मतदाताओं के उत्साह के आगे फीका पड़ा कोरोना का डर

नगीन बारकिया

तमाम शंकाओं और आशंकाओं को धता बताते हुए बिहार के मतदाताओं ने कोरोना के भय और आतंक के बीच पूरे उत्साह और जोश के साथ मतदान किया और जता दिया कि वे अपने अधिकारों के लिए राजनीतिक रूप से कितने जागरूक हैं। कल बिहार विधानसभा के लिए हो रहे चुनावों में मतदान का पहला चरण था जिसमें करीब 54 फीसदी मतदान हुआ जो लगभग पिछली बार के बराबर ही है। पहले चरण में पटना जिले के पांच विधानसभा क्षेत्रों सहित 16 जिलों के 71 विधानसभा सीटों पर मतदाताओं ने वोट डाले। निर्वाचन आयोग ने वोटिंग प्रतिशत पर खुशी जाहिर की है। एचआर श्रीनिवास ने कहा कि कोरोना संक्रमण में 54 फीसदी मतदान होना अच्छा टर्न आउट है। 2015 विधान सभा चुनाव की तुलना में कोई ज्यादा कम वोटिंग नहीं है। 2015 में 54.75 फीसदी मतदान हुआ था.

सऊदी अरब ने दिया भारत को दिवाली का तोहफा
भारत का विश्व राजनीति में प्रभाव किस तरह बढ़ रहा है इसका एक ताजा उदाहरण तब देखने को मिला जब सऊदी अरब ने अपने द्वारा जारी 20 रियाल के बैंकनोट पर प्रदर्शित मानचित्र में पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान के नक्शे से हटा दिया है। इस बात की ओर पीओके कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने ध्यान आकर्षित किया। मिर्जा ने बुधवार को ट्वीट कर यह दावा किया। उन्होंने एक तस्वीर भी ट्वीट की, जिसमें कैप्शन दिया गया था, भारत के लिए सऊदी अरब का दिवाली तोहफा- पाकिस्तान के नक्शे से गिलगित-बाल्टिस्तान और कश्मीर को हटाया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बताया जाता है कि सऊदी अरब ने 21-22 नवंबर को जी-20 शिखर सम्मेलन के आयोजन की अपनी अध्यक्षता के लिए एक 20 रियाल (सऊदी मुद्रा) का बैंकनोट जारी किया। यह बताया गया कि बैंकनोट पर प्रदर्शित विश्व मानचित्र में गिलगित-बाल्टिस्तान और कश्मीर को पाकिस्तान के हिस्सों के रूप में नहीं दिखाया गया है। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि सऊदी अरब का कदम पाकिस्तान को अपमानित करने के प्रयास से कम नहीं है। भारत ने गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव की बात पर आपत्ति जताई थी। उल्लेखनीय है कि पाक अक्सर हर मंच पर कश्मीर मुद्दा उठाने की कोशिश करता रहा है और ऐसे में सऊदी का यह कदम उसके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

सीबीएसई दे रही है छात्रों को एक और मौका
सीबीएसई ने 2015 से 2020 तक की बोर्ड परीक्षा में असफल परीक्षार्थी को वार्षिक परीक्षा 2021 में शामिल होने का मौका दिया है। बोर्ड की मानें तो जो छात्र 2015 की बोर्ड परीक्षा में असफल हो गये हों वो भी वार्षिक परीक्षा 2021 में शामिल हो सकते हैं। ऐसे छात्र प्राइवेट परीक्षार्थी के तौर पर बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे। बोर्ड ने दसवीं और 12वीं प्राइवेट विद्यार्थी के लिए परीक्षा फॉर्म की तिथि जारी कर दी है। प्राइवेट परीक्षार्थी 11 नवंबर तक परीक्षा फॉर्म भरेंगे। शुल्क के तौर पर 1500 रुपये देने होंगे। विलंब शुल्क के साथ 21 नवंबर तक फॉर्म भरे जायेंगे। ज्ञात हो कि वार्षिक परीक्षा 2021 के नियमित छात्रों का परीक्षा फॉर्म 30 अक्टूबर तक भरा गया है। बोर्ड की मानें तो वार्षिक परीक्षा में फेल छात्र, वार्षिक परीक्षा 2020 कंपार्टमेंट में शामिल छात्र, सितंबर 2020 कंपार्टमेंट में शामिल छात्र भी प्राइवेट परीक्षार्थी के तौर पर फॉर्म भर पायेंगे।

यूपीएससी वालों के लिए भी खुशखबरी
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए खुशखबरी है। केंद्र सरकार सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को वर्ष 2021 की सिविल सेवा परीक्षा में अतिरिक्त मौका देने पर विचार कर रही है। केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने कहा है कि मामले पर विचार किया जा रहा है। गौरतलब है कि यूपीएससी अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि कोविड-19 की स्थिति के मद्देनजर उन्हें 2021 में होने वाली सिविल सेवा परीक्षा में भी बैठने का मौका दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। याचिका 24 उम्मीदवारों द्वारा दायर की गई थी। ध्यान देने योग्य है कि इस बार परीक्षा देने वाले बहुत से अभ्यर्थी अगले साल सिविल सेवा परीक्षा के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा को पार कर जाएंगे। आयु संबंधी नियमों के मुताबिक वह 2021 की सिविल सेवा परीक्षा में नहीं बैठ पाएंगे। कोर्ट ने केंद्र से कहा कि वह वैश्विक महामारी के कारण परीक्षा नहीं दे पाने वाले उन लोगों को एक और मौका देने पर विचार करे, जिनसे पास यूपीएससी परीक्षा देने का इस बार आखिरी अवसर है।

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