कैलाश ने उषा को मुश्किल में डाला

प्रणव बजाज

Kailash troubled Usha


कमलनाथ सरकार को गिराने का खुलासा करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आडियो के बाद अब भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने भी एक खुलासा करके सनसनी फैला दी। कैलाश विजयवर्गीय के बयान से पार्टी में एक बार फिर हलचल हो गई है। विजयवर्गीय ने एक इंटरव्यू में जब यह खुलासा किया कि भाजपा विधायक ऊषा ठाकुर को महू विधानसभा सीट से जिताने के लिए अच्छा खासा पैसा खर्च करना पड़ा और सेटिंग करना पड़ी, तब कहीं जाकर वह चुनाव जीत सकी थीं। विजयवर्गीय के इतना भर कहने से मप्र कांग्रेस को एक बार फिर मौका मिल गया। उसने चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए महू से विधायक उषा ठाकुर का निर्वाचन रद्द करने की मांग की। इसे लेकर कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता द्वारा शिकायती पत्र सौंपा गया है, जिसमें इस मुद्दे पर आयकर विभाग से भी संज्ञान लेने की बात कही गई है। भाजपा के एक पदाधिकारी कहते हैं कि मध्यप्रदेश में थोड़े दिन बाद ही उपचुनाव होना है, कहींं ऐसा न हो जाए कि विजयवर्गीय का बड़बोलापन पार्टी को भारी पड़ जाए।

चोरी और ऊपर से सीना जोरी
चोरी ऊपर से सीना जोरी…यह कहावत दो आईएएस अफसरों को भारी पड़ गई और राज्य सूचना आयुक्त के निशाने पर आ गए हैं। आरटीआई के तहत जानकारी न देने पर राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने राजस्व विभाग के अपर सचिव आरएस वर्मा पर 25 हजार का जुर्माना किया है। मामला नगरीय प्रशासन विभाग में भ्रष्टाचार से जुड़ा है। वर्मा पहले इसी विभाग में थे। इसी मामले में तत्कालीन लोकसूचना अधिकारी भारत यादव पर पांच हजार रुपए का जुर्माना लगाया था। जो कि वर्तमान में जबलपुर में कलेक्टर हैं। हालांकि जुर्माने से बचने के लिए यादव जबलपुर हाईकोर्ट की शरण में गए हैं। इसी प्रकरण में खरगोन कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड सूचना आयुक्त के निशाने पर हैं। मामला यूं था कि विदिशा में सीएमओ आर. कार्तिकेय द्वारा किए गए कथित घोटाले की जांच रिपोर्ट और इससे जुड़े दस्तावेज आरटीआई के तहत मांगे गए थे। उनकी शिकायत पर घोटाले की जांच 2016 में नगरीय प्रशासन विभाग ने की थी, लेकिन विभाग जानकारी देने में आनाकानी करता रहा। उस समय वर्मा ने दावा किया कि उन्होंने कोई लापरवाही नहीं की है। इसके बाद जब सूचना आयुक्त ने जांच की तो दस्तावेज में पाया गया कि वर्मा के पास दस्तावेज थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर दस्तावेज नहीं दिए। अब सूचना आयुक्त की निगाहें टेढ़ी होने पर दोनों आईएएस भागे-भागे फिर रहे हैं सो तो बात है ही, प्रशासनिक हल्कों में किरकिरी हो रही है सो अलग।

शिव-नाथ आमने-सामने
आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश की 24 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं और भाजपा और कांग्रेस किसी न किसी बहाने एक-दूसरे की घेराबंदी करने में लगे हुए हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ एक-दूसरे पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। दोनों नेता अब भारतीय सीमा पर चीनी सैन्य हमलों को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। इस मुद्दे पर वे नूरा-कुश्ती करने लग गए हैं। सीएम ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर भारतीय सेना का मनोबल तोडऩे का आरोप लगाते हुए कहा कि ‘ऐसे लोग नेता कहलाने लायक नहीं हैं। राहुल सेना का अपमान कर रहे हैं। वह जिस तरह के कमेंट कर रहे हैं, कहते हुए शर्म भी आती है और तकलीफ भी होती है कि वो भारत के नागरिक हैं। इस पर पलटवार करते हुए नाथ ने कहा कि शर्म तो शिवराजजी को पीएम नरेन्द्र मोदी के उस बयान पर आनी चाहिए जिसमें उन्होंने कहा है कि हमारी सरजमीं पर कोई घुसपैठ नहीं हुई। इसके साथ नाथ ने कहा कि यदि राहुल जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं और पीएम से इस मामले में देश को सच्चाई बताने का आग्रह कर रहे हैं तो यह उनका कर्तव्य है। हालांकि राजनीति के जानकार तो यही कह रहे हैं, चीनी सैन्य हमले तो एक बहाना है, सच तो यह कि इन आरोप-प्रत्यारोपों के जरिए शिव-नाथ उपचुनाव की कवायद कर रहे हैं।

बंगला चाहिए न्यारा सा
शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अभी कवायद चल रही है। अभी यह भी तय नहीं है कि कब मंत्रिमंडल विस्तार होगा और मंत्रिमंडल में कौन मंत्री बन रहा है और कौन नहीं। लेकिन भाजपा और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए वो विधायक जिन्हें, पूरी उम्मीद है कि उनका मंत्रिमंडल में चांस लग सकता है, उन्होंने प्यारे से-न्यारे से बंगले की तलाश शुरू कर दी है। मंत्री बनने की शर्त पर कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए सिंधिया समर्थक तीन पूर्व विधायकों ने यहां-वहां से अच्छे बंगलों की जानकारी भी ली है। इसके अलावा भाजपा के वे विधायक जिन्हें लगता है कि वे मंत्री बनने वाले ही हैं, वे चार इमली क्षेत्र में कांग्रेस के तीन पूर्व मंत्रियों के बंगले भी देख चुके हैं। हालांकि इन भाजपा विधायकों ने बंगले तो कई देखे हैं, लेकिन इन पूर्व विधायक को पूर्व मंत्री तरुण भानोट, विजयलक्ष्मी साधौ और सज्जन सिंह वर्मा के बंगले पसंद आ रहे हैं। वे इनमें से कोई बंगला एक अपने रहने के लिए अलाट कराना चाहते हैं। अंदरखानों की खबर है कि भानोट वाला बंगला तो वीडी शर्मा अलाट भी हो चुका है, बावजूद इसके ज्यादा की निगाहें इसी बंगले पर हैं। दूसरा सबकी पसंद पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा का बंगला बना हुआ है। स्वाभाविक है, जब मंत्री बनेंगे तो बंगला भी न्यारा सा और प्यारा सा चाहिए।

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