महापंचायत : दिग्विजय ने किसान नेता के रूप में “अरुण” को उभारा

Mahapanchayat: Digvijay elevated "Arun" as farmer leader

भोपाल/अरुण पटेल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की पहल पर  गैर राजनीतिक किसान महापंचायतों के आयोजन की रूपरेखा बनी थी। उसका आगाज कल 4 मार्च से रतलाम जिले के डेलनपुर से हो गया है। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए मध्य प्रदेश के किसानों का आभार माना। किसान महापंचायतों का सिलसिला रतलाम जिले से शुरू हो गया है। दिग्विजय ने महापंचायत शुरू होने के पहले ही एक ‘चौंकाने वाला ऐलान भी किया कि इन महापंचायतों में वे कोई भाषण नहीं देंगे और न ही मंच पर जाएंगे। उन्होंने कहा कि कोई भी कांग्रेस नेता ना तो मंच पर जाएगा और ना भाषण करेगा और ना ही किसी राजनीतिक दल का झंडा लगेगा मंच से सिर्फ अरूण यादव भाषण देंगे।
दिग्विजय ने यह भी साफ कर दिया कि अरुण यादव भारत कृषक समाज के अध्यक्ष हैं और वह किसान नेता के रूप में मंच पर जाकर भाषण देंगे लेकिन वे स्वयं और कांतिलाल भूरिया ना तो मंच पर जाएंगे ना भाषण देंगे। इस प्रकार उन्होंने प्रदेश में होने वाली किसान महापंचायतों के लिए पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव को एक प्रकार से किसान नेता के रूप में उभार कर प्रादेशिक फलक पर खुलकर किसानों के लिए संघर्ष करने के लिए आगे बढ़ा दिया है। देखने वाली बात यही होगी कि प्रदेश में किसानों का कितना समर्थन राष्ट्रव्यापी किसान आंदोलन के लिए जुटता  है और प्रदेश में किसान आंदोलन  परवान चढ़ता है। रतलाम की महापंचायत के लिए पहुंचे तीन पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष दिग्विजय सिंह, कांतिलाल भूरिया और अरूण यादव एक साथ मीडिया के सामने आए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह पूरी तरह किसानों के लिये समर्पित कार्यक्रम है, तीन महीने से दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों के समर्थन के लिये महापंचायत आयोजित की है। इसमें केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के नुकसान आदि सामने रखे जायेंगे। सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेता महापंचायत के लिये अन्य जिलों में होने वाली यात्रा के दौरान कोई राजनीतिक बयान या बात नहीं करेंगे न ही कोई भाषण देंगे। वह खुद भी मीडिया से कोई राजनीतिक चर्चा नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अरूण यादव मंच से कृषि कानूनों व अन्य पहलुओं पर भाषण करेंगे। दिग्विजय ने कहा है कि संयुक्त एकता मंच जिन्होंने पूरे देश में आंदोलन चला रखा है उसे सहयोग करने का कांग्रेस पार्टी ने निश्चय किया है और हम सहयोग कर रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानून का संसद के अंदर और बाहर कांग्रेस पार्टी ने विरोध किया है। अब हम गैर राजनीतिक महापंचायत के माध्यम से जनता के बीच जाएंगे उन्हें समझाएंगे कि हम इसका विरोध क्यों कर रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने भी एक पर्चा निकाला है जिसे हम जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। हम सभी को साथ लेकर चल रहे हैं और इस आंदोलन को प्रदेश के कोने-कोने तक पहुंचाएंगे। अरुण यादव ने कहा कि जब तक यह कानून वापस नहीं होंगे हम सभी वर्गों को साथ लेकर संघर्ष करते रहेंगे। प्रदेश में हम दिग्विजय सिंह की अगुवाई में गैर राजनीतिक संघर्ष तीनों कृषि कानून जब तक केंद्र सरकार वापस नहीं लेती आंदोलन करते रहेंगे। दिग्विजय सिंह किसान महापंचायत में शामिल हुए और किसानों के साथ ही बैठकर भोजन किया।
नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियां
मध्यप्रदेश में होने वाले 407 नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियां राज्य निर्वाचन आयोग ने काफी तेज कर दी है और उसने मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन कर दिया। संकेत मिल रहे हैं कि निर्वाचन आयोग 10 मार्च तक चुनावों की तारीखों का ऐलान कर सकता है। 6 मार्च को राज्य निर्वाचन आयुक्त बी पी सिंह वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों के कलेक्टरों से चुनावों की तैयारियों को लेकर चर्चा करेंगे। आयोग नगरीय निकाय चुनाव ईवीएम से कराएगा और पंचायतों तथा सरपंचों के चुनाव मतपत्र से कराए जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग नगरीय निकाय चुनाव दो चरणों में करवाने की तैयारी में है। भाजपा और कांग्रेस तो काफी पहले से चुनावी तैयारियों में मशगूल हैं तथा आम आदमी पार्टी ने प्रदेश के नगर पालिक निगमों  के कुछ वार्ड के उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर दी है तो कांग्रेस ने इंदौर नगर निगम के लिए महापौर पद का उम्मीदवार विधायक संजय शुक्ला को घोषित कर दिया है। नगरीय निकाय चुनावों में असली मुकाबला तो भाजपा और कांग्रेस के बीच में होना है लेकिन देखने वाली बात यही होगी कि आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी तथा निर्दलीय भाजपा और कांग्रेस में से किसका खेल बिगाड़ते हैं।
शहीद स्मारकों के संरक्षण की मांग
मध्य प्रदेश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारियों की बैठक में प्रदेश समन्वयक भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि प्रदेश में आज लगभग 30 हजार उत्तराधिकारी परिवार हैं। वे कांग्रेस के संस्कारों से जुड़े हुए हैं, उनकी रक्त शिराओं में कांग्रेस प्रवाहित होती है और वह बहुलतावादी सर्व समाज के समर्थक हैं। उन्हें कांग्रेस से जोड़ने के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया है। प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष चंद्रप्रभाष शेखर ने पार्टी की ओर से आश्वस्त किया कि कांग्रेस पार्टी इन परिवारों से निरंतर जुड़ने का प्रयास करेगी और कांग्रेस के संगठन में उन्हें उपयुक्त सम्मान देगी। बैठक में विभिन्न जिलों से आए हुए पदाधिकारियों ने स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को संरक्षित करने के लिए सरकार पर दबाव बनाने की जरूरत महसूस की। प्रकोष्ठ के समन्वयक एवं विचार विभाग के अध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने बताया कि देश की आजादी के बाद हर शहर में प्रमुख स्थानों पर आजादी की भावना को जगाए रखने के लिए शहीद स्मारक एवं जय स्तंभ का निर्माण किया गया था। यह आज राष्ट्रीय स्मारक बन चुके हैं  लेकिन इन्हें विकास के नाम पर या तो हटाया जा रहा है या तोड़ा जा रहा है यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण कार्यवाही है। कांग्रेस पार्टी के स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारियों  की इस बैठक में इन स्मारकों को संरक्षित करने एवं दर्शनीय बनाने की सरकार से मांग की गई ताकि आजादी के रणबांकुरों का इतिहास जनता के सामने प्रत्यक्ष हो।
– लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं।

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