ऑफ द रिकॉर्ड/कोरोना- डरा रहे हैं ये आंकड़े

– नगीन बारकिया

कोरोना वायरस

कोरोना- डरा रहे हैं ये आंकड़े
कोरोना वायरस के चलते एक साल से ऊपर हो गया है लेकिन जिस तेज गति से यह पिछले दो महीनों से चल रहा है उसने तो लोगों की सोचने समझने की बुद्धि पर ही ताला जड़ दिया है। इन दिनों जो आंकड़े उभरकर सामने आ रहे हैं वह किसी को भी डराने के लिए काफी हैं। रोजाना आंकड़े रिकार्ड तोड़ रहे हैं और लोग डरकर एक दूसरे से यही पूछ रहे हैं कि आखिर यह कहर कब खत्म होगा। हालाकि पूछने वाले और उत्तर देने वाले दोवों को ही यह पता है कि उन्हें कुछ नहीं पता। देशभर के अलग-अलग राज्यों और शहरों में तमाम तरह की पाबंदियां भी लगाई जाने लगी हैं। कहीं नाइट कर्फ्यू, कहीं वीकेंड लॉकडाउन तो कहीं पर पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई है। राज्य कोरोना मामलों को नियंत्रित करने के लिए ये तमाम तरीके अपना रहे हैं। इस बीच वायरस की इस दूसरी लहर में एक ऐसा ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जो काफी चिंताजनक है। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार यह वायरस बुजुर्गों के बजाय युवाओं और बच्चों में ज्यादा तेजी से फैल रहा है। दरअसल कोरोना वायरस के पहले फेज में इस वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित लोगों में बुजुर्ग शामिल थे, लेकिन इस बार यह मामला बिल्कुल उलट हो गया है। यही कारण है कि एक महीने में 5 राज्यों के करीब 80 हजार बच्चे कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। वर्तमान में बच्चों के लिए कोई टीका मौजूद नहीं है। हाल ही में ब्रिटेन में बच्चों पर एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के परीक्षण को भी रोक दिया गया, जब टीके का उन पर बुरा प्रभाव पड़ने की रिपोर्ट सामने आई, जिसके कारण यूरोपीय राष्ट्र में सात मौतें भी हुई।

पाक ने दिया 1100 सिख यात्रियों को वीजा
पाकिस्तान में भारत के साथ रिश्तों में आए बदलाव का एक नमूना तब सामने आया जब पाकिस्तान में प्रतिवर्ष होने वाले बैसाखी उत्सव में भाग लेने के लिए 1100 भारतीय सिख तीर्थ यात्रियों पाक ने वीजा जारी कर दिया। यह उत्सव इस बार 12 से 22 अप्रैल तक होना है। पाकिस्तान उच्चायोग ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि पाकिस्तान सरकार ने पंजाबी और सिखों के लिए बैसाखी पर्व के महत्व के देखते हुए यह फैसला किया है। वास्तव में यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों देशों के रिश्तों में कुछ बदलाव आया है। भारत और पाकिस्तान की सेनाएं पिछले दिनों 2003 के सीजफायर समझौते को लागू करने पर सहमत हुई हैं। पिछले दिनों पाकिस्तान ने भारत से कपास और चीनी आयात को मंजूरी दी थी। हालांकि, विपक्ष और अपने ही कुछ मंत्रियों के दबाव में इमरान सरकार को यह फैसला वापस लेना पड़ा। धार्मिक यात्रा पर भारत और पाकिस्तान के बीच 1974 में स्थापित प्रॉटोकॉल के तहत हर साल बड़ी संख्या में सिख तीर्थ यात्री विभिन्न त्योहारों को मनाने के लिए पड़ोसी देश में जाते हैं। सिखों के कई बड़े धार्मिक स्थल बंटवारे के बाद पाकिस्तान के हिस्से में चले गए।

पीएम मोदी ने कुछ यूं बताई अपनी वर्किंग स्टाइल
प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को जब बच्चों से परीक्षाओं के विषय में चर्चा की तो उन्होंने बच्चों को बड़े ही अनौपचारिक अंदाज में अपनी वर्किंग स्टाइल बता डाली। मोदी ने अपना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा कि जब मैं मुख्यमंत्री था, तब भी और आज जब प्रधानमंत्री हूं तब भी मुझे बहुत कुछ पढ़ना पढ़ता है। बहुत कुछ सीखना पड़ता है। चीजों को समझना पड़ता है। तो मैं क्या करता हूं कि जो मुश्किल बातें होती हैं, मैं सुबह शुरू करता हूं तो कठिन चीजों से शुरू करना पसंद करता हूं। मुश्किल से मुश्किल चीजें मेरे अफसर मेरे सामने लेकर आते हैं, उनको मालूम होता है कि मेरा अलग मूड है। मैं चीजों को काफी तेजी से समझ लेता हूं। फैसला करने की दिशा में आगे बढ़ता हूं। मोदी ने आगे कहा कि सुबह होते ही मैं कठिन चीजों से मुकाबला करने निकल जाता हूं। आपको डर एग्जाम का नहीं है, आपको डर किसी और का है और वह क्या है? आपके आस-पास एक माहौल बना दिया गया है कि यही एग्जाम सब कुछ है, यही जिंदगी है। हम थोड़ा ज्यादा सोचने लग जाते हैं। परीक्षा जीवन को गढ़ने का एक अवसर है, उसे उसी रूप में लेना चाहिए।  हमें अपने आप को कसौटी पर कसने के मौके खोजते ही रहना चाहिए, ताकि हम और अच्छा कर सकें। हमें भागना नहीं चाहिए।

महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ पर बिगड़े हर्षवर्धन
कोरोना वायरस के मामलों पर बढ़ोतरी को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने बुधवार को महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सरकार पर जमकर निशाना साधा। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश में वैक्सीन की कोई कमी नहीं है, कुछ राज्य सरकारें अपनी नाकामी को छिपाने के लिए जनता में दहशत फैलान का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने महाराष्ट्र का नाम लेते हुए कहा कि टीके की कमी को लेकर वहां जनप्रतिनिधियों के बयान सामने आए हैं। यह कुछ भी नहीं है, यह महाराष्ट्र सरकार की महामारी के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए बार-बार विफलताओं से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

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