जयवर्धन बोले हिन्दूपत की उपाधि है मेरे पास

I have the title of Hindupat, Jayawardhan said

प्रणव बजाज

पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने सांवेर से भाजपा प्रत्याशी तुलसी पर पलटवार करते हुए कहा कि हमारे परिवार के पास हिन्दूपत की उपाधि है। हमारे यहां एक विजयपुर गांव है। यह नाम तात्या टोपे ने अंग्रेजों पर विजय के उपरांत दिया था। आजादी के युद्ध में हमारे पूर्वजों का सहयोग था। हमारे परिवार का इतिहास जानना है, तो विजयपुर चले आइए। इतिहास के साथ कई जीवित सबूत भी मौजूद है। संत पीपाजी हमारे पूर्वज है। तुलसी पहले संत पीपाजी और हिन्दूपत के बारे में जानकारी प्राप्त कर लें, इतिहास पता चल जाएगा। जयवर्धन ने सिंधिया को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उनके लिए सत्य के मायने अलग है। 1857 में जो गद्दारी सिंधिया ने की थी उस समय उसको भी सिंधिया परिवार सत्य की जीत का नाम ही देते थे। लेकिन जो सत्य था आज इतिहास इसका गवाह है। महाराज छाती पीट-पीटकर लाल पीले होकर तमतमा कर बोल रहे हैं कि चुनाव मैं लड़ रहा हूं। सबको मालूम है कि यह चुनाव आपके व्यक्तिगत अहम के कारण ही प्रदेश को भोगना पड़ रहा है। बता दें कि सिंधिया परिवार को गद्दार करार दिए जाने के बाद तुलसी सिलावट ने जयवर्धन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि आपके पूर्वजों की गद्दारी के किस्से इतिहास में दर्ज हैं। अकबर से लेकर जाकिर नाइक तक के किस्से गिनाऊँ क्या ? दरअसल इसी को लेकर दोनों नेताओं में ट्विटर वार छिड़ गया है।

बंटाढार की जगह चल पड़ा गद्दार
मध्य प्रदेश में 2003 के विधानसभा चुनाव में जिस तरह भाजपा ने प्रदेश की बदहाली के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को जिम्मेदार बताया और उन्हें मिस्टर बंटाढार कहा। भाजपा के बंटाधार का टाइटल चल पड़ा जो अभी भी प्रदेश की सियासत में चल रहा है। ठीक इसी तरह उपचुनाव में इस बार कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को कमलनाथ सरकार गिराने के लिए जिम्मेदार ठहराया। कांग्रेस ने सिंधिया को गद्दार बताया है। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर चंबल अंचल के साथ ही उपचुनाव वाली सभी 28 सीटों पर गद्दार चर्चा का विषय बना है। माना जा रहा है कि जिस तरह से जनता में गद्दार शब्द चर्चित हो रहा है उससे लगता है कि अब प्रदेश की सियासत में गद्दार उसी तरह से चल चलेगा जिस तरह से बंटाधार चल रहा है।

प्रत्याशी कमर दर्द का शिकार क्यों हो रहे हैं
प्रदेश की 28 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए अंतिम चरण का प्रचार चल रहा है ऐसे में प्रत्याशी बहुत कम आराम कर रहे हैं, बल्कि लगातार 2 से 3 तक चलते हैं और रास्ते में जो भी मिलता है उसके पैर छूते हैं। पैर छूने के लिए शरीर को बार-बार झुकाने से कमर में दर्द होना शुरू हो जाता है। दरअसल, चुनाव में मतदाताओं के पैर छूकर उन्हें मत देने के लिए मनाना ना केवल मूल मंत्र है बल्कि आसान तरीका भी है, लेकिन जनसंपर्क के दौरान बार-बार मतदाताओं के पैर छूना प्रत्याशियों के लिए भारी पड़ रहा है। ग्वालियर विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी सुनील शर्मा कमर दर्द के शिकार हो गए हैं। यही हालत उनके प्रतिद्वंदी प्रद्युम्न तोमर की भी है। साथ ही चंबल की अंबाह सीट पर भी प्रत्याशी मतदाताओं के पैर छू-छूकर परेशान हो चुके हैं। लेकिन प्रत्याशियों के साथ मजबूरी यह है कि यदि वे पैर नहीं छूते हैं तो मतदाता समझते हैं कि प्रत्याशी को जब अभी घमंड है, तो चुनाव जीतने के बाद क्या होगा। बता दें कि वर्तमान में अधिकतर प्रत्याशी सभी मतदाताओं के पैर छू रहे हैं।

मुश्किल है सुवासरा में डंग का डंका
सुवासरा विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी हरदीप सिंह डंग के रूप में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री इस सीट से चुनाव लड़ रहा है। भाजपा प्रत्याशी का मंत्री पद होना उनकी बड़ी ताकत है। वहीं पार्टी प्रत्याशी डंग को चार चुनाव लड़ने और दो चुनाव जीतने का भी अनुभव है। जिससे उनका पूरे विधानसभा क्षेत्र में सतत संपर्क और पहुंच बनी हुई है। डंग क्षेत्र के विकास और समस्याओं के मुद्दे पर विधानसभा में पूरे जोर-शोर से उठाते भी रहे हैं, लेकिन उपचुनाव में भितरघात की आशंका कांग्रेस की अपेक्षा भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में ज्यादा दिखाई दे रही है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में ढंग के आने के बाद पार्टी के जो नेता आगामी चुनाव के लिए दावेदार थे वे अपने राजनीतिक भविष्य के प्रति चिंतित बताए जा रहे हैं। पिछले दिनों पार्टी के प्रत्याशी को भी कहीं-कहीं असंतोष का सामना करना पड़ा था, जिससे उनको वोट कटने की चिंता बनी हुई है। यहां ढंग की अपेक्षा कांग्रेस प्रत्याशी को भितरघात की आशंका बहुत ही कम है। ऐसे में क्षेत्र में चर्चा है कि क्या डंग का फिर यहां डंका बजेगा।

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