद का सवाल है अब वह भाजपा अपने पास रखेगी और संभवतः लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी को उनके धैर्य के फल के रूप में दिया जाएगा। यह भी बताया जा रहा है कि लोजपा नेता चिराग पासवान को एक रणनीति के तहत एनडीए से बाहर रखा गया है ताकि समय आने पर उन्हें भाजपा की बी टीम के रूप में उपयोग में लाया जा सके। विधानसभा चुनावों के लिए लोजपा की सूची में विद्रोही भाजपाइयों के नाम भी इसी ओर इशारा करते हैं कि एनडीए की हिस्सेदारी में जो सीटें भाजपा को नहीं मिल पाई हैं उन पर उसके उम्मीदवार विद्रोही बनकर लोजपा के टिकट पर भाग्य आजमाएंगे और समय आने पर वे भाजपा के काम आएंगे।

पटरी दुकानदारों के लिए घोषणा कर सो गई सरकार
कोरोना वायरस की देन कहे जाने वाले लॉकडाउन के शिकार बने पटरी दुकानदार जिन्हे खोमचा व्यापारी, स्ट्रीट वेंडर या हॉकर के नाम से भी पुकारा जाता है, वे अपने चौपट हुए धंधे को वापस पटरी पर ला सकें इसके लिए सरकार ने एक बडी ही लोकलुभावन घोषणा की जिसके तहत ऐसे दुकानदारों को बिना ब्याज दस हजार का लोन बैंक से दिलाने का वादा किया गया। यह योजना कहने को बहुत अच्छी है लेकिन इसको अमलीजामा पहनाने का जिम्मा जिन अफसरों पर है उन पर मानीटरिंग करने वाले या तो नदारद हैं या जानबूझकर चादर तान सो गए हैं। इधर लोन के लिए ये पटरी दुकानदार बैंकों के चक्कर लगाकर घनचक्कर बन रहे है और उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। ऊपर से सरकार ने एक घोषणा और कर दी कि जो व्यापारी दस हजार का लोन चुका देगा उसे बीस हजार का लोन दिया जाएगा। घोषणाएं बहुत अच्छी हैं लेकिन इस बात पर कौन ध्यान देगा कि जो घोषणाएं वे कर रहे हैं उन पर अमल हो रहा है या नहीं। बेचारा सर्वहारा वर्ग हर तरफ शोषित होता है। उन्हें पता ही नहीं चलता कि उनके भले के लिए कोई योजना सरकार ने दी है। कुछ को पता चलता है तो वह दस्तावेजों को पूरा करते करते अचेत हो जाता है। कभी नगर निगम में जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिलते तो कभी बैंक मैनेजर नदारद होते हैं, या मिलते हैं तो वे नियमों में उलझाकर रख देते हैं। हो यह रहा है कि जरूरतमंद दुकानदारों को लोन नहीं मिल रहा है और जिनकी दुकानें नहीं है वे लोग लोन लेकर चादर तानकर सो रहे हैं। आखिर कब तक यूं ही चलता रहेगा- अंधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा। यह भी ध्यान देने योग्य है कि भाजपा का लाखों सदस्यों वाला संगठन क्या कर रहा है, उनके पदाधिकारी इस योजना का लाभ जनता तक क्यों नही पहुंचा पा रहे हैं। उन्होंने क्यों गरीबों को उनके हाल पर छोड़ रखा है।

चीन मामले पर क्या बोले राहुल
इन दिनों कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का वह बयान काफी वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने चीन की हैसियत मात्र पंद्रह मिनट की बताई है। इसमें राहुल गांधी का कहना है कि वो सत्ता में होते तो सिर्फ 15 मिनट में चीन की सेना को भगा देते. सिर्फ भगा नहीं देते, बल्कि उसे उठाकर 100 किलोमीटर पीछे फेंक देते। राहुल गांधी ने ये बात हरियाणा के कुरुक्षेत्र में किसानों की एक रैली में कही है। राहुल गांधी ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कायर शब्द का प्रयोग किया। राहुल गांधी सांसद हैं और कांग्रेस पार्टी उन्हें भावी प्रधानमंत्री मानती है. इसलिए राहुल गांधी का यह बयान अपने आप में अहम हो जाता है।

जेईई एडवांस में तीसरा मौका …।
आईआईटी की तैयारी कर रहे छात्रो के लिए यह एक अच्छी खबर हो सकती है कि इन परीक्षाओँ के इतिहास में पहली बार छात्रों को जेईई एडवांस में तीसरा मौका देने की तैयारी चल रही है। अभी तक एक छात्र दो बार जेईई एडवांस में भाग ले सकता है। हालांकि सरकार कोविड-19 के चलते सिर्फ एक वर्ष के लिए तीसरा विशेष अवसर देने की तैयारी कर रही है। इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 13 अक्तूबर को ज्वाइंट एडमिशन बोर्ड की विशेष बैठक बुलाई गई है। यह चांस जीरो ईयर के तहत होगा। इसमें सभी 23 आईआईटी के डायरेक्टर, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, यूजीसी, एआईसीटीई व एनटीए के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

Related Articles