चिराग ने कुछ ऐसे माना मोदी का आभार…

Chirag felt like this thanks to Modi…

नगीन बारकिया

बिहार में इन दिनों राजनीति की नई दिशा की बयार बह रही है। लोग भी भ्रमित हैं कि आखिर एक घटना का दूसरी घटना से कोई तालमेल है भी या नहीं। जो एनडीए का समर्थन कर रहा है वही विरोध भी कर रहा है। उन्हें मोदी तो चाहिये लेकिन नीतीश नहीं चाहिये। आखिर इसका कनेक्शन क्या है। रविवार को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि चुनाव दोस्ती, यारी, जाति विरादरी के लिए नहीं होता है, बल्कि समाज और इलाके के विकास के लिए होता है। नड्डा के इस बयान के कई तरह के मतलब निकाले जा रहे हैं। दूसरी तरफ चिराग पासवान ने पिता के अंतिम संस्कार के बाद पीएम मोदी को शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने कहा- आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा पापा की अंतिम यात्रा में किए गए सहयोग के लिए हृदय से आभार। सर आपने पापा की अंतिम यात्रा के लिए सभी व्यवस्था बिना मांगे की। बेटे के तौर पर मैं एक मुश्किल समय से गुजर रहा हूँ।आप के साथ से हिम्मत और हौसला दोंनो बढ़ा है। उल्लेखनीय है कि नीतीश की पार्टी का नेतृत्व मंजूर करने से इनकार कर लोजपा ने एनडीए से किनारा कर लिया है। पार्टी अलग चुनाव लड़ रही है और जेडीयू के खिलाफ भी उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं लोजपा चीफ चिराग पासवान का ये भी कहना है कि उनकी पार्टी का बीजेपी से कोई बैर नहीं है और बीजेपी के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ा जाना चाहिए। अब चुनावी विश्लेषक इन बातों की अपने अपने हिसाब से व्याख्या कर रहे हैं।


भारत-चीन वार्ता का सातवां दौर आज
भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव को लेकर दोनों देशों के बीच कमांडर स्तर की अब तक छह बैठकें हो चुकी हैं और आज बैठक का सातवां दौर है। इस बार खास बात है कि पहली बार इसमें दोनों देशों के राजनयिक भी मौजूद रहेगे। बताया गया है कि चीनी प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्रालय के अधिकारी और राजनीतिक कमिश्नर शामिल हो सकते हैं। इससे पहले 21 सितंबर को हुई छठे दौर की बातचीत में भारत की तरफ से एक वरिष्ठ राजनयिक ने शिरकत की थी। 10 सितंबर को विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेशमंत्री वाँग यी के बीच मॉस्को में हुई मुलाक़ात में पाँच बिंदुओं पर सहमति बनी थी। लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसके कार्यान्वयन में समानता न दिखने के बाद भारत ने अगली बैठक में एक वरिष्ठ राजनयिक को शामिल किया था। वैसे सूत्रों का कहना है कि जब तक चीन पेगॉन्ग त्सो झील के उत्तरी हिस्से और फिंगर एरिया से अपनी सेना नहीं हटाता तब तक इस बैठक से कोई नतीजा निकलेगा ऐसा कहा नहीं जा सकता है।

किसे पहले मिलेगी वैक्सीन

एक आश्चर्यजनक बात यह है कि फिलहाल कोरोना से लड़ने के लिए वैक्सीन तैयार होने की कोई खबर ही नहीं है, यही नहीं कब तक बनेगी यह भी तय नहीं है, और दूसरी ओर हमारे देश के स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन इस वैक्सीन के वितरण का सपना संजोने लग गए हैं। बताया जाता है कि उन्होंने रविवार को कहा कि कोरोना वायरस की वैक्सीन उपलब्ध होने के बाद भारत के सभी नागरिकों को ये मिल सके ये सुनिश्चित करने के लिए सरकार एक से अधिक वैक्सीन निर्माताओं के साथ क़रार करेगी। उन्होंने ये भी कहा कि जो लोग अधिक कमज़ोर हैं उन्हें सबसे पहले वैक्सीन दी जाएगी। ये दो आधार पर तय किया जाएगा कि किसे वैक्सीन पहले दी जाए- पहला, अपने काम के कारण जिन्हें संक्रमण का ख़तरा अधिक है और दूसरा, जो पहले ही दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं और जिनमें संक्रमण के कारण गंभीर बीमारी होने का डर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में जो वैक्सीन बन रही हैं उनमें से भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन दो डोज़ वाली वैक्सीन हैं जबकि कैडिला की वैक्सीन तीन डोज़ वाली वैक्सीन है। भारत की आबादी ज़्यादा है और एक वैक्सीन या फिर एक ही वैक्सीन निर्माता पूरे देश की ज़रूरत को पूरा नहीं कर सकते। इसलिए सरकार देश में कोरोना की कई वैक्सीन लाने के बारे में विचार कर सकती है। अरे भई पहले वैक्सीन बनने की खबर तो आ जाए तब उसे बांटने का प्लान भी बन जाएगा। वैक्सीन लाओ तो सही।

कामाख्या मंदिर के पट खोले गए
कोरोना महामारी के कारण मार्च से बंद गुवाहाटी स्थित सुप्रसिद्ध कामाख्या मंदिर रविवार को श्रद्धालुओं के लिए फिर से खुल गया। हालाकि मंदिर का गर्भगृह श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेगा। वे केवल परिक्रमा कर सकेंगे और मंदिर के मुख्य दरवाजे के बाहर पूजा कर सकेंगे। श्रद्धालुओं को कोविड-19 के कड़े प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। बताया गया है कि मंदिर के फिर से खुलने के बाद पहले दिन काफी कम संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पिछले तीन दिनों में जांच कराने वाले श्रद्धालु अपनी रिपोर्ट दिखाकर सीधे पहाड़ी के ऊपर दर्शन के लिए जा सकेंगे। प्रत्येक श्रद्धालु को मंदिर परिसर में केवल 15 मिनट रहने की अनुमति दी गई है।

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