नशे ने मार डाला माराडोना को

नगीन बारकिया

फुटबॉल के महानायक अर्जेंटीना के हीरो डिएगो माराडोना को आखिर उनके जानलेवा नशे की आदत ले डूबी और एक महान खिलाड़ी असमय मौत का शिकार हो गया। उनकी उम्र अभी 60 वर्ष की ही थी। अर्जेंटीना को 1986 में फुटबॉल विश्व कप जिताने वाले माराडोना की तीन सप्ताह पहले ही दिमाग में ब्लड क्लॉट की सर्जरी हुई थी। साहसी, तेज तर्रार और हमेशा अनुमान से परे कुछ करने वाले माराडोना के पैरों का जादू पूरी दुनिया ने फुटबॉल के मैदान पर देखा। विरोधी डिफेंस में सेंध लगाकर बायें पैर से गोल करना उनकी खासियत थी। इंग्लैंड के खिलाफ 1986 विश्वकप में माराडोना ने एक ऐसा गोल किया था जिसकी चर्चा के बगैर उनका परिचय अधूरा लगेगा। बाद में इस गोल को हैंड ऑफ गॉड गोल कहा गया। इस जीत से इंग्लैंड की चुनौती खत्म हो गई थी तथा अर्जेंटीना का विेजेता बनने का रास्ता साफ हो गया था। अपनी इटैलियन टीम नपोली के साथ खेलते हुए भी उन्होंने 1987, 1990 में सीरीज ए टाइटल के अलावा 1987 और 1991 में यूइफा कप में जीत दिलाई। यह कहा जा सकता है कि यह समय याने अस्सी का दशक उनके जीवन का स्वर्णिम काल था। इसीलिए माराडोना के लिए यह कहा जाता था कि वह सब कुछ दिमाग में सोच लेते थे और अपने पैरों से उसे मैदान पर सच कर दिखाते थे। हालाकि माराडोना के जीवन का दो दशक लंबा अंतिम दौर अत्यंत खराब रहा। वह कोकीन के नशे में फंस चुके थे, 1991 में उन्हें 15 महीनों के लिए बैन कर दिया गया, 1994 में वर्ल्ड कप से बाहर कर दिया गया। 1999 और 2000 में भी उन्हें दिल की बीमारियों की वजह से अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। उसी साल जनवरी में उन्हें पेट में ब्लीडिंग की शिकायत हुई तो जुलाई में घुटनों का ऑपरेशन कराना पड़ा था। तीन सप्ताह पहले ब्रेन में ब्लड क्लॉटिंग की वजह से सर्जरी की गई थी। चार विश्व कप खेलने वाले माराडोना ने 91 मैचों में 34 गोल किए।

न्यूजीलैंड में संस्कृत में ली सांसद ने शपथ
यह मन को प्रसन्न करने वाली तथा देशप्रेम जगाने वाली ऐतिहासिक घटना कही जा सकती है जब न्यूजीलैड की संसद के लिए चुने गए एक नए सांसद ने संस्कृत में शपथ ग्रहण ली। भारतीय मूल के इन महानुभाव का नाम डॉ. गौरव शर्मा है जो अपने कार्यों के अनुरूप गौरवशाली क्षण लेकर आए। यह घटना ऐतिहासिक इसलिए भी है कि वे विदेशी धरती पर संस्कृत में शपथ लेने वाले भारतीय मूल के पहले सांसद बन गए हैं। हिमाचल प्रदेश के मूल निवासी डॉ. शर्मा को हाल ही में न्यूजीलैंड में हुए चुनाव में लेबर पार्टी ने टिकट दिया था। न्यूजीलैंड और सामोआ स्थित हाई कमिश्नर मुक्तेश परदेशी ने यह जानकारी जब सबके साथ शेयर की तो वहां उपस्थित भारतवंशी जनसमूह ने करतल ध्वनि की। उन्होंने कहा कि गौरव ने पहले स्थानीय भाषा में शपथ ली तथा बाद में संस्कृत में भी शपथ ली। उन्होंने ऐसा कर दोनों देशों की संस्कृति और परंपरा को सम्मान दिया।

शादियों के कारण बढ़ सकता है संक्रमण का संकट
सर्दियों का मौसम और उस पर शादियों की बेला ने कोरोना वायरस के संकट को बढ़ाने की आशंका को बल दिया है। इसी कारण स्वास्थ्य अमले की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। कल ही देवउठनी ग्यारस में लोगों ने ऐसी कई शादियों में हिस्सा लिया जिसमें कोरोना के किसी भी प्रोटोकाल का पालन नहीं किया जा रहा था। वास्तव में ऐसी जगहों पर व्यवहारिक रूप से प्रोटोकाल पालन संभव भी नहीं है और यही वजह है कि प्रशासन के माथे पर पसीने की बूंदें दिखाई देने लगी हैं। उन्हें डर है कि कहीं इससे बड़ा संकट न पैदा हो जाए। हालांकि दिल्ली, उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों ने सतर्कता बरतते हुए शादी आयोजनों में एकत्र होने वालों की संख्या घटा दी है। एकादशी के साथ शुरू हुआ शादियों का सीजन 11 दिसंबर तक चलेगा। 25 नवंबर के बाद 27 से 30 नवंबर तक विवाह मुहूर्त हैं, फिर दिसंबर में 1 से 11 तारीख तक मुहूर्त रहेंगे। यानी प्रशासन को अगले 17 दिन तक इन आयोजनों की चुनौती का सामना करना है। 15 दिसंबर से 14 जनवरी तक पौष का महीना रहेगा तब शादी आयोजन नहीं होंगे और प्रशासन को कुछ राहत मिलती दिखाई देगी।

पासवान की रिक्त राज्यसभा सीट का दावेदार कौन?
लोक जनशक्ति पार्टी के संरक्षक और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन से खाली हुई राज्यसभा की सीट पर अपनी अपनी दावेदारी ठोकने की हलचल शुरू हो गई है। चिराग पासवान अपने पिता की इस सीट को अपने पास ही रखने की व्यूहरचना रच रहे हैं वहीं यह सीट भाजपा अपने लिए सुरक्षित करना चाहती है। वैसे भी यह सीट भाजपा लोजपा को देने के मूड में नहीं है। इधर जदयू ने भी लोजपा को सीट देने के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। ध्यान देने योग्य है कि बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने जेडीयू के खिलाफ अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। इसलिए भाजपा नीतीश को नाराज नहीं करना चाहती है और पार्टी ने अपना उम्मीदवार खड़ा करने का मन बना लिया है। मूल रूप से यह सीट भाजपा की है जिसे लोकसभा में विजयी होने पर रविशंकर प्रसाद ने छोड़ा था और तय फार्मूले के तहत रिक्त सीट रामविलास पासवान को दी गई थी। अब लोजपा ने इस सीट का फैसला पीएम मोदी पर छोड़ दिया है। सूत्रों के अनुसार यहां भाजपा शाहनवाज हुसैन या सुशील मोदी को उम्मीदवार बना सकती है।

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