ऑफ द रिकॉर्ड/क्या वास्तव में चुनाव कराना इतना जरूरी था…।

– नगीन बारकिया

चुनाव

क्या वास्तव में चुनाव कराना इतना जरूरी था…।
जिसका डर था वही हुआ। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के समाप्त होते होते कोरोना का विस्फोट हो ही गया। लंबी चुनाव प्रक्रिया आम जनता के लिए जानलेवा साबित हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ही माना जाए तो इन राज्यों में दोगुना से लेकर पांच-छह गुना तक संक्रमितों की संख्या में इजाफा हुआ है। सरकार का ध्यान इन राज्यों में कोविड की बजाय चुनावों पर अधिक केंद्रित था जो कि स्वाभाविक रूप से होना था। इसी तरह जहां उपचुनाव हो रहे हैं वहां भी यही नजारे हैं। मप्र के दमोह में हो रहा उपचुनाव भी राजनेताओं की प्राथमिकता का केंद्र बना हुआ है। जिन्हें दमोह का चुनाव प्रभारी बनाया गया है वे अपनी इस जिम्मेदारी के तहत दमोह में जुटे हुए हैं जबकि इन्हीं प्रभारियों के पास उनके स्वयं के जिलों की कोविड की जिम्मेदारी भी दी गई है जिसमें कई मंत्रियों को 2-2,  3-3 जिलों की कोविड की जिम्मेदारी दी हुई है जिसमें उन्हें दवाओं और अस्पतालों का प्रबंधन, आक्सीजन का प्रबंधन और आपदा प्रबंधन की समीक्षा से संबंधित काम भी करना है लेकिन फिलहाल किसी भी मंत्री की प्राथमिकता दमोह एवं बंगाल चुनाव है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या ऐसी महामारी के बीच इन चुनावों की जरूरत थी। क्यों नहीं इन विधानसभाओं का कार्यकाल समाप्त होने पर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। यदि चुनाव संवैधानिक बाध्यता थी तो क्यों नहीं सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में एक याचिका लगाकर जनहित में चुनाव आगे बढाने का आग्रह किया। शायद सुप्रीमकोर्ट सरकार की अपील को मान भी लेता जिससे सरकार इस खराब स्थिति से भी बच जाती। चूंकि कोरोना प्रोटोकाल के पालन का तो सवाल ही नही था इसलिए औसत के तौर पर देखें तो चुनावों के दौरान पांच राज्यों में मौतों में भी 45 फीसदी की बढोतरी हुई है।

मौत के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने पूरे भारत में तांडव मचा रखा है। हर दिन कोरोना वायरस नया और खौफनाक रिकॉर्ड बना रहा है, जिससे देश में दहशत का माहौल बन गया है। कोविड के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और बीते 24 घंटे में पॉजिटिव केसों की संख्या 2 लाख 16 हजार से अधिक पाई गई है। भारत में कोविड-19 के एक दिन में रिकॉर्ड दो लाख से अधिक मामले सामने आने के बाद इस बीमारी का इलाज करा रहे मरीजों की संख्या 15 लाख के पार चली गई है। महामारी की शुरूआत के बाद से अब तक का यह सर्वाधिक आंकड़ा है, जब एक दिन में 2 लाख 26 हजार से अधिक केस मिले।

…और उद्धव ठाकरे ने दिया पीएम मोदी को धन्यवाद
केन्द्र सरकार ने भारत बायोटेक के कोरोना निरोधक टीके कोवैक्सीन के उत्पादन के लिए मुंबई के हाफकिन इंस्टीट्यूट को अपनी अनुमति दे दी है। महाराष्ट्र सरकार की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक टीके का उत्पादन मुंबई में किया जाएगा। केंद्र की इस मंजूरी के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पहले केंद्र से अनुरोध किया था कि वह हाफकिन इंस्टीट्यूट को कोवैक्सीन का उत्पादन करने की अनुमति दे। वर्तमान में इसका निर्माण हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए केन्द्र ने अपनी मंजूरी दे दी है। अधिकारी ने बताया कि ठाकरे ने अनुमति देने के लिए केन्द्र सरकार को धन्यवाद दिया। पिछले दिनों महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में टीके की कमी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था और कहा था कि केंद्र सरकार उनके साथ भेदभाव कर रही है। भारत बायोटेक टीके के प्रोडक्शन के लिए हाफकिन इंस्टीट्यूट के साथ अपनी तकनीक शेयर करेगा, जिसके बाद टीके का उत्पादन शुरू होगा।

सरकार का बड़ा फैसला, ऑक्सीजन का करेंगे आयात
कोरोना की दूसरी लहर के बाद देश के बड़े शहरों में अस्पताल फुल होते जा रहे हैं तो ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मच गया है। ऑक्सीजन की कमी की शिकायतों और बढ़ती मांग के बीच मोदी सरकार ने विदेशों से ऑक्सीजन आयात का फैसला किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि सरकार 50 हजार मीट्रिक टन ऑक्सीजन का आयात करेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, ”मेडिकल ऑक्सीजन की बढ़ती मांग को देखते हुए 50 हजार मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन के आयात के लिए टेंडर जारी किया जाएगा। संभावित स्त्रोतों की पहचान विदेश मंत्रालय करेगा।”

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